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एक के बाद एक लोग पाकिस्तान से भारत चले आ रहे हैं, सुरक्षा एजेंसियां क्या कर रही हैं?

कभी सीमा कभी अंजू, तो क्या देश की सीमाएं इतनी असुरक्षित हैं कि बारहा एक के बाद एक लोग पाकिस्तान से चले आ रहे हैं? सुरक्षा एजेंसियां क्या कर रही हैं? इन दोनों मामलों में क्या कार्रवाई हुई?

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पाकिस्तान से भारत आईं सीमा हैदर (बाएं), भारत से पाकिस्तान जाकर वापस भारत लौटी अंजू (बाएं)

आज हम सबसे पहले बात करेंगे NIT श्रीनगर में हुए केस की. एक स्टूडेंट ने एक वीडियो पोस्ट किया. और दूसरे स्टूडेंट उसके खिलाफ खड़े हो गए. फिर वीडियो पोस्ट करने वाले स्टूडेंट के खिलाफ धार्मिक भावनाएं आहत करने का मुकदमा हुआ.  

उसके बाद हम चलेंगे मुजफ्फरनगर, जहां एक रैम्प पर चंद महिलाओं के वॉक करने की वजह से भी कुछ लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं. और धार्मिक भावनाएं इतनी भंगुर हैं कि एक 65 साल के बूढ़े की दाढ़ी जला दी गई और उससे जबरदस्ती जय श्री राम बुलवाया गया. गोया इस देश के नागरिक के साथ ऐसा अपराध करने से आहत धार्मिक भावनाओं पर कोई मरहम लग गया हो. इन खबरों पर बात करेंगे और फिर बात करेंगे देश की सुरक्षा की. पहले सीमा आई और अब अंजू आई. तो क्या देश की सीमाएं इतनी असुरक्षित हैं कि बारहा एक के बाद एक लोग पाकिस्तान से चले आ रहे हैं और भारतीय खुफिया एजेंसियां बस पूछताछ ही कर पा रही हैं? और आखिर में चलेंगे पश्चिम बंगाल. वहां की ममता सरकार ने सुवेन्दु अधिकारी समेत भाजपा के लगभग दर्जन भर नेताओं पर देश के राष्ट्रगान के अपमान का केस दर्ज किया है. जानेंगे कि किन सूरतों में ममता सरकार ने ये केस किया?

पहले बात श्रीनगर से. यहां के हज़रतबल के इलाके में एक इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट है - नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी. यहां केमिकल इंजीनियरिंग में एक स्टूडेंट पढ़ता है. स्टूडेंट का नाम प्रथमेश नीलेश शिंदे. प्रथमेश मूलतः महाराष्ट्र का रहने वाला है. 28 नवंबर को उसने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो अपलोड किया. ये वीडियो उसका नहीं था. उसने यूट्यूब से इसे कॉपी किया था. स्थानीय लोगों के मुताबिक ये वीडियो चरमपंथी संगठन हमास से जुड़े एक व्यक्ति का था, जिसमें वो व्यक्ति पैगंबर मुहम्मद के लिए कुछ टिप्पणियां कर रहा था.

अब प्रथमेश की इंस्टाग्राम स्टोरी सामने आई तो NIT में बवाल शुरू हुआ. छात्रों के एक खास समूह ने प्रोटेस्ट करना शुरू किया. ये समूह कश्मीर से आने वाले मुस्लिम समुदाय के छात्रों का था. उनकी मांग थी कि प्रथमेश को निष्कासित किया जाए. उसके खिलाफ एक्शन लिया जाए. संस्थान ने छात्रों की एक मांग तुरंत मान ली. NIT रजिस्ट्रार ने नगीन पुलिस थाने में तहरीर दी. तुरंत प्रथमेश के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया. क्या धाराएं लगाई गईं?  

