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ताजमहल से जुड़ी ये बातें नहीं पता होंगी, मुमताज की याद में आज ही शुरू हुआ था निर्माण

The 'Real' Truth of Taj Mahal: अक्सर फिल्मों और कहानियों में मुमताज को एक नाजुक बेगम की तरह दिखाया जाता है. एक मल्लिका, जो झरोखों से चांद निहारती थीं. लेकिन इतिहास की किताबें कुछ और ही गवाही देती हैं.

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सफेद संगमरमर की वो अनसुनी दास्तान जो आपका नजरिया बदल देगी (फोटो- ASI)

तारीख 25 फरवरी. साल 1631… इन्हीं दिनों के आसपास, आगरा की आबोहवा में एक अजीब सी हलचल शुरू हुई थी. मुगलिया सल्तनत का सबसे अमीर बादशाह शाहजहां अपनी बेगम मुमताज की याद में कुछ ऐसा बनाने की सोच रहा था. जो कयामत तक कायम रहे. 

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लोग इसे 'प्यार का मंदिर' कहते हैं, पर क्या ये वाकई सिर्फ एक आशिक का जुनून था? या फिर इसके पीछे कोई गहरी पॉलिटिकल और आर्किटेक्चरल प्लानिंग छिपी थी?

मुगल इमारतों पर रिसर्च कर चुकीं ऑस्ट्रिया की लेखिका एब्बा कोच (Ebba Koch) अपनी किताब “ताज महल: आर्किटेक्चर, सिम्बॉलिज्म एंड अर्बन कॉन्टेक्स्ट” (Taj Mahal: Architecture, Symbolism, and Urban Context) में लिखती हैं,

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अक्सर हम इतिहास को ब्लैक और वॉइट में देखते हैं, लेकिन ताजमहल की हकीकत सतरंगी है. इसमें जितना प्यार है, उतना ही पावर का प्रदर्शन भी.

तो चलिए, इतिहास की धूल झाड़ते हैं और उस सफेद संगमरमर के पीछे छिपे असली किरदारों और कहानियों को समझते हैं.

मुमताज: सिर्फ एक 'खूबसूरत चेहरा' या शाहजहां की 'सीईओ'?

अक्सर फिल्मों और कहानियों में मुमताज को एक नाजुक बेगम की तरह दिखाया जाता है. एक मल्लिका, जो झरोखों से चांद निहारती थीं. लेकिन इतिहास की किताबें कुछ और ही गवाही देती हैं. 

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इतिहासकार जे.एन. सरकार की किताब ‘हिस्ट्री ऑफ औरंगज़ेब’ (History of Aurangzeb) के मुताबिक, मुमताज महल शाहजहां की सबसे अहम सलाहकार थीं. शाहजहां के शासनकाल में मुमताज की अहमियत को बताते हुए जे.एन. सरकार लिखते हैं,

उनके पास 'मुहर-ए-उज़ुक' रहती थी. ये कोई मामूली अंगूठी या गहना नहीं था, बल्कि वो शाही मुहर थी जिसके बिना मुगल साम्राज्य का कोई भी सरकारी फरमान कानूनी नहीं बनता था. 

मुमताज सिर्फ महल में नहीं रहती थीं, वो शाहजहां के साथ युद्ध के मैदानों में भी जाती थीं. सिर्फ इतना ही नहीं वो सैन्य रणनीति (War Strategy) बनाने में मदद भी करती थीं. उनकी मौत के बाद शाहजहां का टूटना सिर्फ एक पति का दुख नहीं था, बल्कि एक सम्राट के सबसे भरोसेमंद 'वजीर' और 'पार्टनर' का चला जाना था.

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शाहजहां की अहम सलाहकार थीं मुमताज 
इंजीनियरिंग का 'जादू': नींव में लकड़ी और आंखों का धोखा

ताजमहल की इंजीनियरिंग को आज के ज़माने के इंजीनियर भी सलाम करते हैं. भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (Archaeological Survey of India) यानी ASI के दस्तावेजों में ताजमहल की बारीकियों से जुड़ी कई जानकारियां मौजूद हैं.

ताजमहल की इंजीनियरिंग के पीछे दो बड़े राज हैं, जिन्हें समझना जरूरी है.

