आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) की टीम 22 मार्च की सुबह मध्यप्रदेश के धार में स्थित भोजशाला/कमल मौला मस्जिद परिसर के सर्वे के लिए पहुंच गई है. दिल्ली और भोपाल से ASI के 15 सदस्य धार पहुंचे हैं. परिसर के आसपास कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है. गेट पर मेटल डिटेक्टर लगाकर छानबीन की जा रही है. बता दें कि आज, 22 मार्च को रमज़ान के जुम्मे की नमाज़ भी होनी है. इस लिहाज से भी सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान दिया जा रहा है.
भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद परिसर के सर्वे के लिए पहुंची ASI की टीम, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने धार के इस मंदिर-मस्जिद परिसर के वैज्ञानिक सर्वे के लिए मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. कोर्ट ने सर्वे की मंजूरी देते हुए ASI से 29 अप्रैल से पहले रिपोर्ट सौंपने को कहा था.

भोजशाला का विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है. मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है. इस याचिका में हाई कोर्ट के सर्वे के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई है. आज तक की एक रपट के मुताबिक़, मुस्लिम पक्ष शुक्रवार, 22 मार्च को ही याचिका पर सुनवाई करने की गुहार लगाएगा.
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने 11 मार्च, 2024 को इस स्थल के सर्वे का निर्देश दिया था. ASI ने सर्वे के लिए धार प्रशासन और पुलिस से पर्याप्त सुरक्षा बल उपलब्ध कराने की अपील की है. वहीं धार के SP मनोज कुमार सिंह ने बताया कि ASI की ओर से दी गई सूचना के आधार पर भोजशाला परिसर का निरीक्षण किया गया है. सर्वे के काम में कोई रुकावट न आए, इसके लिए पूरी सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी. उन्होंने धार जिले की जनता से सहयोग की अपील की है.
धार स्थित भोजशाला मंदिर है या मस्जिद?भोजशाला, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित 11वीं सदी का स्मारक है. इसे लेकर हिंदुओं और मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं हैं. हिंदू इसे वाग्देवी (देवी सरस्वती) को समर्पित मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम इसे कमल मौला मस्जिद मानते हैं.
धार जिले की वेबसाइट के अनुसार, परमार वंश के राजा भोजदेव ने धार में संस्कृत के अध्ययन के लिए एक विश्वविद्यालय की स्थापना की थी. इसे भोजशाला कहा जाता है, जहां हिंदुओं की देवी सरस्वती की प्रतिमा स्थापित थी.
इस परिसर की संरचनाएं इतिहास के अलग-अलग काल की हैं. मुख्य रूप से 12वीं शताब्दी की संरचानओं के अलावा परिसर में इस्लामी कब्रें हैं, जो 14वीं और 15वीं शताब्दी के बीच बनी बताई जाती हैं. इस परिसर में चिश्ती सूफी संत कमाल-अल-दीन की कब्र है. इस वजह से परिसर को कमल मौला मस्जिद भी कहा जाता है.
मौजूदा दौर में भोजशाला या कमल मौला मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित राष्ट्रीय महत्व का एक स्मारक है. एक समझौते के तहत यहां मंगलवार और बसंत पंचमी के दिन हिंदुओं को पूजा करने की अनुमति दी गई है. वहीं मुस्लिमों को शुक्रवार के दिन नमाज अदा करने की मंजूरी है. बाकी दिनों में ये परिसर विजिटर्स के लिए खुलता है.
कोर्ट ने ASI को सर्वे का आदेश दिया थाहिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने इस मंदिर-मस्जिद परिसर के वैज्ञानिक सर्वे के लिए मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. मांग की गई थी कि भोजशाला परिसर हिंदुओं को वापस सौंपा जाए, यहां मुस्लिम समुदाय के लोगों को नमाज अदा करने से रोका जाए.
इस पर सुनवाई करते हुए मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने ASI को वैज्ञानिक सर्वे करने का आदेश दिया. बेंच ने आदेश में कहा था कि परिसर में कार्बन डेटिंग मेथड से एक विस्तृत वैज्ञानिक जांच की जानी चाहिए, जिससे जमीन के ऊपर और नीचे स्थित संरचनाएं कितनी पुरानी है, इसका पता लगाया जा सके. कोर्ट ने ये भी कहा था कि सर्वे की कार्यवाही दोनों पक्षों के दो प्रतिनिधियों की मौजूदगी में कराई जाए. सर्वे की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराए जाने का भी निर्देश दिया गया था.
कोर्ट ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 अप्रैल, 2024 की तारीख दी थी. वहीं ASI को 29 अप्रैल से पहले सर्वे की रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया. अब ASI शुक्रवार, 22 मार्च से धार के मंदिर-मस्जिद परिसर का सर्वे शुरू करने जा रहा है.