1 - 153 - दंगा भड़काने की हद तक उकसाना

2 - 153 A - दो समूहों के बीच वैमनस्य पैदा करना

3 - 295 A - बोलकर या लिखकर धार्मिक भावनाओं को भड़काना

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक मुकदमे के साथ ही प्रथमेश को कॉलेज प्रशासन ने रस्टीकेट कर दिया. यानी उसका नाम काट दिया गया. उसे कह दिया गया कि वो अपने घर चला जाए. प्रथमेश ने कॉलेज और कश्मीर दोनों ही छोड़ दिया.

इसके बाद कम से कम मामला शांत हो जाना चाहिए. लेकिन नहीं हुआ. प्रोटेस्ट बढ़ते-बढ़ते कॉलेज परिसर से निकलकर हजरतबल और आसपास की सड़कों पर फैल गया. इसे देखते हुए 30 नवंबर को कॉलेज प्रशासन ने ऐलान किया - जाड़े की छुट्टियां अभी से शुरू की जा रही हैं. साथ ही जम्मू-कश्मीर के डीजीपी आरआर स्वैन ने मीडिया को संबोधित किया. मामले की जांच का आश्वासन दिया और कहा कि इस पूरे केस में जो प्रोटेस्ट हो रहे हैं, उसमें पाकिस्तान से जुड़े एलीमेंट शामिल हो रहे हैं.

और 1 दिसंबर की तारीख लगते-लगते पूरा कॉलेज सन्नाटे में चला गया. लेकिन ये पहला मौका नहीं था, जब NIT कश्मीरी बनाम नॉन-कश्मीरी की बहस में उलझा हो. साल 2016 में भी कुछ ऐसा ही हुआ था. टी20 वर्ल्ड कप चल रहा था. भारत और वेस्ट इंडीज के बीच सेमीफाइनल का मैच था. भारत इसमें हार गया. निर्णायक रूप से बैटिंग की थी आन्द्रे रसेल ने. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, NIT में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्रों ने आन्द्रे रसल के नारे लगाना शुरू कर दिया. उन्होंने भारत की हार का जश्न मनाया. गैर-कश्मीरी स्टूडेंट इससे गुस्सा गए. फिर दोनों में बहस हुई.

कैंपस में पुलिस तैनात कर दी गई. फिर पुलिस के सामने नॉन-कश्मीरी छात्रों ने "भारत माता की जय", "हिंदुस्तान ज़िन्दाबाद" और "पाकिस्तान मुर्दाबाद" के नारे लगाए, और पाकिस्तान का झण्डा जलाया.  कश्मीरी छात्रों ने इसके जवाब में "हम क्या चाहें आजादी" का नारा लगाया. इसके बाद छात्रों के दोनों गुट फिर से भिड़ गए. पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल करके स्थिति को कंट्रोल किया. गाहे-बगाहे छात्रों के दोनों गुट रह-रहकर भिड़ते रहे. इस बार भी कई दिनों के कॉलेज बंद कर दिया गया.

कश्मीर के बाद चलते हैं अब यूपी.

अगर कोई रैम्प पर बुर्का पहनकर चले तो सोचिए कितना बड़ा मसला हो सकता है? यूपी में हो सकता है. मुजफ्फरनगर में एक श्रीराम कॉलेज है. कॉलेज में  24 नवंबर से लेकर 26 नवंबर तक फैशन स्पलैश 2023 कार्यक्रम का आयोजन हुआ. इसमें फिल्म अभिनेत्री मंदाकनी भी शामिल हुईं. कई मॉडल भी पहुंचे. डिजाइनर कपड़े पहनकर मॉडल और छात्र-छात्राएं रैम्प पर वॉक करते थे. इसी कड़ी में कॉलेज में पढ़ने वाली बीएफए की कुछ छात्राओं ने बुर्का और हिजाब पहनकर रैंप पर कैटवॉक किया.

