अशोका यूनिवर्सिटी (Ashoka University) के दो फाउंडरों की एक कंपनी पर लगभग 1600 करोड़ रुपये के बैंक फ्रॉड का आरोप है. इस सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने 27 अक्टूबर को 17 जगहों पर तलाशी ली. बता दें कि ED की जांच चंडीगढ़ की फार्मा कंपनी पैराबोलिक ड्रग्स लिमिटेड (Parabolic Drugs Ltd.) से जुड़ी है. अशोका यूनिवर्सिटी के दो फाउंडर विनीत गुप्ता और प्रणव गुप्ता इस फार्मा कंपनी के डायरेक्टर हैं. इस मामले में अशोका यूनिवर्सिटी की सफाई भी आई है.
ED ने अशोका यूनिवर्सिटी के डायरेक्टरों के यहां छापा क्यों मार दिया?
लगभग 1600 करोड़ रुपये के एक बैंक फ्रॉड केस में अशोका यूनिवर्सिटी के दो फाउंडरों का नाम आया है. मामला चंडीगढ़ की एक फार्मा कंपनी पैराबोलिक ड्रग्स लिमिटेड से जुड़ा है. इस सिलसिले में ED ने 27 अक्टूबर को 17 जगहों पर तलाशी ली.


अशोका यूनिवर्सिटी की ओर से कहा गया है कि ED की जांच के दायरे में आई पैराबोलिक ड्रग्स का अशोका यूनिवर्सिटी से कोई संबंध नहीं है. यूनिवर्सिटी ने कहा है कि बिना आधार के इस मामले को यूनिवर्सिटी से जोड़ना भ्रामक है. विनीत गुप्ता और प्रणव गुप्ता अशोका यूनिवर्सिटी के 200 से अधिक फाउंडर्स और डोनर्स में शामिल हैं. इनके व्यक्तिगत व्यवसायों का यूनिवर्सिटी से कोई संबंध नहीं है. अशोका यूनिवर्सिटी ने साफ किया है कि यूनिवर्सिटी पर किसी भी व्यक्ति, परिवार या कॉरपोरेट ग्रुप का नियंत्रण नहीं है. इसे एक स्वतंत्र बोर्ड द्वारा मैनेज किया जाता है.
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पैराबोलिक ड्रग्स लिमिटेड के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ बैंकों के एक कंसोर्टियम के साथ 1626.74 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने का केस है. बैंकों के इस कंसोर्टियम (संघ) का नेतृत्व सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने किया था. सूत्रों के मुताबिक CBI ने 31 दिसंबर, 2022 को ये मामला दर्ज किया था. इसमें प्रणव गुप्ता और विनीत गुप्ता का नाम भी शामिल है, जो अशोका यूनिवर्सिटी के फाउंडर्स में शामिल हैं. प्रणव गुप्ता पैराबोलिक ड्रग्स के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं. विनीत गुप्ता भी कंपनी के डायरेक्टरों में से एक हैं.
इस मामले में पैराबोलिक ड्रग्स के दूसरे डायरेक्टरों दीपाली गुप्ता, रमा गुप्ता, जगजीत सिंह चहल, संजीव कुमार, वंदना सिंगला और इशरत गिल का भी नाम शामिल है. CBI ने कंपनी के गारंटर टीएन गोयल और निर्मल बंसल और जेडी गुप्ता के खिलाफ भी केस दर्ज किया है.
दवाई बनाने वाले इस कंपनी पर कथित तौर पर आपराधिक साजिश और जालसाजी से बैंकों के कंसोर्टियम को धोखा देने का आरोप है. ये भी आरोप है कि लोन लिए पैसों का इस्तेमाल कंपनी ने लोन एप्लिकेशन में बताई चीजों से इतर दूसरे कामों में किया. सूत्रों ने बताया कि इस मामले में 27 अक्टूबर को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत दिल्ली, मुंबई, चंडीगढ़, पंचकुला और अंबाला स्थित 17 जगहों पर छापे मारे गए.





















