उन्होंने सदन में बीजेपी को संबोधित करते हुए कहा था, 'वो कांग्रेस सरकार पर तो भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं लेकिन एमसीडी भी पाक साफ नहीं रही है. बात ऐसी कर रहे हो जैसे सारी दिल्ली को भारतीय जनता पार्टी चला रही है. जो काम अच्छे हों वो आपने कर दिए और जो बुरे हैं वो हमने कर दिए. 1993 से 1998 तक क्या स्थिति थी? घर जाने से डर लगता था न जाने कौन लोग पानी की समस्या को लेकर घर के सामने बैठे हों. हमने केजरीवाल को इसलिए सपोर्ट दिया ताकि लोकतंत्र जिंदा रहे.'[facebook_embedded_post href="https://www.facebook.com/thelallantop/videos/1675779806062189/"] उनके बीजेपी में शामिल होने पर दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित ने उन्हें कांग्रेस के साथ गद्दारी करने वाला कह दिया. शीला दीक्षित की सरकार में लवली शिक्षा मंत्री हुआ करते थे. 1990 में उन्हें दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के महासचिव के रूप में चुना गया था. 1998 में वे पहली बार दिल्ली विधानसभा में चुने गए, जहां वह सबसे कम उम्र के विधायक थे. इसके बाद 2000 में उन्हें दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमिटी का महासचिव और पूर्वी जिला कांग्रेस कमिटी का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. 1998 में पहली बार चुने जाने के बाद से ही वे कभी चुनाव नहीं हारे थे. दिल्ली विधानसभा चुनाव 2013 में वे लगातार चौथी बार गांधीनगर विधानसभा क्षेत्र से जीते थे. 2015 की केजरीवाल आंधी में वो लड़े ही नहीं थे. एक और अरविन्दर सिंह लवली हैं जो 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए थे. वे पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री एवं कभी कांग्रेस के बड़े नेता रहे बूटा सिंह के बेटे हैं. लवली ने 2008 में दिल्ली की देवली विधानसभा सीट से जीत हासिल की थी. कांग्रेस ने उन्हें टिकट नहीं दिया था जिससे नाराज हो कर वे बीजेपी में शामिल हुए थे. 2013 के विधानसभा चुनाव में वो आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार से हार गए थे.
ये स्टोरी लल्लनटॉप के साथ इंटर्नशिप कर रही रुचिका ने की है.












