इसके बाद देश के आईटी मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद माइक्स के सामने खड़े मिले. वो कह रहे थे कि 'आज के दिन कांग्रेस और उसके झूठ बेनकाब हो गए हैं.' यानी प्रतिक्रिया छोड़ी जा चुकी थी. भाजपा के लिए ये दिन की पहली मॉरल विक्ट्री थी. सनद रहे कि ये वही सरकार है जिसने इनफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी के एक पार्लियामेंट्री पैनल के सामने ट्विटर इंडिया के मुखिया को पेश होने का आदेश दिया था. वजह? क्यूंकि ट्विटर इंडिया ने कुछ ऐसे हैंडल्स को बैन कर दिया था जो कि राइट-विंग से जुड़े हुए थे और लगातार ग़लत ख़बरें परोस रहे थे या लोगों को लगातार बरगलाने की कोशिश कर रहे थे. इस पेशी के दौरान आईटी मिनिस्ट्री के पैनल के साथ-साथ मिनिस्ट्री ऑफ़ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इनफ़ॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को भी मौजूद रहना था जिसके मुखिया स्वयं रविशंकर प्रसाद हैं.
अब बात पते की. न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने 1 अप्रैल की दोपहर 2 बजकर 33 मिनट पर एक ट्वीट किया. उसमें न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स का हवाला देते हुए बताया कि फ़ेसबुक ने कहा है कि उसने कांग्रेस पार्टी से जुड़े 687 पेज डिलीट किये हैं. स्क्रीनशॉट संलग्न है.

इसके बाद ANI ने एक और ट्वीट किया. इसमें लिखा गया कि फेसबुकानुसार पाकिस्तान मिलिट्री से जुड़े लोगों के 103 अकाउंट्स बंद किये गए हैं. यानी कांग्रेस के पेज और पाकिस्तान मिलिट्री के लोगों के अकाउंट्स. स्क्रीनशॉट देखिये.

2 बजकर 54 मिनट पर एक ट्वीट और आया. इसमें ANI ने स्पष्ट किया कि फ़ेसबुक ने 687 फेसबुक पेज और हैंडल क्यूं डिलीट किये हैं. वजह हम ऊपर बता चुके हैं. ANI ने अक्षरशः फ़ेसबुक का स्टेटमेंट चेंप दिया. इसमें साफ़ तौर पर कांग्रेस आईटी सेल में शामिल लोगों के सर पर दोष डाला जा रहा था.

इसके बाद ANI ने 2 बजकर 57 मिनट और 2 बजकर 58 मिनट पर 2 ट्वीट और किये जिसमें पाकिस्तानी मिलिट्री के पेज, जनरल पाकिस्तान इंटरेस्ट वाले पेज और कश्मीर कम्युनिटी के पेजेज़ की बात की गई और बताया गया कि फ़ेसबुक ने ऐसे 103 पेजों को बंद किया है.

यानी लगभग आधे घंटे के भीतर ही ट्वीट्स की एक झड़ी ने ये पक्का करवा दिया कि फ़ेसबुक ने कुछ पेज और प्रोफ़ाइल्स डिलीट की हैं. इसमें कांग्रेस और पाकिस्तानी मिलिट्री के पेज और प्रोफ़ाइल्स हैं. कांग्रेस और पाकिस्तान का नाम एक साथ एक ही घटना में आना भाजपा और उसके समर्थकों के लिए अमृत समान होता है. यहां भी वैसा ही हुआ. इसका एक उदाहरण नीचे देखिये. ये Nation With Namo नाम के एक फ़ेसबुक पर अपलोड की गई तस्वीर है. इस पेज को 11 लाख 56 हज़ार से ज़्यादा लोग देखते हैं. साफ़ मालूम चल रहा है कि पाकिस्तान और कांग्रेस के बीच रिश्ते को मुकम्मल करवा दिया गया है.