उनकी कोशिश को ऐसा माना जा सकता है कि वो उस परिधान या उस वेशभूषा की एक कलासम्मत नुमाइश करना चाह रहे हों. वो बुर्के और हिजाब की विविधता दिखाना चाह रहे हों. आयोजन खत्म हुआ. वीडियो वायरल हुआ. बवाल शुरू हुआ. सामने आए मुस्लिम संगठन और मिली तनजीमें. कहा कि बुर्का या हिजाब एक धार्मिक परिधान है. कॉलेज ने उसमें कैटवॉक करवाकर धार्मिक भावनाओं को भड़काने का काम किया है. जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के जिला संयोजक की कुर्सी पर बैठने वाले मुक़र्रम काज़मी ने कहा कि बुर्का फैशन शो का हिस्सा नहीं , तन का पर्दा है.

इन तमाम समझाइशों का मुकम्मल जवाब दिया कॉलेज से जुड़े छात्रों ने और उनके शिक्षकों ने. बुर्के और हिजाब वाली इन तमाम ड्रेस को डिजाइन करने वाली शनेहा ने नवभारत टाइम्स से बातचीत में कहा, 

"हमारे विभागाध्यक्ष मनोज धीमान ने कहा था कि फैशन शो में कुछ अलग करके दिखाओ. इसके बाद मैनें अपनी मुस्लिम बहनों के लिए यह निर्णय लिया कि बुर्के को फैशन का रूप दिया जाए. बुर्के में कैटवॉक करने पर पहले तो मेरे मन में डर था, लेकिन जब मनोज सर ने हौसला दिया तो बुर्के में कैटवॉक कर अच्छा अनुभव प्राप्त किया. बुर्का हमारा पर्दा है, लेकिन यह फैशन भी बन सकता है."

कॉलेज ने भी अपने मीडिया प्रभारी रवि गौतम के जरिए बयान जारी किया -  

" ये केवल क्रिएटिवटी का हिस्सा है, जो छात्राओं के करियर से जुड़ा है. इसे धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए."

आप इस बात को समझिए. ये किसी धार्मिक परिधान से जुड़ा नहीं है. ये महिलाओं की स्वायत्तता से जुड़ा मामला है. वो जो चाहें वो पहन सकती हैं. वो अपने परिधान को किसी भी रूप में ढाल सकती हैं. उसे किसी भी तारे-टिकुली-ज़री से सजा सकती हैं. चाहे वो कोई भी ड्रेस हो. कोई भी आभूषण हो. हमारी समझाइश और हमारी हिदायत हम तक ही रहे, ज्यादा जरूरी ये है.

इस हिदायत के साथ चलते हैं अब कर्नाटक. जहां कुछ लोगों ने एक बुजुर्ग मुसलमान को अगवा किया. उससे जबरदस्ती जय श्रीराम बुलवाया, और उसकी दाढ़ी जला दी.

कर्नाटक का गंगावती शहर. इसी शहर के एक छोटे से घर में हुसैनसाब रहते हैं. 65 वर्षीय हुसैनसाब की आंखों की रोशनी बेहद कम हो चुकी है. माली हालत भी अच्छी नहीं है.  कल 30 नवंबर को इन्होंने एक FIR दर्ज कराई. इस FIR के मुताबिक हुसैनसाब को 'जय श्री राम' का नारा लगाने के लिए मजबूर किया गया. और इन्होंने ऐसा करने से मना किया तो दो लोगों ने उनकी पिटाई कर दी. इस वीडियो में आप देख रहे होंगे कि हुसैनसाब कैसे अपने जख्मों को दिखा रहे हैं.

पूरा मामला जानिए. न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, हुसैनसाब 25 नवंबर की रात होसापेटे से गंगावती लौट रहे थे. जब वो ऑटो का इंतजार कर रहे थे तब बाइक सवार दो लोग उनके पास आए. उन्होंने हुसैनसाब से पूछा कि वो कहां जा रहे हैं. हुसैनसाब ने जवाब दिया तो दोनों ने कहा कि कहां ऑटो के चक्कर में पड़ेंगे, आपको हम छोड़ देते हैं. हुसैनसाब को वो दोनों युवक भले लोग लगे. लिहाजा वो बाइकपर बैठ गए.

