The Lallantop

नाबालिग लड़की को 'अश्लील वीडियो' भेजता था लड़का, हाई कोर्ट ने क्यों दे दी जमानत?

मामला Madhya Pradesh का है. High Court ने कहा कि आरोप बहुत ही भद्दे हैं और एक अच्छे परिवार से आने वाले BBA छात्र से इसकी उम्मीद नहीं की जा सकती. मगर कुछ शर्तों के साथ उसे रिहा कर दिया गया.

Advertisement
post-main-image
केस अभी चल रहा है. आरोपी छात्र को बरी नहीं किया गया है. (सांकेतिक फोटो- आजतक)

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने नाबालिग लड़की को स्टॉक करने और लगातार परेशान करने के आरोपी जमानत दे दी है. ये कहते हुए कि आरोपी एक ‘अच्छे फैमिली बैकग्राउंड’ से है. साथ ही कोर्ट ने उसे जमानत की शर्त के तौर पर भोपाल के अस्पताल में सामुदायिक सेवा (community service) करने का निर्देश दिया है.

Advertisement

आरोपी छात्र BBA की पढ़ाई कर रहा है. आरोप हैं कि उसने वॉट्सऐप के जरिए नाबालिग लड़की को स्टॉक किया, अश्लील कॉल किए और लगातार परेशान किया. 4 मई को पुलिस ने छात्र को अरेस्ट किया था. इसके बाद छात्र ने अस्थायी जमानत की मांग के साथ याचिका दायर की. तर्क दिया कि लंबे समय तक जेल में रहने से उसकी पढ़ाई पर नकारात्मक असर पड़ेगा.

कोर्ट में क्या हुआ?

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी के माता-पिता ने कोर्ट से कहा कि उनके बेटे ने जो किया, उससे वो शर्मिंदा हैं. साथ में वादा किया कि वो ऐसा दोबारा नहीं करेगा. आरोपी की तरफ से पेश हुए वकील ने कोर्ट में दलील दी कि वो अपना सबक सीख गया है और आगे ऐसी हरकत नहीं दोहराएगा. वकील ने ही अदालत को सुझाव दिया कि वो सामुदायिक सेवा में शामिल हो सकता है, जिससे छात्र का ‘अहंकार’ खत्म हो जाए.

Advertisement

ये भी पढ़ें - पश्चिम बंगाल में सैर के दौरान महिला से यौन उत्पीड़न की कोशिश, पैरामिलिट्री फ़ोर्स के 2 जवानों पर आरोप

कोर्ट ने इस सुझाव से सहमति जताई और आरोपी छात्र को दो महीने की अस्थायी जमानत दे दी. जस्टिस आनंद पाठक ने 16 मई को कहा कि आवेदक एक छात्र है, इसलिए उसे अपनी गलती सुधारने का मौका मिलना चाहिए. ताकि वो आपराधिक गतिविधियों में शामिल न होकर, एक बेहतर नागरिक बनने के बारे में सोचे. कोर्ट ने कहा, 

आरोप बहुत ही भद्दें हैं और एक अच्छे फैमिली बैकग्राउंड से आने वाले BBA छात्र से इसकी उम्मीद नहीं की जा सकती.

Advertisement

अदालत के निर्देशानुसार, छात्र को हर शनिवार और रविवार की सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक भोपाल जिला अस्पताल में सर्विस देनी होगी. मुकदमे के फैसले की परवाह किए बिना. आरोपी को न तो ऑपरेशन थिएटर में जाने की अनुमति दी जाएगी, न ही निजी वार्डों में.

इस मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी.

वीडियो: JNU के इस प्रोफेसर से छात्राएं परेशान, एक को मजबूर होकर परिसर छोड़ना पड़ा

Advertisement