अब वो बातें जो रह गईं
फ़ेसबुक ने अपने न्यूज़रूम (फ़ेसबुक न्यूज़रूम, जहां फ़ेसबुक अपनी 'मन की बात' करता है) के द्वारा दुनिया को इन 687 कांग्रेसी और 103 पाकिस्तानी पेज और हैंडल्स और इन्स्टाग्राम अकाउंट डिलीट करने की बात बताई. मगर ये महज़ 2 पॉइंट्स थे. असल में फ़ेसबुक ने 4 पॉइंट्स दिए थे. एक पॉइंट ये था कि इंडिया के 321 ऐसे पेज और डिलीट किये गए जो कि फ़ेसबुक के नियमों को तोड़ रहे थे. ये रैंडम पेज थे और इसके पीछे कोई भी सुनियोजित तरीका नहीं था. इसलिए ये एक नॉर्मल क्रैक-डाउन माना जाएगा. इसके बाद चौथा और एक बेहद ज़रूरी पॉइंट. फ़ेसबुक ने ये भी बताया कि उसने 15 ऐसे पेज और ग्रुप डिलीट किये हैं जो कि सुनियोजित तरीके से देश में 'बकवास बातें' फैला रहे थे. ये 15 पेज एक सिल्वर टच नाम की हिन्दुस्तानी आईटी फ़र्म से जुड़े हुए थे.फ़ेसबुक ने इन चार पॉइंट्स के बाद अपने एक्शन के बारे में डीटेल में बात की. चूंकि रविशंकर प्रसाद समेत भाजपा के सभी लोग और उनके समर्थक कांग्रेस के पेज डिलीट होने के बारे में भरपूर बातें कर रहे हैं इसलिए ऐसा ज़रूरी नहीं लगता कि उसके बारे में बातें रिपीट कर के वक़्त ज़ाया करना ठीक होगा. फ़ेसबुक ने जो कहा, यहां देख लिया जाए.

सोर्स: फ़ेसबुक न्यूज़रूम
अब बात सिल्वर टच के फ़ेसबुक पेज की जो डिलीट कर दिए गए.
फेसबुक ने कहा कि एक समूह ऐसा भी है जो कि फ़ेक और ऑथेंटिक प्रोफाइल्स की मदद से पूरी योजना के तहत लोगों को बरगलाने में लगा हुआ है. ऐसा कई पेज और ग्रुप्स में हो रहा है. फ़ेसबुक ने ऐसे 15 पेज और ग्रुप्स बंद कर दिए हैं. हालांकि इसके पीछे काम कर रहे लोगों ने खुद को छिपाने की पूरी कोशिश की लेकिन फ़ेसबुक ने ये ढूंढ निकाला कि इस पेज के पीछे सिल्वर टच नाम की आईटी फ़र्म काम कर रही है. इसमें 1 पेज, 12 फ़ेसबुक अकाउंट्स, 1 ग्रुप और 1 इन्स्टाग्राम अकाउंट शामिल है. जो पेज बंद हुआ है उसे लगभग 26 लाख लोग फॉलो करते थे. जो ग्रुप डिलीट हुआ है उसमें लगभग 15 हज़ार अकाउंट्स शामिल थे. और जो इन्स्टाग्राम अकाउंट बंद किया गया है, उसे लगभग 30 हज़ार लोग फॉलो करते थे. इन ग्रुप्स और पेज और इन्स्टाग्राम अकाउंट को प्रमोट करने के पीछे जून 2014 से अब तक फ़ेसबुक को 70 हज़ार डॉलर (यानी लगभग 50 लाख भारतीय रुपये) दिए गए थे. ज़ाहिर सी बात है कि ये पैसे सिल्वर टच ने ही दिए होंगे.
इसके बाद फ़ेसबुक ने एक सैम्पल दिखाया. ये एक पेज का स्क्रीनशॉट था. वही एकमात्र पेज जो कि फ़ेसबुक द्वारा बंद किया गया है और जो कि आईटी फ़र्म सिल्वर टच से जुड़ा हुआ है/था. इसका नाम है The India Eye (द इंडिया आय.)

क्या है The India Eye?
जनवरी 2019 में समर्थ बंसल ने देश में फैल रही फ़ेक न्यूज़ की बीमारी पर एक बहुत डीटेल में रिपोर्ट तैयार की थी. इसमें The India Eye के बारे में काफ़ी चौंकाने वाली बातें सामने आई थीं. The India Eye प्रधानमंत्री मोदी की ऑफिशियल ऐप में न्यूज़ देने का काम करता था. इस ऐप को इस्तेमाल करने वाले लोगों को अपनी फ़ीड में The India Eye पोर्टल से आई खबरें दिखाई देती थीं. ये ख़बरें अक्सर फ़र्ज़ी और बरगलाने वाली होती थीं. इसके साथ ही इसकी भाषा भी काफ़ी हिंसक होती थी. किसी को भी देशद्रोही ठहरा देना और पाकिस्तान के साथ काम करने वाला बता देना इसकी हॉबी मालूम देती थी. The India Eye के कितने ही आर्टिकल्स का दी लल्लनटॉप और बाकी तमाम वेबसाइट्स ने फैक्ट चेक तक किया था.अब टेक्निकल बात. द वायर ने फ़रवरी 2019 में एक रिपोर्ट पब्लिश की थी जिसमें The India Eye और सिल्वर टच का कनेक्शन बताया गया था. असल में theindiaeye.in एक हिमांशु जैन के नाम पर रजिस्टर्ड वेबसाइट है. ये हिमांशु जैन सिल्वर टच के डायरेक्टर हैं. ट्विटर हैंडल @HemanNamo से The India Eye को शुरुआती दिनों में प्रमोट किया गया था. ये ट्विटर हैंडल उन्हीं हिमांशु जैन का है जो कि सिल्वर टच नाम की आईटी फ़र्म के डायरेक्टर हैं. इन्हीं के अर्थात सिल्वर टच के ही सर्वर पर ही होस्ट हो रही थी. सबूत के तौर पर तस्वीर नीचे है जो कि द वायर से साभार ली गई है -

