लूट मचाकर यूनिवर्सिटी में छिप जाते थे चोर
पिछले कई दिनों से अलीगढ़ के सिविल लाइन एरिया में लूट-पाट की वारदातें हो रही थीं. कभी किसी की चेन खींच ली जाती तो कभी किसी का पर्स. 28 दिसंबर को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से रिटायर्ड अध्यापिका से 90,000 रुपए लूट लिए गए. इसके बाद पुलिस ने सादी वर्दी में जांच शुरू कर दी. 1 जनवरी, 2018 को सिविल लाइन इलाके से 4 बदमाश पकड़े गए, जिन्होंने चोरी की कुल 12 घटनाएं कबूल कीं.

आरोपियों के साथ बरामद हुआ चोरी का माल.
पुलिस से पूछताछ में इन्होंने बताया कि एक चोरी करके तुरंत भागने के लिए ये बाइक का इस्तेमाल करते थे. एक वारदात के बाद ये अगले दिन के अखबार का इंतज़ार करते थे. अखबार से इन्हें मालूम चलता था कि पुलिस किस बाइक पर फोकस कर रही है. मसलन अगर अखबार में छपता कि पुलिस पल्सर सवार बदमाशों की तलाश में है, तो ये अगले दिन वारदात के लिए पैशन का इस्तेमाल करते. इन्होंने ये भी बताया कि लूट के बाद ये लोग अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के एसएस नॉर्थ हॉस्टल के कमरा नंबर 42 और 44 में जाकर छुप जाते थे. 1 जनवरी को पुलिस ने इन चारों को लेकर एक प्रेस कॉन्फेंस की. इसमें ये जानकारी प्रेस के साथ बांटी गई.

1 जनवरी को पुलिस ने आरोपियों के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की.
ये जानकारी पुलिस के लिए नई थी. पुलिस सीधे यूनिवर्सिटी में जाकर कार्रवाई नहीं कर सकती. इसलिए, 2 जनवरी को अलीगढ़ के सिटी एसपी अतुल कुमार श्रीवास्तव ने एक लेटर यूनिवर्सिटी के प्रॉक्टर को भेजा. ये कहते हुए कि यूनिवर्सिटी प्रशासन इस मामले की जांच कराए और पता लगाए कि क्या बाहरी लड़के एएमयू के हॉस्टल में रुकते हैं. इस लेटर में पिछले दिनों एएमयू के ज़ियाउद्दीन हॉल में तौसीफ नाम के छात्र की गोली लगने से हुई मौत का मामला भी था. तब भी हॉस्टल में बाहरी लड़के मिले थे. पुलिस चाहती थी कि इन दोनों मामलों की जांच रिपोर्ट उसके साथ बांटी जाए.

अलीगढ़ पुलिस का यूनिवर्सिटी प्रॉक्टर को लिखा लेटर
इस लेटर को लेकर दी लल्लनटॉप ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मेंबर इंचार्ज , पब्लिक रिलेशन ऑफिस शाफिक किदवई से बात की. उन्होंने बताया,
''पुलिस के कहने पर प्रॉक्टर और वाइस चांसलर ने एक कमिटी बनाई है. इसकी प्राथमिक रिपोर्ट आ भी गई है. इसके मुताबिक पकड़े गए अपराधियों में से कोई भी यूनिवर्सिटी का छात्र नहीं है और न ही इन्हें यूनिवर्सिटी के किसी छात्र से मदद मिलती थी. लेकिन अभी अंतिम रिपोर्ट आने में कुछ समय लगेगा.''दी लल्लनटॉप ने इस बारे में अलीगढ़ शहर के पुलिस अधीक्षक अतुल कुमार श्रीवास्तव से भी बात की. उन्होंने बताया,
''हम बस इतना चाहते हैं कि आइंदा ऐसी घटनाएं न हों. हमें यूनिवर्सिटी से इस बारे में आश्वासन मिला है कि वो जांच करेंगे.''
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