बगदादी ज़िंदा है या नहीं, इस पर दुनिया में अलग-अलग राय है. रूस और ईरान मानते हैं कि 28 मई 2016 को सीरिया के रक्का में मारा गया था. ISIS की मैगज़ीन अल अमाक के मुताबिक बगदादी अपनी 'हूरों' के पास एक अमरीकी हमले की वजह से पहुंचा. लेकिन खुद अमरीका का रुख ये है कि जब तक बगदादी की मौत के पक्के सुबूत न मिलें, उसे ज़िंदा माना जाए. इसलिए जुलाई 2014 के बाद से न देखे जाने के बावजूद उसके सिर पर 25 मिलियन डॉलर माने अपने यहां के लगभग 163 करोड़ 46 लाख 25 हज़ार रुपए का इनाम जस का तस बना हुआ है. ईराक की सरकार भी यही मानती है कि बगदादी ज़िंदा है.

ISIS लड़ाकों के लिए बगदादी का होना न होना बड़े मायने रखता है (फोटोःरॉयटर्स)
क्या है रिकॉर्डिंग में?
नवंबर 2016 के बाद ये पहली बार है कि ISIS ने कोई रिकॉर्डिंग बगदादी की बताकर जारी की हो. इस रिकॉर्डिंग में 'बगदादी' मोसूल (ईराक), रक्का, हमा (सीरिया) और सिर्ते (लीबिया) में हुई लड़ाइयों की बात कर रहा है. कह रहा है कि यहां बहा खून ज़ाया नहीं जाएगा.
ईराक और सीरिया में अस्थिरता का फायदा उठाकर ISIS ने इन दोनों देशों के एक बड़े इलाके को कब्ज़ा लिया था और जुलाई 2014 में बगदादी ने इसे एक सुन्नी मुस्लिम खिलाफत घोषित कर दिया था. इसकी ज़द में ईराक का दूसरा सबसे बड़ा शहर मोसूल भी आ गया था. यहां इस्लाम के नाम पर कट्टरपंथियों ने बड़े पैमाने पर हिंसा की. ये खौफ वीडियो बनकर सोशल मीडिया के ज़रिए दुनिया भर में फैला.

ISIS के चलते इराक और सीरिया से कई लोगों को अपना घर-बार छोड़कर यूरोप जाना पड़ा है (सांकेतिक फोटोःरॉयटर्स)
लेकिन फिर सीरिया की असद सरकार को रूस की मदद मिलने लगी और ईराक की फौज को अमरीका की. कुर्द भी ISIS के खिलाफ थे. इन सब ने मिलकर 2017 में ISIS को काफी पीछे धकेल दिया है. जिस ISIS के साथ लड़ने के लिए दुनिया भर से कट्टरपंथी मुसलमान जुट रहे थे, उसी ISIS का काडर अब टूटने लगा है. ISIS के कई बड़े लड़ाके मार दिए गए हैं.
रिकॉर्डिंग से किसे नफा, किसे नुकसान
अगर ये रिकॉर्डिंग बगदादी की है तो ये ISIS के काडर में जान फूंकने की कोशिश है. लेकिन इस बात का ज़्यादा फर्क पड़ेगा, इसकी उम्मीद कम ही है. बगदादी और ISIS पूरी तरह घिरे हुए हैं और दिन ब दिन ज़मीन खो रहे हैं लेकिन रक्का में टिके हुए हैं. बगदादी अगर ज़िंदा है तो उसे अपने जान की इतनी चिंता है कि वो 'खलीफा' होने के बावजूद ISIS काडर को नियमित रूप से ऑडर नहीं देता है, इस डर से कि कहीं इससे उसके ठिकाने का पता न चल जाए.

इराक के प्रधानमंत्री हैदर अल अबादी मोसूल में इराक की जीत का ऐलान करते हुए (10 जुलाई, 2017 फोटोःरॉयटर्स)
बिना बगदादी चल जाएगा ISIS? बगदादी एक नेता के तौर पर ISIS काडर के मनोबल के लिए बड़ा खास है. लेकिन एक दूसरी बात वो भी है जो इंटरनेशनल सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ रैडिकलाइज़ेशन (किंग्स कॉलेज, लंदन) के चार्ली विंटर कहते हैं. उनका बयान बीबीसी ने छापा है. वो कहते हैं कि ISIS ने बगदादी के साथ-साथ खलीफत और खलीफा की संस्था के कल्ट पर भी खूब काम किया है. इसीलिए ये भी हो सकता है कि बगदादी के जाने पर कोई दूसरा आए और ISIS पहले की तरह काम करता रहे. कहा जाता है कि बगदादी इराक सीरिया बॉर्डर की पहाड़ियों में कहीं छिपा हो सकता है.
28 सितंबर, 2017 का लल्लनटॉप बुलेटिन यहां देखेंः
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