The Lallantop

जीनियस को ग्रेड से फर्क नहीं पड़ता... अल्बर्ट आइंस्टीन की मार्कशीट ने जबर बहस छेड़ दी

Albert Einstein marksheet: इंटरनेट पर अल्बर्ट आइंस्टीन की एक मार्कशीट वायरल है, जिसमें सभी सब्जेक्ट्स में उनके नंबर एक जैसे नहीं है. अब इसी मार्कशीट को लेकर 'डिग्री बनाम काबिलियत' पर बहस छिड़ी हुई है.

Advertisement
post-main-image
अल्बर्ट आइंस्टीन की मार्कशीट वायरल. (फोटो-इंडिया टुडे)

अल्बर्ट आइंस्टीन. एक ऐसा वैज्ञानिक जिसने अपने सिद्धांत से ब्रह्मांड के नियमों को समझाया. ‘Theory of Relativity’ का पाठ पढ़ाया. आइंस्टीन मैथ्स और फिजिक्स दोनों में निपुण थे. ये बात उनकी वायरल मार्कशीट देखकर पता लगी. लेकिन मार्कशीट में सभी विषयों में उनके नंबर एक समान नहीं हैं. इसी बात पर इंटरनेट पर बहस छिड़ी हुई है. एक धड़े का कहना है कि डिग्री इंसान की काबिलियत तय करती है, वहीं दूसरे धड़े का कहना है कि इंसान में काबिलियत हो तो डिग्री की ज़रूरत नहीं. 

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर आई आइंस्टीन की मार्कशीट, ये कोई यूनिवर्सिटी की डिग्री नहीं है बल्कि एक सर्टिफिकेट है जो उन्हें पढ़ाई पूरी करने के बाद मिली थी. इसे आज के हिसाब से 12वीं कक्षा की डिग्री के समान समझा जा सकता है. आइंस्टीन स्विट्ज़रलैंड में स्थित आरगौ कैंटोनल स्कूल (Aargau Cantonal School) में पढ़ते थे. 

मार्कशीट के मुताबिक, उन्हें फिजिक्स, अलजेब्रा, ज्योमेट्री और नेचुरल साइंस में अच्छे नंबर मिले हैं. वहीं, जियोग्राफी, इंग्लिश, ड्राइंग और बाकी सब्जेक्ट्स में उनके नंबर कम हैं. 1896 में ये मार्कशीट इशू किया गया था. तब के मुताबिक, उच्चतम ग्रेड 6 और न्यूनतम ग्रेड 1 था. आइंस्टीन को पांच सब्जेक्ट में ग्रेड 6 मिला. बाकी 9 सब्जेक्ट्स में उन्हें ग्रेड 3, 4 या 5 मिला.  

Advertisement
undefined

आइंस्टीन की स्कूल जर्नी

बचपन से ही आइंस्टीन को गणित और विज्ञान में दिलचस्पी थी. 12 साल की उम्र में उन्होंने मैथ्स के Pythagoras theorem को प्रूफ किया. और 15 साल की उम्र में खुद से डिफरेंशियल और इंटीग्रल कैलकुलस सीखा. इसी दौरान उनकी स्कूल के टीचर्स के साथ बहस भी होती रहती. जब आइंस्टीन जर्मनी के एक स्कूल में पढ़ रहे थे तब एक टीचर ने उनसे कहा था कि वे जीवन में कुछ नहीं कर पाएंगे. इसके बाद आइंस्टीन ने बिना ग्रेजुएशन पूरा किए स्कूल छोड़ दिया.

उन्होंने अपनी बाकी पढ़ाई स्विट्ज़रलैंड के आरगौ स्कूल से पूरी की. यहां तक आते-आते मैथ्स और साइंस में उनके अच्छे नंबर आने लगे थे. लेकिन बाकी विषयों में कमज़ोर ही रहे. इसके बाद उन्होंने ETH ज़्यूरिख से 1900 में मैथ्स और फिजिक्स में अपना ग्रेजुएशन पूरा किया. 

Advertisement

ये भी पढ़ें: अल्बर्ट आइंस्टीन की लिखी चिट्ठी की कीमत 33,00,00,000 रुपये! ऐसा क्या लिख दिया था?

लोग क्या कह रहे? 

ऐसा पहली बार नहीं है जब अल्बर्ट आइंस्टीन की ये मार्कशीट वायरल हुई. पहले भी इसी मार्कशीट को शेयर कर बताया गया कि एक कागज़ इंसान की काबिलियत तय नहीं कर सकती. एक यूजर ने लिखा कि ‘अगर आप जीनियस हैं तो जन्म से ही जीनियस होते हैं. आपको अपनी योग्यता साबित करने के लिए ग्रेड की ज़रूरत नहीं है.’ कुछ यूजर ने ये भी बताया कि आइंस्टीन को लेकर एक भ्रम फैलाया गया था कि वे स्कूल में कमज़ोर थे. लेकिन ये मार्कशीट इस बात का सबूत है कि वे पढ़ाई में कितना तेज थे. 

ok
पोस्ट पर यूजर का कमेंट. 

वैसे देखा जाए तो बदलती दुनिया के साथ लोगों की सोच भी बदली है. पहले केवल डिग्री वालों को जॉब के लिए तरजीह दी जाती थी. लेकिन अब स्किल बेस्ड जॉब का ट्रेंड चला है. स्टूडेंट्स भी अब कॉलेज के दौरान इंटर्नशिप करते हैं. एक्सपीरियंस जुटाते हैं. लेकिन अपने सीवी में डिग्री ज़रूर जोड़ते हैं. तो सवाल अब भी वही है कि क्या मार्क्स काबिलियत तय करते हैं? 

वीडियो: कैसे आइंस्टीन की जनरल रिलेटिविटी और स्पेस-टाइम कर्वेचर ने बदली न्यूटन के ग्रैविटेशन की समझ?

Advertisement