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अगर आज चुनाव हुए तो बीजेपी को कितनी सीटें मिलेंगी?

इंडिया टुडे के मूड ऑफ द नेशन सर्वे के मुताबिक कैसा है नेशन का मूड?

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प्रधानमंत्री मोदी (फोटो: इंडिया टुडे)

1958 में किशोर कुमार और मधुबाला की एक फिल्म आई थी - चलती का नाम गाड़ी. सत्येन बोस की बनाई इस फिल्म का एक गाना बड़ा मशहूर हुआ था - हाल कैसा है जनाब का. जनाब का हाल पूछने में ये गाना बड़ा काम आता है. और देश की राजनीति का हाल पूछने में काम आता है इंडिया टुडे का मूड ऑफ द नेशन सर्वे. कैसा है नेशन का मूड? अगर आज चुनाव हो जाएं, तो मोदी-शाह की भाजपा का प्रदर्शन कैसा रहेगा? आज इसी बारे में बात करेंगे.

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नरेंद्र मोदी को केंद्र की सत्ता में काबिज हुए 8 बरस हो गए हैं. 2014 के चुनाव में 282 का आंकड़ा छुआ तो 2019 के चुनाव में 300 के आंकड़े को पार कर लिया. कहते हैं वक्त के साथ चीजें बदलती हैं और हर किसी का वक्त भी ढलता है. तो क्या प्रधानमंत्री मोदी के साथ भी ऐसा हो रहा है या फिर होने की कोई संभावना नजर आ रही है?

खासकर तब जब देश की राजनीति में हर दिन बड़े बदलाव हो रहे हैं.बिहार की राजनीति में आए परिवर्तन के बाद ये सवाल और प्रखरता से पूछा जाने लगा.सीएम नीतीश कुमार का बयान भी काफी चर्चा में रहा है. जिसमें उन्होंने कहा कि हम 2024 में आए या ना आएं, 2014 वाले चले जाएंगे. साफ था उनका इशारा और निशाना दोनों प्रधानमंत्री मोदी की तरफ था. तो फिर मौका-ए-दस्तूर को देखते हुए सी-वोटर ने इंडिया टुडे मैग्जीन के लिए देश का मूड जाना. एक सर्वे किया कि आने वाले भविष्य में देश की राजनीति में किसकी कितनी संभावना बन रही है. डिस्क्लेमर के तौर पर हम कुछ बातें साफ कर देना चाहते हैं. ये सर्वे 15 जुलाई 2022 से 31 जुलाई 2022 के बीच किया गया.

इसमें सभी राज्यों के सभी लोकसभा सीटों के कुल 22 हजार 861 मतदाताओं का इंटरव्यू किया गया. इसके अलावा फरवरी 2022 से लेकर जुलाई 2022 के बीच सी-वोटर ने नियमित ट्रैकर डेटा के 96,676 लोगों से बात की. बिहार में स्थिति बदली तो उसे देखते हुए 9 अगस्त को बिहार के 2 हजार 479 और लोगों की फोन पर राय जानी. कुल मिलाकर कहें तो सर्वे का सैंपल साइज 1 लाख 20 हजार के ऊपर बैठता है. इतने लोगों से बात कर मैथेलॉजी के जरिए औसत आंकड़े निकाले जाते हैं. हमने सैंपल साइज बता दिया. अब बिना लाग लपेट सीधे सर्वे पर आते हैं. हम जानते हैं कि आपकी उत्सुकता सीधे सीटों और नेता के बारे में जानने की होगी. मगर उससे पहले ये जान लेते हैं कि देश में मौजूदा मुद्दे क्या हैं?

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सी-वोटर ने अपने सर्वे में सवाल किया- 

देश के लिए सबसे बड़ी समस्या क्या है?
- सबसे ज्यादा 27% लोगों ने महंगाई को समस्या माना
- दूसरे नंबर पर 25.3% लोग बेरोजगारी को समस्या मानते हैं
- गरीबी को समस्या मानने वाले 7.4% हैं

मतलब ये कि महंगाई और बेरोजगारी को देश के ज्यादातर लोग सबसे बड़ी समस्या मानते हैं. कोरोना और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था मुश्किल दौर से गुजर रही है. इसको लेकर भी सवाल हुआ. लोगों से पूछा गया कि 

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अगले छह महीने में भारतीय अर्थव्यवस्था कैसी रहेगी?

