भीड़ ने 68 साल के शौकत अली को अपना शिकार बनाया है. भीड़ ने शौकत अली पर गोमांस बेचने का शक किया और उसकी पिटाई की. सिर्फ पिटाई नहीं की गई उसे सुअर का मांस खिलाने की भी कोशिश की गई. 7 अप्रैल को हुए इस वाकये का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होता जा रहा है. वीडियो हम शेयर तो नहीं कर सकते. लेकिन अगर आपको देखना ही तो यहां से देख सकते हैं.वीडियो में शौकत नाम का आदमी घुटने के बल सड़क पर बैठा हुआ है. उसके शरीर पर चोट के निशान देखे जा सकते हैं. भीड़ ने उसे चारों ओर से घेर रखा है. पीटने को आतुर है. तरह-तरह के सवाल पूछ रही है. भीड़ में से लोग (लोग कहना यहां कितना ठीक होगा नहीं मालूम) पूछ रहे हैं -
तुम यहां बीफ क्यों बेच रहे हो? क्या तुम्हारे पास ऐसा करने के लिए लाइसेंस है? बांग्लादेशी हो क्या? राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) सर्टिफिकेट है तेरे पास? (असम में NRC रजिस्टर तैयार किया गया है और इसमें शामिल लोगों को ही असम का नागरिक माना जाएगा.)जिले के एसपी राकेश रोशन ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए बताया है कि-
यह वीडियो जेन्युइन लग रहा है. शौकत के रिश्तेदार ने एफआईआर लिखवाई है. और हमने नियमों के मुताबिक इन्वेस्टिगेशन शुरू कर दी है. हमने स्थानीय लोगों से शांति की अपील की है. वहां कोई टेंशन नहीं है. घटना की जांच जारी है.शिकायत में लिखा गया है कि-
शौकत पर हमला किया गया और उसे जबरन मांस खिलाने की कोशिश की गई जिससे उसकी धार्मिक भावनाओं को चोट पहुंची है.
परिवार वालों का क्या कहना है?
शौकत के परिवार वालों ने बताया है कि-वह सप्ताह में दो दिन गुरुवार और रविवार को चावल और मांस बेचा करता था. अन्य दिनों में वह इत्र, धार्मिक ग्रन्थ आदि बेचा करता था.इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए शौकत के छोटे भाई अब्दुल रहमान जो कि लोकल सरकारी स्कूल में टीचर हैं, ने बताया-
50 साल और उससे भी अधिक वक्त से हमारा परिवार चावल और मांस की दुकान चलाता है. इस एरिया में ऐसे चार छोटे दुकान हैं जहां मुस्लिम और छोटे वेंडर पहुंचते हैं. जिस दिन शौकत को पीटा गया है उस दिन शायद भैंस का मांस था. उस दिन शाम में मेरा भाई दुकान बंद ही करने वाला था कि उससे पहले भीड़ ने हमला कर दिया. मेरा भाई अभी हॉस्पिटल में है. हमने ऐसी साप्रदायिकता कभी नहीं देखी.अब्दुल ने आरोप लगाते हुए कहा कि उस दिन भाई को धमकाया गया कि अगर तुम मांस (जो कि हमारे धार्मिक भावनाओं को आहत करती है) नहीं खाते हो तो तुम्हें मार दिया जाएगा. दी हिंदू की एक रिपोर्ट मुताबिक -
पुलिस ने इस मामले को लेकर अब तक 5 लोगों को हिरासत में लिया है. इन में से दो बाजार कमिटी के नेता हैं जिन्होंने शौकत को भीड़ से बचाया है. पुलिस इन दोनों को अच्छे बर्ताव के कारण सेक्शन 107 के नियमों के तहत छोड़ दिया है. भीड़ ने कमिटी के दोनों लोगों के साथ भी बुरा बर्ताव किया है.
बीफ को लेकर असम में क्या नियम है?
असम में बीफ पर कोई बैन नहीं है. असम में पशु हत्या, असम पशु संरक्षण एक्ट 1950 के नियमों के तहत आता है. नियम के मुताबिक, 15 साल से अधिक उम्र के पशुओं को 'फिट फॉर स्लॉटर' सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही उसे मारा जा सकता है. यह सर्टिफिकेट राज्य का पशु वेटनरी डॉक्टर ही दे सकते हैं. नियमों के तहत अन्य कई भारतीय राज्यों की तरह, असम में भैंस, गाय और बैल के बीच कोई अंतर नहीं रखा गया है. बीफ को लेकर भारत में खूब पॉलिटिक्स हुई है. हुई क्या है, हो ही रही है और यह खत्म होती भी नहीं दिख रही है.वीडियो- पड़ताल: क्या राहुल गांधी के रोड शो में लहराए गए पाकिस्तानी झंडे?











