आपको भी लोन चाहिए, तो फेसबुक चलाइए
बैंक सोशल नेटवर्किंग के डाटा खंगालेंगे. फिर होगा एनालिसिस. उनके पैरामीटर्स में फिट होने पर ही मिलेगा लोन.
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फोटो- यूट्यूब
बैंक भी अब स्मार्ट हो गए हैं. कई लोग लोन लेते हैं किसी और काम से, करते हैं कुछ और. लेकिन बैंक अब आपकी सोशल नेटवर्किंग के डाटा खंगालेंगे. फिर होगा उसका एनालिसिस. जब आप उनके पैरामीटर्स में फिट बैठेंगे. तब मिलेगा आपको लोन. बैंक सोशल मीडिया पर ये भी जांचेंगे जिनसे आपकी दोस्ती है, वो लोग कैसे हैं? जैसे इनकम टैक्स डिपार्टमेंट आपकी छुट्टी की फोटो देखता रहता है न, वैसे ही बैंक और लोन देने वाली कंपनियां भी आपको लोन देने से पहले आपकी सोशल नेटवर्किंग साइट्स के जरिए इस बात का पता लगाएंगी कि आप लोन चुका पाएंगे या नहीं. इसलिए जो जल्दी लोन चाहते हैं या कम इंट्रेस्ट पर लोन पाना चाहते हैं. उन्हें अपनी फेसबुक और लिंक्डइन प्रोफाइल की शक्ल-सूरत सुधार लेनी चाहिए. माने कंफर्म कर लीजिए लिंक्डइन पर आपके साथ जुड़े लोग अच्छी प्रोफाइल वाले हों. और फेसबुक पर आपकी फ्रेंड लिस्ट में कोई बदमाश घुसपैठिया न छिपा बैठा हो. जिसके चलते आपके लोन का पत्ता कट जाए. पहले जब किसी को पता करना होता था, आप कैसे आदमी हो? तो लोगों से आपके स्वभाव के बारे में पता किया जाता था. पूछा जाता था आपका व्यवहार कैसा है? लेकिन अब दुनिया बदल चुकी है. अब आपके सोशल मीडिया कनेक्शन, पर्सनल डिटेल बताएंगे कि आप कैसे इंसान हैं? और क्या आप लोन चुकाने लायक हैं? इसलिए लोन मांगने जाइएगा तो बैंक वालों को बनाने की कोशिश मत कीजियेगा. वरना हो सकता है आप लंबी-लंबी छोड़ रहे हों, इसी दौरान आपका फेसबुक एकाउंट आपके बारे में चुगली कर दे. वैसे "ये प्रक्रिया बस पहली बार लोन लेने वालों पर ही लागू की जाएगी. चूंकि पहली बार लोन लेने वालों का कोई क्रेडिट डाटा बैंक के पास नहीं होता." ये बात रंजीत पुनिया ने कही. रंजीत क्रेडिटमंत्री के कोफाउंडर हैं. क्रेडिटमंत्री क्रेडिट एनालिसिस करने वाली कंपनी है. ऐसे ही इजीसैलरी एक लोन देने वाला स्टार्टअप है. जो लोगों को तुरंत लोन देता है. इजी सैलरी के सीईओ अक्षय मल्होत्रा कहते हैं कि फेसबुक, गूगल प्लस और लिंक्डइन डाटा का हम एनालिसिस करते हैं. और एक मोटा-मोटी समझ बनाते हैं कि इंसान लोन देने लायक है या नहीं. 90 दिन के भीतर इजीसैलरी 1000 लोगों को 1.4 करोड़ के लोन पुणे, बंगलुरु और चेन्नई में दे चुकी है. बस उनकी सोशल मीडिया में पहुंच को देखकर. लोन देने वाली कंपनियां बहुत दिन से ये टेक्नीक अपना रही हैं. पर अब बैंक भी इसी राह पर चलने वाले हैं.
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