अगस्त 2022 में 31 फीसदी लोगों ने कहा, सुधरेगी. 23 फीसदी लोगों ने माना कोई बदलाव नहीं होगा. 34 फीसदी लोग कहते हैं कि अर्थव्यवस्था और खराब होगी. 12 फीसदी कहते हैं हम नहीं जानते. कुल मिलाकर कहें तो निराशा जनक विचार रखने वालों की संख्या ज्यादा है. इसी पन्ने पर अगला सवाल है कि क्या आपकी पारिवारिक आय या वेतन में सुधार की संभावना है? अगस्त 2022 में 28 फीसदी लोगों ने कहा सुधरेगी, 30 फीसदी लोगों ने कहा कोई बदलाव नहीं होगा. 30 फीसदी लोगों ने कहा और खराब होगी. 13 फीसदी लोगों ने कहा कह नहीं सकते. इसी क्रम में सर्वे में अगला सवाल पूछा गया.

पिछले साल की तुलना में आपके मौजूदा खर्चे कैसे हैं?
अगस्त 2022 में 27 फीसदी लोगों ने कहा, बढ़ गए हैं पर संभाले जा सकते हैं. 63 फीसदी, ये संख्या बहुत बड़ी है. इतने लोगों ने कहा कि संभालना मुश्किल हो रहा है. यानी लोग परेशान हैं. जबकि सिर्फ 9 फीसदी लोगों ने कहा कि कम हो गए हैं. मगर सबसे बड़ी संख्या यहां उन लोगों की है, जिनका कहना है कि महंगाई इतनी बढ़ गई है कि खर्चे संभालना मुश्किल हो रहा है. लोगों से सी-वोटर ने सर्वे में पूछा- 

मोदी सरकार की सबसे बड़ी नाकामी क्या है?

32 फीसदी से ज्यादा लोगों ने महंगाई को नाकामी बताया. 26 फीसदी से ज्यादा लोगों ने बेरोजगारी को नाकामी माना. 10 फीसदी के करीब लोगों ने आर्थिक विकास को नाकामी के तौर पर देखा. सर्वे के अब तक के आंकड़ों से ये साफ है कि महंगाई, बेरोजगारी जैसे मुद्दों ने दिक्कत में डाल रखा है. वो इसे अपनी परेशानी का सबब भी मान रहे हैं. मगर...हम यहां विशेष जोर देते हैं. क्योंकि सवाल है कि क्या जनता की इन समस्याओं से मोदी सरकार की सेहत पर कोई असर पड़ने वाला है? तो उसके लिए अगले सवाल पर आते हैं. इसमें पूछा गया- 

पीएम मोदी का प्रदर्शन कैसा है?

22.7 फीसदी लोगों ने कहा बहुत अच्छा है
42.8 फीसदी लोगों ने कहा अच्छा है
खराब मानने वाले 13.2 फीसदी हैं
बहुत खराब मानने वाले 12.9 फीसदी हैं

अब इसका लब्बोलुआब ये है कि तमाम समस्याओं की हामी भरने के बावजूद 65% से ज्यादा लोग पीएम मोदी के काम को सराह रहे हैं. अच्छा और बहुत अच्छा की कैटगरी में रखते हैं. तो यहीं से नए सवाल जन्म लेते हैं. महंगाई मुद्दा है? मगर क्या इस मुद्दे पर वोट गिरेगा? बेरजोगारी को लोग मोदी सरकार की नाकामी मानते हैं, मगर क्या बेरोजगारी वोटिंग का मुद्दा बनेगा? तो इसके जवाब के लिए अब आ जाते हैं. सबसे अहम सवाल पर. सी-वोटर  के सर्वे में लाख टके का सवाल ये कि 

देश का अगला पीएम कौन बनेगा? 

मतलब पीएम की पहली पसंद कौन है? अब ये आंकड़ा दिलचस्प है. देश में प्रधानमंत्री की पहली पंसद आज भी नरेंद्र मोदी हैं. सर्वे के मुताबिक 53.4% लोग चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी ही फिर से, लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बनें. सिर्फ 9.3% लोग राहुल गांधी और 6.5% लोग केजरीवाल को प्रधानमंत्री के तौर पर देखना चाहते हैं. ये सर्वे के आंकड़े हैं. स्पष्ट कर देते हैं कि ये सर्वे का अनुमान है. जमीनी हकीकत तो चुनाव में ही पता चलती है. मगर सर्वे मोटा-मोटी दिशा को दिखा ही देते हैं.