जैसे ही बाइक कुछ दूर चली, तो दोनों युवक हुसैनसाब से मारपीट करने लगे. उन्हें गालियां देने लगे. इसके बाद उन्होंने हुसैनसाब से कहा "जय श्री राम" का नारा लगाओ. हुसैनसाब ने करने से मना कर दिया. दोनों युवकों ने गुस्साकर हुसैनसाब के सिरपर बीयर की बोतल फोड़ दी. वो दोनों इतने पर ही नहीं रुके.

FIR के मुताबिक, उन्होंने बीयर की बोतल के कांच से हुसैनसाब की दाढ़ी काटने की कोशिश की. दाढ़ी नहीं कटी तो उन्होंने हुसैनसाब की दाढ़ी जला दी. और पीटना शुरू किया. उन्हें तब तक पीटा, जब तक आसपास के घरों से लोग बाहर नहीं आ गए. इसके बाद दोनों हमलावर घटनास्थल से फरार हो गए.

लोगों की मदद से हुसैनसाब घर,  और फिर अस्पताल गए. कुछ दिन इलाज कराने के बाद पुलिस के पास उन्होंने केस दर्ज किया. और पुलिस कर रही है अपनी जांच. अगर आप देश दुनिया के घटनाक्रम पर नजर रखते होंगे तो आपको समझ में आएगा कि ये ऐसा कोई पहला मामला नहीं है. अक्टूबर 2023 में बिहार के मुंगेर में भी ऐसा ही हुआ था. जहां एक फलवाले ने आरोप लगाए कि उसे जय श्री राम का नारा लगाने के लिए बाध्य किया गया.

नवंबर 2023 में मध्य प्रदेश के विदिशा में एक केस आया था. जिसमें एक स्टूडेंट को उसके टीचर ने इसलिए पीटा था कि उसने जय श्री राम का नारा लगा दिया था. स्कूल ने नियम भी समझाए थे - किसी भी तरह की नारेबाजी करना अनुशासनहीनता में आता है. ज़ाहिर है. हर नारे की अपनी जगह और अपना समय है. हमारी या आपकी धार्मिक आस्था हम तक महदूद रहे, और हम उसे बिना किसी डर या दबाव के ज़ाहिर कर सकें, जरूरी ये है. हम थोपना बंद करें, जरूरी ये है.  

अब बात करते हैं सीमा और अंजू की. सीमा हैदर पाकिस्तान से भारत आई. सचिन से शादी की. मीडिया में सुर्खियां बटोरी, अब रील बनाती हैं. फिर नवंबर में आईं अंजू. वो अंजू जो कुछ दिनों पहले भारत से पाकिस्तान गई थीं. फिर लौटकर चली आईं. अंजू इस साल 21 जुलाई को अपने पति और घरवालों को बताए बगैर  राजस्थान के भिवाड़ी से पाकिस्तान चली गई थी. कई मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो अंजू फेसबुक के जरिये पाकिस्तानी नागरिक नसरुल्लाह के संपर्क में आईं और दोनों की दोस्ती हो गई. बताया गया कि ये दोस्ती प्यार में तब्दील हुई. और दोनों ने शादी कर ली. अंजू का नाम हो गया फातमा.

नसरुल्लाह ने एक इंटरव्यू में कहा था कि,

''हमारा उस समय शादी करने का कोई इरादा नहीं था. अंजू सिर्फ कुछ दिन के लिए ही पाकिस्तान आई थीं ताकि मुझसे और मेरे परिवार से मिल सके. लेकिन हालात ही कुछ ऐसे बने कि हमें निकाह करना पड़ गया. अब मैं अंजू से और अंजू मुझसे बहुत प्यार करते हैं.''

और अब पूरे 4 महीने और 1 हफ्ते के बाद अटारी-वाघा बॉर्डर के जरिए अंजू भारत लौट आई. भारत में एंट्री करते ही मीडिया के कैमरों ने अंजू को घेर लिया. कई तरह के सवाल पूछे ने 'सिर में दर्द' और 'अभी कुछ नहीं कहना' बोल कर निकल गई.  

