हम इतने असुरक्षित माहौल में रहते हैं, कि ये शब्द किसी भी लड़की के हो सकते हैं. मगर आज जिस वाकये के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं, वो न्यूज एंकर दामिनी माहौर के साथ हुआ है. दामिनी उतर प्रदेश के एक पॉपुलर न्यूज चैनल में एंकर हैं. ये वाकया आगरा का है. दामिनी ने इसे फेसबुक पर शेयर करते हुए अपना ट्रॉमा बयां किया.'25 जनवरी, 2018. रात 8 बजे मैं भगवान टॉकीज़ से एमजी रोड पर जा रही थी. भगवान टॉकीज़ से ये दो युवक, जो कि नशा किए हुए थे, मुझे इशारे करते हुए मेरे साथ-साथ चलने लगे. मैंने पहले तो इनको नज़रअंदाज़ किया लेकिन थोड़ी देर बाद ये मुझसे बात करने की कोशिश करने लगे. सूरसदन पर आकर मैंने अपना रास्ता बदल लिया और दूसरी तरफ मुड़ गयी. वहीं ये लोग भी पीछे पीछे आ गए.'
'जब मैं बहुत परेशान हो गई तो मैं इन दोनों की गाड़ी के नंबर की फोटो खींचने लगी. तो पीछे बैठा युवक बोला कि नम्बर फ़र्ज़ी है. फिर जब मैंने उसकी फोटो ली तो वो अलग-अलग पोज़ देने लगा. जैसा कि आप फोटो में देख सकते हैं. शर्म और डर नाम की कोई चीज़ इनके चेहरे पर दिखाई नहीं दे रही.'ये नहीं हो सकता कि बाइक खरीद सकने वाले किसी लड़के ने कभ न्यूज चैनल न देखे हों. या उसे पता न हो कि सड़क चलती किसी लड़की का पीछा करना यौन शोषण में आता है. इन मनचलों को ये भी पता होता है कि ये गुनाह कर रहे हैं. मगर ये डरते नहीं. दो वजहों से: 1. मैं पुरुष हूं. ये औरत है. इसलिए ये डरेगी और शिकायत नहीं करेगी. किसी को पता नहीं चलेगा मैंने ऐसा किया. 2. ऐसा करना कोई बड़ी बात नहीं. न मुझे इससे फर्क पड़ता है, न लड़की को पड़ेगा. ऐसा तो नहीं है कि मैंने उसका बलात्कार कर दिया या उसे प्रेगनेंट कर दिया हो.
उत्तर प्रदेश में औरतों के लिए चालू हुई 1090 हेल्पलाइन जब आई थी, उसके बड़े चर्चे थे. दामिनी ने उसपर भी फ़ोन किया.
'मैंने घर आकर महिला हेल्प लाइन नम्बर '1090' पर फोन किया और अपनी कम्प्लेंट रजिस्टर करानी चाही. तो वहां मेरी बात सुनने के बाद बोला गया कि आपके पास कम्प्लेंट रजिस्टर का नम्बर आएगा. और आज 4 दिन बीत जाने के बाद भी कोई कम्प्लेंट रजिस्टर नहीं मिला. मुझे 'महिला हेल्प लाइन' सेवा नाकाम होती दिखी. ये युवक तो चले गए बेशर्मों की तरह... पर मुझे शर्म आई हमारी महिला हेल्प लाइन पर. हमारी पुलिस पर, सरकार पर. जिसका कोई ख़ौफ़ इन बेशर्म लड़कों की शक्ल पे दूर दूर तक नज़र नहीं आ रहा. इन्होंने मेरे साथ जो किया वो गुनाह इतना बड़ा नहीं था. पर ऐसी मानसिकता वाले ये लड़के, जिन्हें पुलिस का कोई ख़ौफ़ नहीं, आज अगर किसी को छेड़ रहे है तो कल किसी का बलात्कार भी इसी बेशर्मी से कर के किसी लड़की की ज़िंदगी बर्बाद कर देंगे. नेता पहुंच जाएंगे कैंडल जलाकर अपना चेहरा चमकाने के लिए. और हाथ पर हाथ रख कर बैठी रह जायेगी ये नाम की महिला हेल्प लाइन, पुलिस और सरकारें.'
दामिनी की शिकायत पर 4 दिन तक कोई एक्शन नहीं हुआ. फिर उन्होंने तय किया कि वो अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर से लिखेंगी. जब उनकी पोस्ट वायरल होने लगी तब पुलिस की आंखें खुलीं. वो भी शायद इसलिए, कि दामिनी लोकल मीडिया का एक प्रमुख चेहरा हैं. नवनीत सकेरा, जो महिला हेल्पलाइन के इंचार्ज हैं ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया:
'हमने दामिनी से माफ़ी मांग ली है. और उन अफसरों को सस्पेंड कर दिया जो कम्युनिकेशन के मसले देखते हैं. हम हर साल 10 लाख केस सुलझाते हैं. ये रेयर है कि इस हेल्पलाइन पर किसी की सुनी न गई.'बाइक पर पीछा कर रहे लड़कों का नाम उबैदुल्लाह और सबाहुद्दीन बताया जा रहा है. वो धर लिए गए हैं. उनकी बाइक भी जब्त कर ली गई है.