और सर्वे के आंकड़े बड़ा संदेश दे रहे हैं. वो ये कि कई संकटों और झंझातों से गुजरने के बाद भी प्रधानमंत्री मोदी की लोकप्रियता ज्यों कि त्यों बनी हुई है. अलबत्ता वक्त के साथ बढ़ी ही है. महंगाई, रोजगार जैसे मोर्चे पर पिछड़ने के बावजूद उनकी प्रसिद्धि कम से कम सर्वे में तो बेदाग है. आलोचक कहते हैं ये धर्म और राष्ट्रवाद के मुद्दे का असर है. समर्थक कहते हैं प्रधानमंत्री पर आलोचना की धूल चिपकती ही नहीं. उनको छोटे-मोटे झटके झेलने का कवच हासिल है. जानकार कहते हैं कुछ भी कहो, प्रधानमंत्री का अपना एक आभामंडल तो जरूर है. जिसका प्रभाव बड़े पैमाने पर आम जनमानस पर नजर आता है. सी-वोटर का सर्वे कहता है कि लोकप्रियता के मामले में मोदी अब भी शिखर पर हैं. आंकड़ों में तो आस-पास भी कोई नेता नजर नहीं आता है. अब जरा वोटों के आंकड़ों की बात कर लेते हैं. 

किसको कितने वोट ?

बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA को 41.4% वोट
कांग्रेस के नेतृत्व वाले UPA को 28.1% वोट
अन्य के खाते में 30.6%  वोट का अनुमान है

2019 के चुनाव में NDA को 45 फीसदी के करीब वोट मिले थे. लेकिन तब NDA के साझेदार भी ज्यादा थे. शिवसेना, अकाली, जेडीयू जैसी पार्टियां तब बीजेपी के साथ चुनाव लड़ रही थीं. जो अब अलग हो चुकी हैं. और इसका असर वोट शेयर में भी देखने को मिल रहा है. अब वोट शेयर सीटों पर तब्दील हो तो किसे कितनी सीटें मिलने का अनुमान है ? वो भी देख लीजिए.

अगर आज चुनाव हुए
- NDA को 307 सीट
- UPA को 125 सीट
- अन्य को 111 सीटें मिलने का अनुमान रहा. 

मगर ये आंकड़े 1 अगस्त 2022 तक के सर्वे के हैं. नीतीश कुमार के पाला बदलने के बाद स्थिति बदली है. 10 अगस्त के ताजा आंकड़ों में NDA की 21 सीट घटकर 286 पर आ गई हैं.
यूपीए के खाते में 21 सीटों का इजाफा हुआ. वो 146 पर पहुंच गईं. अन्य की संख्या जस की तस 111 ही बनी हुई है.

यानी JDU के कांटा बदलने का फायदा यूपीए को होता दिख रहा है. अगर पार्टी वाइज बात करें तो बीजेपी को अकेले 275 सीटें मिलने का अनुमान है. जो पूर्ण बहुमत के जादुई आंकड़े 272 से तीन ज्यादा हैं. यानी बीजेपी अब भी अकेले ही सत्ता में वापसी की ताकत रखती है. लाख कोशिशों के बावजूद कांग्रेस अब भी 60 के आंकड़े को पार नहीं कर पा रही है. जबकि अन्य पार्टियां 208 सीटें जीतने की स्थिति में हैं. कांग्रेस का वोट फीसद 2019 की तुलना में थोड़ा बढ़ जरूर रहा है, मगर बीजेपी का उस पैमाने पर घट नहीं रहा.

चूंकि हाल ही में बिहार में सत्ता परिवर्तन हुआ. सीएम सतत हैं, मगर साझेदार बदल गए. ऐसे में इंडिया टुडे के लिए किए गए सर्वे में बिहार से जुड़े सवाल भी पूछे गए. 9 अगस्त के दिन नीतीश कुमार ने एनडीए छोड़ने का ऐलान किया और आरजेडी-कांग्रेस के साथ गठबंधन करने का फैसला किया. सी-वोटर ने इंडिया टुडे के लिए सर्वे करते हुए बिहार में 24 सौ 79 लोगों से बात की. बदली हुई परिस्थिति में बिहार की राजनीति और उसके राष्ट्रीय असर से जुड़े सवाल लोगों से किए. पहला सवाल ये था कि

बिहार का अगला मुख्यमंत्री बनने के लिए कौन सबसे उपयुक्त है?
- 43% लोगों की पंसद के साथ तेजस्वी यादव पहले नंबर पर हैं
- नीतीश कुमार को 24% लोग फिर से अगला सीएम देखना चाहते हैं
- 19% लोग चाहते हैं कि बीजेपी का कोई नेता मुख्यमंत्री बने
- 15% लोग पता नहीं, कह नहीं सकते हैं के विकल्प के साथ गए

अगला सवाल बिहार के लोगों से पूछा गया
अगर आज बिहार में विधानसभा चुनाव होता है तो किस गठबंधन को वोट करेंगे ?
- 48% लोगों ने RJD-JDU-CON-LEFT के महागठबंधन को वोट देने की बात कही
- 31% फीसदी लोगों ने बीजेपी के नेतृत्व वाले NDA के साथ जाने की बात कही
- 21% लोगों का वोट अन्य के खाते में जा सकता है

बिहार के ही लोगों से अगला सवाल पूछा गया.