नींव का लकड़ी वाला कनेक्शन: ताजमहल के नीचे 'आबनूस' (Ebony) की लकड़ी के बड़े-बड़े लट्ठों का इस्तेमाल किया गया है. आम तौर पर लकड़ी पानी से सड़ जाती है, लेकिन आबनूस का स्वभाव अलग है. ये लकड़ी जितनी पानी के संपर्क में रहती है, उतनी ही मजबूत और लचीली होती है.

इसीलिए इसे यमुना के ठीक किनारे बनाया गया. ताकि नदी की नमी इसे कंक्रीट जैसा सख्त रखे.

ऑप्टिकल इल्यूजन (आंखों का धोखा): अगर आप मुख्य गेट (दरवाज़ा-ए-रौज़ा) से ताज को देखते हैं, तो ये बहुत बड़ा और पास दिखता है. लेकिन जैसे-जैसे आप इसकी ओर कदम बढ़ाते हैं, ताज छोटा होता हुआ लगता है. 

ये शाहजहां की तरफ से एक साइकोलॉजिकल मैसेज था कि आप खुदा की खूबसूरती के करीब जा रहे हैं, जो आपके घमंड को छोटा कर देती है.

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ताजमहल का ‘दरवाज़ा-ए-रौज़ा’ कुछ खास है  (फोटो- ASI)

ये भी पढ़ें: ये है ताजमहल के बनने की असली कहानी

वो टेढ़ी मीनारें और 'भूकंप प्रूफ' डिजाइन

अगर आप ताजमहल के सामने खड़े होकर ध्यान से देखेंगे, तो आपको महसूस होगा कि इसकी चारों मीनारें बिल्कुल सीधी नहीं हैं. वो बाहर की तरफ हल्की सी झुकी हुई हैं. 

अमेरिकी लेखक कैरोलिन अर्नोल्ड (Caroline Arnold) अपनी पुस्तक “द ताजमहल: मॉन्यूमेंट ऑफ लव” (The Taj Mahal: Monument of Love) में इसकी वजह बताते हुए लिखती हैं,

ये एक मास्टरस्ट्रोक था. इसे 'एंटी-कोलैप्स' इंजीनियरिंग कहते हैं. इन मीनारों को जानबूझकर बाहर की तरफ झुकाया गया ताकि अगर कभी बहुत तेज भूकंप आए, तो ये मीनारें बाहर की तरफ गिरें. इससे मुख्य गुंबद, जहां असली कब्रें हैं, उसे कोई नुकसान न पहुंचे.

विवादों का 'भंवर': क्या ये 'तेजो महालय' था?

ताजमहल को लेकर पिछले कुछ दशकों में एक थ्योरी बहुत चर्चा में रही है. पी.एन. ओक (P.N. Oak) की पुस्तक “द ताजमहल इज तेजो महालय: ए शिव टैंपल” (The Taj Mahal is Tejo Mahalaya: A Shiva Temple) में सबसे पहले विस्तार से 'तेजो महालय' थ्योरी पर लिखा गया.

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ताजमहल पर इस किताब के दावे ने विवाद खड़ा किया

अपनी 'तेजो महालय' थ्योरी में पी.एन. ओक ने दावा किया कि 

ताजमहल मूल रूप से एक शिव मंदिर था. जिसे शाहजहां ने कब्जे में लेकर मकबरे का रूप दे दिया. 

उन्होंने ताजमहल के बंद दरवाजों (22 कमरों) के पीछे हिंदू चिह्न होने की बात कही थी. हालांकि, ASI (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) और मुख्यधारा के इतिहासकारों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया. 

कोर्ट में भी कई बार ये मामला गया. लेकिन हर बार ASI ने हलफनामा दिया कि वहां मंदिर होने के कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले हैं. ताज की दीवारों पर कुरान की आयतें लिखीं हैं. और उसका नक्शा पूरी तरह इस्लामिक वास्तुकला (Indo-Islamic Architecture) के हिसाब से है.

ये भी पढ़ें: "कोई ऐसा मक़बरा देखा है, जिस पर गुम्बद हो? ताज महल का DNA टेस्ट करवाया जाए"

फैक्ट चेक: अफवाह बनाम हकीकत

ताजमहल के बारे में सोशल मीडिया और कहानियों में बहुत कुछ चलता है. डब्ल्यू.ई. बेगली (W.E. Begley) और जेड.ए. देसाई (Z.A. Desai) ने अपनी किताब “ताज महल: द इल्युमिनेटेड टॉम्ब” (Taj Mahal: The Illumined Tomb) में ऐसी ही कई कहानियों का सच बताया है.

