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क्या है ये नेशनल तौहीद जमात जिसपर श्रीलंका में 290 लोगों की हत्या का शक है?

वीडियो देखिए: कैसे धमाके के बाद लोग इधर-उधर भागना शुरू कर दिए थे.

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श्रीलंक में हुए सिलसिलेवार धमाके में मरने वालों की संख्या 290 तक पहुंच गई.
21 अप्रैल 2019 की तारीख श्रीलंका के इतिहास के पन्नों में काले अक्षरों में दर्ज हो गई. ये वो तारीख है जब एक देश त्योहार मना रहा था, हर तरफ ईस्टर की धूम थी. सभी अपनों को बधाईयां दे रहे थे और चर्च में परमेश्वर से प्रार्थना कर रहे थे. लेकिन तभी एक के बाद एक 6 धमाके होते हैं. और हर तरफ चीख पुकार मच जाती है. दिन के पौने नौ बजे हुए धमाके से पूरा देश दहल जाता है. कोलंबो से होती है धमाके की शुरुआत पहला धमाका पौने 9 बजे के करीब कोलंबो को कोच्चिकड़े के सेंट चर्च में हुआ. इसके बाद दूसरा धमाका नेगोंबो के कटुवपिटिया इलाके में हुआ. यहां का सेंट सेबेस्टियन और बट्टीकलोआ चर्च धमाकों से दहल गया. चर्चों के अलावा कोलंबो के फाइव स्टार होटलों में भी सिलसिलेवार तरीके से धमाके हुए. शुरुआती 6 धमाके लगभग एक ही समय पर हुए उसके बाद बाकी के दो धमाके दोपहर 2 से ढाई बजे के बीच कोलंबो में हुए. इन 8 धमाकों में 290 लोगों की मौत हो गई. धमाकों की संख्या भी बढ़ सकती थी और मरने वालों की संख्या भी, लेकिन अच्छी बात ये हुई कि कोलंबो एयरपोर्ट पर फिट किए गए बम को डिटेक्ट कर लिया गया. जिसके बाद उसे डिफ्यूज़ कर दिया गया. इन धमाकों के अलगे दिन भी सुरक्षाकर्मियों को कोलंबो बस स्टैंड पर 87 डेटोनेटर मिले. पुलिस लगातार हर जगह तलाशी के साथ छापेमारी कर रही है. मीडियो रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस ने अब तक 24 संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया है. सरकार ने कहा कि इन धमाकों के पीछे कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन नेशनल तौहीद जमात (NTJ) का हाथ है. ये संगठन आगे भी कुछ ना कर दें जिसके खतरे को देखते हुए श्रीलंका में इमरजेंसी लागू की जाएगी. जो 22 अप्रैल की रात से लागू हो जाएगी. सोशल साइट्स भी बंद किए गए हमले के बाद श्रीलंका में सोशल नेटवर्किंग साइट्स को बंद कर दिया है. इस तरह के हमले के बाद झूठी खबरें ज्यादा फैलने लग जाती है. जिसे रोकने के लिए ये कदम उठाया गया. श्रीलंका सरकार में मंत्री रंजीता सेनारत्ने के मुताबिक धमाका करने वाले सभी श्रीलंका के ही नागरिक थे. 11 अप्रैल से पहले ही इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस ने हमलों को लेकर चेतावनी जारी की थी. लेकिन बावजूद इसके सीरियल बम धमाके हो गए. एयरफोर्स के प्रवक्ता ग्रुप कैप्टन गिहान सेनेविरत्ने के मुताबिक धमाकों में जिन आईईडी का इस्तेमाल किया गया था वो लोकल लेवल पर ही बना था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की निंदा इस हमले की दुनिया भर के नेताओं ने निंदा की, सबने दुख जताया. पीएम मोदी ने भी श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना और पीएम रानिल विक्रमसिंघे से फोन करके बात की. साथ ही ट्वीट करके उन्होंने कहा:
हमारे क्षेत्र में बर्बरता के लिए कोई जगह नहीं है. भारत श्रीलंका के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है. हमारी मृतकों और घायलों के परिवारों के साथ संवेदना है.
21 अप्रैल को जब धमाका हुआ तो खबरें आनी शुरु हुई 50 लोग मरे, फिर ये आंकड़ा 100 पहुंचा, फिर डेढ़ सौ, फिर उसके बाद 200 और अब आंकड़ा 290 तक पहुंच गया. इन मरने वालों में 33 विदेशी नागरिक हैं जिनमें से 6 भारतीय हैं. धमाके में घायलों की संख्या भी 500 के ऊपर चली गई. इन धमाके में मारे गए 6 भारतीय लोगों में 4 जेडीएस के नेता थे. कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने ट्वीट करके बताया कि श्रीलंका के दौरे पर गए 7 जेडीएस कार्यकर्ताओं में 4 की मौत हो गई है, 3 अभी भी लापता हैं. उन्होंने लिखा:
मैं कोलंबो हमले में जान गंवाने वाले हमारे लोगों के लिए दुखी हूं. दौरे पर गए 7 लोगों में 4 लोगों की मौत हो गई. मरने वालों में लक्ष्मण गौड़ा रमेश, केएम लक्ष्मीनारायण, एम रंगप्पा और केजी हनुमनथरायप्पा शामिल हैं.
मारे गए लोगों को अलग-अलग देश अलग-अलग तरीके से श्रद्धांजलि दे रहे हैं. ओडिशा के रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक ने सैंड आर्ट के ज़रिए मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी. क्या है नेशनल तौहीद जमात? हालांकि किसी संस्था ने अभी तक धमाके की ज़िम्मेदारी नहीं ली है, लेकिन श्रीलंका सरकार के मुताबिक इस घटना को नेशनल तौहीद जमात नाम के संगठन ने अंजाम दिया है. नेशनल तौहीद जमात श्रीलंका का कट्टरपंथी मुस्लिम संगठन है. जिसकी मौजूदगी श्रीलंका के पूर्वी प्रांत में ज्यादा है. ये संगठन कट्टरपंथी संदेश और वहाबी विचारधारा के प्रचार-प्रसार के लिए भी जाना जाता है. इसके अलावा यह महिलाओं को बुर्का पहनने और मस्जिदों के निर्माण के साथ शरिया कानून का भी हिमायती है. इस संगठन का नाम पहली बार 2013 में सामने आया था. उस वक्‍त श्रीलंका के रक्षा मंत्री ने इसके तार आइएस से जुड़े होने की बात की थी. इसके अलावा इस संगठन ने साल 2014 में बौद्ध धर्म को लेकर बेहद घटिया बयान दिए थे. साथ ही भारी मात्रा में बौद्ध मूर्तियों को भी नुकसान पहुंचाया था. इस संगठन पर पीस लविंग मुस्लिम्स इन श्रीलंका ने प्रतिबंध लगाने की मांग की थी.

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