संडे को अनुराग कश्यप ने चार ट्वीट दागे थे. प्रधानमंत्री से सवाल पूछा था कि जब अपने पाकिस्तान दौरे के लिए उन्हें सॉरी नहीं बोलना पड़ा, तो फिर अब करण जौहर की फिल्म 'ऐ दिल है मुश्किल' के लिए क्यों मुसीबत खड़ी की जा रही है. देश का माहौल इतना पवित्र है इन दिनों कि प्रधानमंत्री के बारे में एक शब्द नहीं बर्दाश्त है किसी को. मीडिया को बस इन्हीं ट्वीट्स की जरूरत थी. मिलते ही तान दिया कि अनुराग कश्यप ने मोदी से माफी मांगने के लिए कहा.
अनुराग कश्यप ने एक और बम मारा है और सब धुआं साफ हो गया है
देशभक्ति के नारे लगाकर आप अपनी गलतियां नहीं छिपा सकते.

पढ़ें: ये अनुराग कश्यप को डर नहीं लगता क्या! नरेंद्र मोदी को ताना मार दिया है!
रही-सही कसर बीजेपी के नेता-मंत्रियों और अभिजीत भट्टाचार्य ने पूरी कर दी. साफ-साफ कहा गया कि अनुराग कश्यप की इतनी हिम्मत कैसे हो गई कि वो सीधे नरेंद्र मोदी से जवाब मांग रहे हैं. टीवी चैनलों पर दो दिनों तक चली जूतम-पैजार देखने के बाद जब अनुराग से नहीं रहा गया, तो अब उन्होंने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए सफाई दी है. उन्होंने साफ कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री पर सवाल नहीं किया, बल्कि हालात पर सवाल उठाया.
पढ़िए अनुराग कश्यप ने अपनी फेसबुक पोस्ट में क्या लिखा:
''ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि मुझे अपने ट्वीट्स के इरादों पर सफाई देनी पड़ रही है, क्योंकि इंडस्ट्री के मेरे कलीग्स और दूसरों को मेरी राय की वजह से भुगतना पड़ रहा है. ये लीजिए:
मैं फिल्म इंडस्ट्री को आसान निशाना बनाए जाने से थक चुका हूं. हम कुछ करें तो भी नरक में जाएं और कुछ न करें तो भी नरक में जाएं. जब हम खुद को किसी चीज से दूर रखते हैं तो पूछा जाता है कि 'अब बॉलीवुड चुप क्यों है?' जब हम खुद को शामिल करते हैं, तो आप लोगों को असल खबर से दूर करने के लिए हमें बलि का बकरा बनाया जाता है. खबर को मसालेदार बनाने के लिए वो हर तरीके से हमारा इस्तेमाल करते हैं. फिर भी, मैं मीडिया को बाइट देने के बजाय अपनी राय अपने खुद के प्लेटफॉर्म पर रखूंगा.
नहीं, अनुराग कश्यप ने 'प्रधानमंत्री से माफी मांगने के लिए नहीं कहा' (कई हेडलाइंस आपको ये यकीन दिलाना चाहती हैं, लेकिन वो बद्दिमागी कर रहे हैं). मैंने तो सिर्फ हालात पर हुए फैसले के सही या गलत होने पर सवाल उठाया था.
जिस समय प्रधानमंत्री बातचीत के लिए पाकिस्तान गए थे, उसी समय एक फिल्म निर्माता एक पाकिस्तानी कलाकार के साथ काम कर रहा था. दोनों में से किसी को नहीं पता था कि भविष्य में क्या होगा. फिर भी सिर्फ एक ने ही कीमत चुकाई. मुझे अच्छी तरह पता है कि सरकार न तो 'बैन-बैन' नहीं चिल्ला रही है और न पाकिस्तानी कलाकारों को वापस भेजने के लिए कह रही है. ठीक वैसे ही मुझे अच्छी तरह पता है कि प्रधानमंत्री खुद मेरी फिल्में सेंसर नहीं करते हैं.
लेकिन हमने उन्हें चुना है और इसलिए ये उनकी जिम्मेदारी है कि वो हमें मीडिया या पॉलिटिकल पार्टियों जैसे बुलीज से बचाएं. और जब सरकार बनाने वाली पार्टी के चुने हुए सदस्य मुसीबत के समय इसलिए जवाब नहीं देते, क्योंकि वो खुद ही प्रधानमंत्री का मूड भांप लेते हैं तो फिर मैं खुद ही सीधे प्रधानमंत्री से बात करूंगा. 'भारत माता की जय' वाले ट्वीट में उन बेवकूफ ट्रॉलर्स पर व्यंग्य भी था, जो लगातार आपकी देशभक्ति का सबूत मांगते रहते हैं. उनके लिए बस इतना सा कहने की ही जरूरत होती है. ये उनके लिए ताना था. देशभक्ति के नारे आपको इन सारी चीजों से बरी नहीं कर देते. मुझे उम्मीद है कि अब सब समझ आ गया होगा.''
यहां क्लिक करके पढ़ सकते हैं अनुराग कश्यप की ओरिजनल फेसबुक पोस्ट

उम्मीद है कि इतना पढ़ने के बाद लोगों को समझ आ गया होगा कि अनुराग क्या कहना चाहते थे, उन्होंने क्या कहा था और उनकी बात को किस तरह लिया गया. हम सबने मिलकर देश के प्रधानमंत्री को चुना है और अब अगर हममें से कोई परेशानी में है, तो वो अपने प्रधानमंत्री से सवाल करेगा या नवाज शरीफ और बराक ओबामा से.
अनुराग की ये फेसबुक पोस्ट मीडिया की वो नंगई भी उजागर कर रही है, जो अपने एजेंडे और कंटेंट की कमी के चलते मीडिया ने अपने आसपास फैला रखी है. वही मीडिया जो अनुराग के ट्वीट्स को गलत तरीके से दिखाने के बाद एक बाइट के लिए उनके घर के चक्कर काटती रही और मेसेज करती रही. सवाल पूछने वाले को बेहूदा कहने और बातचीत के दरवाजे बंद करने के बजाय बेहतर है कि जवाब दिए जाएं. अगर लोग जबान से गुस्सा निकालने के बजाय कोई और तरीका अपनाने लगे, तो सरकार के पास अपनी ड्यूटी निभाने का मौका भी नहीं बचेगा.
ये भी पढ़ें: अनुराग कश्यप: जिसकी खाल में कीड़े रेंगते हैं अनुराग कश्यप, तुम सल्फ़ेट हो! अनुराग कश्यप ले आए अपनी पहली गुजराती फिल्म 'रॉन्ग साइड राजू' गैंग्स ऑफ वासेपुर की मेकिंग से जुड़ी ये 24 बातें जानते हैं आप!