अगर बिहार में लोकसभा चुनाव आज होते हैं तो किस गठबंधन को वोट देंगे ?
- 46% लोगों का मत महागठबंधन के साथ दिखा
- जबकि 41% लोग NDA के साथ जाना चाहेंगे
- 13% फीसदी वोट अन्य के खाते में

यहां आप एक मेजर बदलाव होता देख रहे हैं. विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 31 फीसदी लोग वोट देने की बात करते हैं, मगर जैसे ही लोकसभा चुनाव की बात होती है. 
बीजेपी का वोट शेयर 10 फीसदी बढ़ जाता है. और ये बात सही है कि केंद्र और राज्य के चुनाव में बड़ा फर्क होता है. सीधे प्रधानमंत्री का चुनाव होता है तो वोटर की प्राथमिकताएं बदल जाती हैं. सर्वे के मुताबिक बीजेपी का जो वोट शेयर लोकसभा चुनाव में बढ़ रहा है. वो सबसे ज्यादा अन्य के खाते से टूटकर आता है. जबकि महागठबंधन का भी वोट शेयर 2 फीसदी टूटता है. इसका असर भी अगले सवाल में दिख जाता है. बिहार के लोगों से पूछा गया कि

 प्रधानमंत्री पद के लिए सबसे उपयुक्त उम्मीदवार कौन होगा?

पीएम मोदी बिहार के लोगों की भी पहली पसंद हैं. 

- सर्वे सैंपल के मुताबिक 44% बिहार के लोग चाहते हैं कि देश के अगले प्रधानमंत्री फिर से प्रधानमंत्रीमोदी ही बने
- 22% लोग चाहते हैं कि नीतीश कुमार सीएम बने
- जबकि 18% लोगों ने राहुल गांधी के पक्ष जाने की बात कही
- 16% फीसदी उहापोह की स्थिति में कुछ कह नहीं पा रहे

अब देखिए बिहार में हाल में सत्ता का समीरकरण बदला है. गठबंधन बदल गया. वोट भी मिलने के पूरे संकेत हैं. मगर फिर भी लोग मोदी को ही प्रधानमंत्री का पहला दावेदार मान रहे हैं. बिहार से राष्ट्रीय राजनीति पर वापस लौटते हैं. सर्वे में एक बड़ा दिलचस्प सवाल है. पूछा गया 

बीजेपी में पीएम मोदी के उत्तराधिकारी कौन हैं?

25.2% लोग मानते हैं कि गृहमंत्री अमित शाह उनके उत्तराधिकारी होंगे. 24.1 फीसदी लोग यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ पर दांव लगाते हैं. जबकि 14.9 फीसदी यानी करीब 15 फीसदी लोगों की पंसद नितिन गडकरी हैं. यहां पर अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के बीच तगड़ा कांप्टीशन है. मात्र एक फीसदी का ही अंतर है दोनों के बीच.

सी-वोटर ने जो सर्वे किया. उसमें सवालों की लिस्ट बड़ी लंबी है. गांधी परिवार से जुड़े सवाल, विपक्ष से जुड़े सवाल, राज्यवार सीएम को लेकर सवाल. और बहुत कुछ, बहुत दिलचस्प आंकड़े हैं. एक बार में ही सबकुछ बता पाना आसान नहीं है. लेकिन अगर आप बाकी आंकड़ों के बारे में जानना चाहते हैं तो आपको इंडिया टुडे मैगजीन खरीदनी होगी. इसमें पूरी रिपोर्ट विस्तार से छपी है.इसके साथ ही आपण हमारे वीकली शो नेतानगरी को भी देख सकते हैं, वहां हम इन मुद्दों पर विस्तार चर्चा करते हैं.  

वीडियो: सर्वे में पता लगा, वो नेता जो नरेंद्र मोदी को 2024 के चुनाव में परेशान करेगा?

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