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ताजमहल से जुड़ी अफवाहेंं

उन्हीं की किताब से मिली जानकारी के आधार पर कुछ बड़ी चर्चा (अफवाहों) के पीछे के सच को हम एक टेबल के जरिए समझने की कोशिश करते हैं. 

मुद्दाअफवाह/कहानीऐतिहासिक हकीकत
मजदूरों के हाथशाहजहां ने मजदूरों के हाथ कटवा दिए थेकोई सबूत नहीं. ये 'रोजगार छीनने' का एक मुहावरा था. उन्हें ताउम्र पेंशन दी गई.
काला ताजमहलयमुना के पार शाहजहां अपने लिए काला ताजमहल बनाना चाहता था.मेहताब बाग में मिली काली ईंटें असल में सफेद पत्थर ही थे, जो वक्त के साथ काले पड़ गए थे.
बंद कमरेउन 22 कमरों में मूर्तियां और खजाना छिपा है.ASI के मुताबिक ये कमरे बेसमेंट स्ट्रक्चर को सहारा देने के लिए हैं. इनकी तस्वीरें 2022 में सार्वजनिक की गई थीं. 
खिड़की से पानीमुमताज की कब्र पर एक छेद से पानी टपकता है.ये सिर्फ संघनन (Condensation) या नमी की वजह से होता है, कोई अलौकिक चमत्कार नहीं.

स्रोत: 'Taj Mahal: The Illumined Tomb' by W.E. Begley and Z.A. Desai

ताज देखने जा रहे हैं? ये चेकलिस्ट साथ रखें!

दुनिया के सात अजूबों में से एक ताजमहल को देखने की तमन्ना हर किसी के दिल में है. अगर आपने अब तक ताज के दीदार नहीं किये हैं और अगली बार आगरा जा रहे हैं तो इन 5 चीजों को मिस न करें. 

  1. मेन गेट का जादू: मुख्य दरवाजे से अंदर घुसते समय ताज के आकार को घटते-बढ़ते जरूर महसूस करें.
  2. यमुना का किनारा: ताजमहल के पीछे की तरफ जाएं और देखें कि लकड़ी की नींव को नमी कहां से मिलती है.
  3. पित्रा ड्यूरा आर्ट: दीवारों पर लगे पत्थरों को ध्यान से देखें, ये पेंटिंग नहीं बल्कि कीमती पत्थरों की जड़ाई है.
  4. मीनारों का झुकाव: दूर खड़े होकर मीनारों के 'बाहरी झुकाव' को अपनी आंखों से वेरिफाई करें.
  5. मेहताब बाग: अगर ताज की बेहतरीन फोटो चाहिए, तो यमुना के दूसरी पार 'मेहताब बाग' से सूर्यास्त देखें.
Taj Mahal
‘मेहताब बाग’ से ताजमहल का सूर्यास्त (फोटो- ASI)
सफेद संगमरमर की वो अमर दास्तान

तो साहब, ये थी ताजमहल की वो कहानी जो गाइड्स की रटी-रटाई बातों से थोड़ी अलग है. ताजमहल सिर्फ ईंट-पत्थर का ढांचा नहीं है, बल्कि ये मुगल काल की इंजीनियरिंग, कला और इमोशन्स का एक कॉम्प्लेक्स मिक्सचर है. 

चाहे इसे प्यार की निशानी कहें, 'तेजो महालय' के विवादों में घसीटें या बादशाह का रसूख समझें. हकीकत ये है कि आज भी दुनिया का हर शख्स इसे एक बार निहारने की हसरत रखता है.

इतिहास की परतें खुलती रहेंगी, नए विवाद भी आएंगे. लेकिन यमुना किनारे खड़ा ये सफेद जादू हमें हमेशा याद दिलाता रहेगा कि अगर जुनून और पैसा दोनों साथ हों, तो 'इतिहास' लिखा जा सकता है.

वीडियो: तारीख़: जब अंग्रेज़ों ने ताज महल को बेचने की कोशिश की

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