'इंडिया की बर्बादी कश्मीरियों के हाथों से होगी- कश्मीरी'
ये पिचके से गुब्बारे पंजाब के गुरदासपुर में पाए गए हैं. इससे पहले पठानकोट, फरीदकोट और कर्तापुर में भी गुब्बारे पाए थे. राजस्थान से भी गुब्बारे मिले थे. उनमें भी उर्दू में एक नंबर के साथ कॉन्टेक्ट करने की बात कही गई थी. अब जब इतने गुब्बारे मिल ही रहे हैं और अगर ये पाकिस्तान की तरफ से आ रहे हैं, तो अंदर बैठा लल्लन जोर से कहिता है,
'अबे पाकिस्तान तुम पहिले सोच लो. तुमको इंडिया से कश्मीर चाहिए या मोदी की हवा. जो ससुरों हर बार पिचके गुब्बारे भेज देतो है. हम तुमई बुआ के नौकर लग रहे हैं तो इन गुब्बारों में हवा भरें. माना मोदी की हवा की खबरें हैं, पर इसका मतलब ये थोड़ी कि हम अपना प्रधानमंत्री तुमए गुब्बारे फुलाने में लगा दें.'बता दें कि पाकिस्तान की तरफ से सिर्फ गुब्बारे ही नहीं आ रहे. सलमान खान और भाग्यश्री ने 'मैंने प्यार किया' में जो कबूतर छोड़ा था, पाकिस्तान उसी की बिरादरी के कबूतरों का यूज कर रहा है. ऐसा सूत्रों को किन्ही सूत्रों से सूत्र वाली खबरों के लिए पता चला है. बहरहाल लेट्स बैक टू सीरियस टॉक्स. कहा जा रहा है कि पाकिस्तान की तरफ से आया एक कबूतर पकड़ा गया है. ये कबूतर ढिंडा पोस्ट के पास मिला है. इस कबूतर के पांव में एक पर्ची है. अगेन उर्दू लिखी है. इसमें लिखा है,
'मोदी, पाकिस्तान का बच्चा-बच्चा लड़ने के लिए तैयार है. कश्मीर पर जुल्म का बदला लिया जाएगा. अब हम 1971 वाला पाकिस्तान नहीं हैं: लश्कर-ए-तैयबा' (क्या पाकिस्तान का बच्चा-बच्चा में बिलावल भुट्टो संलग्न हैं?)
ये तस्वीर उसी कबूतर से बंधी पर्ची की है. कबूतर की तस्वीर नहीं मिल पाई. शायद कबूतर पर्ची डिलीवर करके उड़ गया हो. या हो सकता है कि उसको फोटोफोबिया हो. हर किसी को तस्वीर खिचाने का शौक नहीं होता है मितरों... पुलिस को जो इससे पहले गुब्बारे मिले थे. विश्व अनुवाद दिवस से एक दिन बाद, 1 अक्टूबर को पुलिस ने उन उर्दू पर्चियों का अनुवाद कर उसका कंटेंट कुछ यूं बताया,
'मोदी जी अयूबी की तलवारें अभी हमारे पास हैं. आई लव पाकिस्तान.'बहरहाल, पाकिस्तान को अब बड़े होने की जरूरत है. दोनों मुल्कों की कड़वाहट न जंग से सुलझेगी, न ही गुब्बारों से. बात सुलझेगी सलीके से. जो कि इंडिया हमेशा ही दिखाता आया है. बस जरूरत है इंडिया के सलीके से सीखते हुए पाकिस्तान को सलीकेदार हो जाने की.
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