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ऑफिस के आखिरी दिन घोड़े से पहुंचा ये लड़का, पर इसकी वजह आप सोच नहीं सकते

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहीं इसकी फोटोज.

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अपने ऑफिस के लास्ट दिन इंजीनियर साहब ने अपना दिमाग चलाया.
भैया ऑफिस का लास्ट दिन तो हर कोई अपने लिए यादगार बनाना चाहता है. इसके लिए कोई फेयरवेल रखता है कोई कुछ करता है. लेकिन बेंगलुरू के एक भाईसाहब ने इन सबको पीछे छोड़ दिया. ऐसा कारनामा किया जो कोई शायद ही सोचे. वो भी बेंगलुरू जैसे शहर में. बात कर रहे हैं एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की. नाम है रूपेश कुमार वर्मा. गुरुवार को इनकी नौकरी का आखिरी दिन था. बंदा नौकरी के आखिरी दिन घोड़े से दफ्तर गया.
जी हां, बाइक, कार, टैक्सी से तो सब ऑफिस जाते हैं. लेकिन भाई तो इंजीनियर हैं न. जब तक कुछ अलग न करे, पता कैसे चलेगा. दूल्हे की तरह घोड़े पर सवार रूपेश ने एक बोर्ड भी लगा रखा था, जिसपर लिखा था सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में आखिरी दिन. उन्होंने बाकायदा ऑफिस वाली फॉर्मल ड्रेस पहन रखी थी. लोग उनकी फोटो लेने लगे और अब ये फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है.
ऑफिस की फॉर्मल ड्रेस पहन घोड़े से पहुंचे रूपेश.
ऑफिस की फॉर्मल ड्रेस पहन घोड़े से पहुंचे रूपेश.

जब उनसे बात की गई तो उन्होंने बताया कि वो बेंगलुरु की ट्रैफिक की समस्या से काफी परेशान हैं. एक ही जगह पर ट्रैफिक में घंटों फंसे रहना पड़ता है. इसलिए उन्होंने गाड़ी छोड़कर घोड़े से जाने का प्लान किया. रूपेश राजस्थान के पिलानी के रहने वाले हैं. पहले वो आर्मी में जाना चाहते थे, लेकिन आईटी इंजीनियर बन गए. उन्होंने बचपन में घोड़ा चलाना सीखा था. बोले- मेरा घर ऑफिस से 10 किलोमीटर दूर है. आखिरी दिन वो सात बजे घर से घोड़े पर सवार होकर चले और दो बजे ऑफिस पहुंचे.
 
सड़क पर लोग तमाशा देखने लगे.
सड़क पर लोग तमाशा देखने लगे.

ट्रैफिक से थे परेशान
रूपेश ने बताया कि ऑफिस में यह उनका आखिरी दिन था. अब वो खुद का स्टार्टअप शुरू करेंगे. पर आखिरी दिन को उन्होंने कुछ खास बनाने को सोची. सो उन्होंने घोड़े से जाने सो सोची. इससे एक तीर से दो निशाने सध गए. एक तो ट्रैफिक वाली समस्या के लिए एक मैसेज चला गया. दूसरा वो चर्चा में भी आ गए. ट्रैफिक पर वो बोले - हमारे पास आईटी के संसाधन हैं. उनका इस्तेमाल कर हमें इस समस्या का सॉल्यूशन निकालना चाहिए. हमने बहुत जटिल समस्याओं को हल किया है तो ट्रैफिक की समस्या का हल क्यों नहीं कर सकते.


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