क्या है द सिल्वर टच का मामला और भाजपा कनेक्शन?
द सिल्वर टच के डायरेक्टर हैं हिमांशु जैन. हिमांशु जैन के नाम The India Eye रजिस्टर्ड है. प्रधानमंत्री की ऐप नमो पर The India Eye के आर्टिकल्स आते थे. कैसे? इसका जवाब है प्रधानमन्त्री की ऐप. नमो ऐप को द सिल्वर टच ने ही बनाया था. और इस तरह से The India Eye को ऐप पर पुश किया जा रहा था.द सिल्वर टच अहमदाबाद में 1992 में बनी एक आईटी फ़र्म है. ये कई काम करती है जिसमें से ई-गवर्नेंस में मदद करना इसका एक काम है. बीजेपी पार्टी के लिए इस फ़र्म ने कितने ही प्रोजेक्ट्स किये हैं. इनका लेखा-जोखा द सिल्वर टच की वेबीसाइट पर मिल जाता है.

एक ब्लॉग में द सिल्वर टच ने ये लिखकर बताया कि नरेंद्र मोदी की ऐप नमो उन्होंने ही डेवेलप की है. ब्लॉग पर जाने के लिए आप यहां क्लिक करें.

ब्लॉग पर ऐप डेवेलप करने के बाबत लिखी बात.
और इतना सब कुछ होने के बाद भी इस बात से इनकार किया जा रहा है कि भाजपा से जुड़ा कोई भी पेज, हैंडल या प्रोफ़ाइल बंद नहीं हुई है. जो ऐप बनाता है, वही वो वेबसाईट भी खरीदे बैठा है जो भाजपा के पक्ष में झूठ पर झूठ फैलाती जा रही है. उसी वेबसाइट का कॉन्टेंट मोदी जी की ऐप पर आता है और सब कुछ प्रो-मोदी ही होता है. और एक रोज़ इन्हीं झूठों के चलते उस पोर्टल के पेज को डिलीट कर दिया जाता है और कोई भी बात ही नहीं करता. क्यूंकि कांग्रेस और पाकिस्तान को एक ही वाक्य में इस्तेमाल कर के और भी ज़्यादा मसाला बनाया जा सकता है.
ANI ने सच्चाई का क्या किया?
शाम 6 बजकर 37 मिनट पर, यानी कांग्रेस के पेज डिलीट किये जाने के 4 घंटे बाद, यानी मोदी की आंध्र प्रदेश में रैली बीत जाने और रविशंकर प्रसाद के कांग्रेस को खरी-खोटी सुना देने के कुछ घंटों बाद ANI ने रॉयटर्स का हवाला देते हुए बताया कि 15 ऐसे पेज और अकाउंट्स डिलीट हुए हैं जो कि द सिल्वर टच से जुड़े हैं और ये सिल्वर टच प्रधानमंत्री मोदी की नमो ऐप से जुड़ा है.
एक बात और
फ़ेसबुक ने जो जानकारी उपलब्ध करवाई है, उसके हिसाब से कांग्रेस के 687 पेज और ग्रुप्स में और द सिल्वर टच के 15 पेज, प्रोफाइल्स और ग्रुप में फॉलोवर्स और पैसों का क्या गणित है, ये देख लेते हैं.कांग्रेस से जुड़े पेज, जो कि बंद किये गए हैं, उनमें कुल फॉलोवर्स - लगभग 2 लाख 6 हज़ार 'कांग्रेस द्वारा' इनपर प्रमोशन में लगी रक़म - लगभग 27 लाख रुपये
द सिल्वर टच से जुड़े पेज वगैरह, जो कि बंद किये गए हैं, उनमें कुल फॉलोवर्स - लगभग 26 लाख 50 हज़ार 'द सिल्वर टच द्वारा' इनपर प्रमोशन में लगी रक़म - लगभग साढ़े 48 लाख रुपये
इतिश्री.