लेकिन वापिस चलते हैं कि अंजू के पाकिस्तान प्रवास पर. अंजू पर पाकिस्तान की सरकार बहुत मेहरबान रही. पाकिस्तान ने अगस्त में अंजू का वीज़ा एक साल के लिए बढ़ा दिया था. इसके बाद सितंबर में अचानक अंजू के पति नसरुल्लाह ने जानकारी दी थी कि अंजू मेंटली बहुत परेशान हैं और उन्हें अपने बच्चों की याद सता रही है. . नसरुल्लाह ने कुछ दिन पहले ये भी बताया था कि वाघा-अटारी बॉर्डर पर आने-जाने के लिए दस्तावेजों तैयार करने की प्रक्रिया पूरी होते ही नवंबर के आखिर तक अंजू भारत जाएगी.

लेकिन भारत लौटने के बाद अंजू अब गायब है. अटारी-वाघा बॉर्डर के बाद अंजू दिल्ली के आईजीआई एयरपोर्ट पर देखी गई थी. फिर नहीं दिखीं. क्योंकि वो ना तो अपने घर पहुंचीं,  ना ही अपने पिता के घर.

इंडिया टुडे से जुड़े हिमांशु शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक भिवाड़ी की एक सोसाइटी में रहने वाले अंजू के बच्चों और उसके पति अरविंद ने उससे मिलने से मना कर दिया है. बच्चों ने अंजू को सोसाइटी में प्रवेश नहीं देने के लिए कहा है. इसलिए सोसायटी के गेट पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है. किसी को भी अरविंद के फ्लैट में आने जाने की अनुमति नहीं है. भिवाड़ी के एडिशनल एसपी दीपक सैनी ने कहा कि इस मामले में दर्ज एफआईआर के अनुसार जांच पड़ताल की गई है. साथ ही इससे संबंधित लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं. अगर अंजू भिवाड़ी आती है, तो उससे पूछताछ की जाएगी. यानी अंजू से इंटेरोगेशन की ये प्रक्रिया तब होगी जब वो भिवाड़ी आएगी. अब सवाल ये है कि अंजू जिस तरह से पाकिस्तान गई और फिर वहां से लौटी तो क्या देश की सुरक्षा एजेंसियों ने इसका संज्ञान नहीं लिया? बिल्कुल लिया...

अटारी-वाघा बॉर्डर पर आने के तुरंत बाद आईबी और पंजाब पुलिस ने अंजू से लंबी पूछताछ की थी. आज तक के  क्राइम एंड इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो के एडिटर अरविंद ओझा के इनपुट के मुताबिक पूछताछ में अंजू ने बताया है कि वो अपने पहले पति अरविंद से तलाक लेने के बाद अपने बच्चों को पाकिस्तान ले जाने के लिए आई है. पूछताछ में अंजू ने पाकिस्तान में नसरुल्लाह से निकाह की बात भी कबूल की लेकिन उससे संबंधित कोई भी दस्तावेज नहीं पेश कर पाई. उसने वापस भारत आने का एक मकसद पहले पति अरविंद को तलाक देना भी बताया है. साथ ही ये भी कहा है कि अरविंद ने उसे लेकर कई सारे झूठ बोले हैं जिसकी जानकारी वो पुलिस को देगी.

ये स्थिति बहुत गंभीर है. एक नागरिक बिना किसी रोकटोक के पाकिस्तान और भारत में आवाजाही कर रहा है. सवाल है कि उसका वीजा कैसे अप्रूव हो रहा है? किन शर्तों पर हो रहा है? सुरक्षा एजेंसियां इन बेधड़क आवाजाहियों पर क्या सोचती हैं? और क्या ये अंजू और सीमा जैसे केस हमारे देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं? सुनते हैं सरकारी एजेंसियों पर नजर बनाए अरविन्द ओझा को.

और अब चलते हैं पश्चिम बंगाल. यहां 11 अन्य भाजपा विधायकों पर 29 नवंबर को राष्ट्रगान का अपमान करने का मामला दर्ज किया गया है. इन नेताओं पर शांति भंग करने के लिए उकसाने के भी आरोप लगे हैं. इसके बाद हो रहा है सियासी बवाल. टीएमसी नेता कुनाल घोष ने शुभेंदु अधिकारी को चोर और भ्रष्टाचारी बताया. जबकि बीजेपी विधायक शंकर घोष ने बंगाल सरकरा पर विपक्ष की आवाज घोटने के आरोप लगाया है.

बंगाल में भी विधानसभा का विंटर सेशन चल रहा है. इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत टीएमसी के कई नेता विधानसभा के बाहर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे थे. वो परिसर में लगी डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के नीचे बैठकर प्रोटेस्ट कर रहे थे.  यह प्रदर्शन केंद्र सरकार द्वारा बंगाल का बकाया रोकने के खिलाफ था.  इस प्रोटेस्ट का काउंटर प्रोटेस्ट भाजपा के विधायक सदन के मेन गेट के पास बैठकर कर रहे थे. 30 नवंबर के दिन प्रदर्शन के बाद ममता बनर्जी ने सभी विधायकों को राष्ट्रगान के लिए खड़े होने के लिए कहा. सभी विधायक खड़े हो गए लेकिन भाजपा विधायक नारे लगाते रहे. और ये नारेबाजी राष्ट्रगान गायन तक बदस्तूर जारी रही.

इसके बाद कोलकाता के हेयर पुलिस स्टेशन में पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिव सुकुमार रे की शिकायत पर भाजपा विधायकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई.  क्या धाराएं लगीं?

- राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम 1971 की धारा 341 (गलत तरीके से रोकना),  

- IPC की धारा 504 (शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान)

- IPC 34 (समान इरादे के साथ कई व्यक्तियों द्वारा किया गए काम)

बता दें कि भाजपा नेता सुवेन्दु अधिकारी को 28 नवंबर को पहले ही विधानसभा से निलंबित कर दिया गया था. उन पर आरोप लगे थे कि स्पीकर बिमान बनर्जी का अपमान किया था. अब केस दर्ज होने के बाद सुवेन्दु अधिकारी 1 दिसंबर को पहुंचे विधानसभा. अंबेडकर की प्रतिमा को धोने लगे गंगाजल से.  हमने आपको पहले ही बताया कि यहां पर तृणमूल के विधायक बैठे हुए थे. इन सभी आडंबरों से दूर रहने की सलाह देने वाले बाबा साहेब अंबेडकर की प्रतिमा जब सुवेन्दु धो रहे थे, तो वो ये कह रहे थे कि यहां नारेबाजी करके आंबेडकर का अपमान किया गया.  

समझ की जरूरत ममता और सुवेन्दु दोनों को है. राष्ट्रगान किसी ढाल की तरह इस्तेमाल में नहीं लाया जा सकता है. किसी प्रोटेस्ट में, न तो किसी कार्रवाई में. ऐसा नहीं हो सकता कि हम किसी बहस में कमजोर पड़ें या अपनी आवाज को बुलंद करना चाहें तो हम राष्ट्रगान गाने लगें. और हमारे इस औचक राष्ट्रगान की पुकार पर कोई फौरन खड़ा न हो, तो उसे हम उलाहना दें, उस पर केस करें. राष्ट्रगान सिनेमा घरों में जब बजना शुरू हुआ था, तो भी यही बात सामने आई थी. राष्ट्र एक भावना है. इस भावना का सम्मान करें. और सुवेन्दु जी, आपने हमारे लोकतंत्र के सबसे बड़े इंसान को पवित्र करने का प्रयास किया है. वो इंसान जो हमारी और आपकी ऐसी सारी कोशिशों से ऊपर है. आपको समझ आता है कि आपका ये कदम कितना ज्यादा विरोधाभासी और कितना गलत है? उम्मीद है कि समझ आता होगा.