
हर साल हजारों लोग कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाते हैं.
...तो साहेबान, एक बात साफ कर दी जाए. और वो ये है कि मानसरोवर यात्रा के लिए केंद्र सरकार की ओर से कोई भी डायरेक्ट सब्सिडी नहीं दी जाती है. चूंकि कैलाश मानसरोवर तिब्बत में पड़ता है, इसलिए वहां तक तीर्थयात्रियों को पहुंचाने का जिम्मा केंद्र सरकार के पास होता है. केंद्र सरकार यात्रियों के लिए रहने, उन्हें खाना बनाने, ज़रूरत पर इलाज मुहैया करवाने और आने-जाने के अलावा रास्ते में सुरक्षा की सारी व्यवस्था करती है. लेकिन किसी यात्री को अपने घर से कैलाश मानसरोवर तक पहुंचने को जो खर्च लगता है, वो उसे खुद ही करना पड़ता है. कैलाश मानसरोवर तक पहुंचने के लिए दो रास्ते हैं. पहला रास्ता है लेपुलेख (उत्तराखंड) से जाने का, जिसपर 155431 रुपये का खर्च आता है. वहीं दूसरा रास्ता नाथू-ला का है, जिसपर कुल खर्च 176951 रुपये का है. केंद्र सरकार हर आदमी पर होने वाले इस खर्च का एक रुपया भी नहीं देती है. खुद केंद्र सरकार ने भी इस बात को माना है कि वो किसी इस यात्रा के लिए किसी को सब्सिडी नहीं देती है.

अगर इस बारे में किसी तरह की शंका है, तो इस लिंक
को क्लिक करके खुद ही देख लीजिए. साफ तौर पर लिखा है कि केंद्र नहीं, कुछ राज्य सरकारें अपने-अपने यात्रियों को कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने के लिए सब्सिडी देती है. इनमें सबसे ज्यादा सब्सिडी देने वाले राज्य उत्तर प्रदेश और राजस्थान हैं.
#उत्तर प्रदेश

2102 तक यूपी में कैलाश मानसरोवर यात्रा पर 25 हजार रुपये की सब्सिडी दी जाती थी. 2012 में जब सपा की सरकार में अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने सब्सिडी दोगुनी कर दी. अब यात्रियों को 50 हजार रुपये दिए जाने लगे. 2017 में जब योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने, तो उन्होंने भी कैलाश मानसरोवर यात्रा की सब्सिडी दो गुनी कर दी. अब कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने वाले हर शख्स को 1 लाख रुपये की सब्सिडी दी जाती है.
#मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश सरकार ने 2006 में इस योजना की शुरुआत की थी. सरकार की ओर से हर यात्री को 30,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है.
#छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में 2006-07 के वित्तीय वर्ष में कैलाश मानसरोवर की यात्रा करने वालों को सब्सिडी देने का प्रावधान था. उस वक्त ये राशि 25 हजार रुपये थी. 2013 में इसे बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दिया गया.
#गुजरात

गुजरात सरकार कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लिए 1998 से ही सब्सिडी दे रही है. सरकार की ओर से हर यात्री को 20,000 रुपये दिए जाते हैं. गुजरात में पिछले कई साल से सब्सिडी बढ़ाने की मांग हो रही है.
# कर्नाटक

कर्नाटक में 2012 में कैलाश मानसरोवर के यात्रियों के लिए सब्सिडी शुरू की गई थी. ये राशि 30,000 रुपये है. सब्सिडी राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी मिलती है. चार धाम यात्रा पर भी 20,000 रुपये की सब्सिडी दी जाती है.
#उत्तराखंड

उत्तराखंड सरकार भी कैलाश मानसरोवर यात्रियों को 25 हजार रुपये की सब्सिडी देती थी. 2018 में सरकार ने सब्सिडी में इजाफा किया है. अब हर यात्री को 30 हजार रुपये की सब्सिडी मिलती है.
# राजस्थान

राजस्थान में लंबे समय से कैलाश मानसरोवर यात्रियों के लिए सब्सिडी की मांग की जा रही थी. 2010 में जब अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे, तो उन्होंने मांगे मान ली थी. गहलोत के ही कार्यकाल में सब्सिडी की शुरुआत हुई, जो उस वक्त तक सबसे ज्यादा एक लाख रुपये थी. अब भीब एक लाख रुपये ही है.
#दिल्ली

दिल्ली में बम्पर जीत के बाद कहीं और नहीं चला है आम आदमी पार्टी का जादू.
दिल्ली सरकार अपने राज्य के लोगों को कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने के लिए 30,000 रुपये की सहायता देती है.
#हरियाणा

हरियाणा सरकार ने 2016 में कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान प्रति व्यक्ति 50 हजार रुपये की सब्सिडी की घोषणा की है. हालांकि इसमें एक शर्त रखी गई है. शर्त के मुताबिक अगर हरियाणा से कम से कम 50 लोग मानसरोवर की यात्रा पर जाते हैं, तो हर आदमी के खाते में 50-50 हजार रुपये की सब्सिडी भेजी जाएगी. पैसा उन्हीं यात्रियों को दिया जाएगा, जो विदेश मंत्रालय की ओर से आयोजित यात्रा में शामिल होंगे.
# तमिलनाडु

तमिलनाडु में कैलाश मानसरोवर की यात्र पर जाने के लिए राज्य सरकार की ओर से 50,000 रुपये दिए जाते हैं. इसके अलावा सरकार और भी कई धार्मिक यात्राओं के लिए सब्सिडी देती है.
अब तो साफ हो गया होगा कि कैलाश मानसरोवर यात्रा पर दी जा रही सब्सिडी का केंद्र सरकार से कोई लेना-देना नहीं है. अब अगर अपने देश के कुछ आदमी कहीं जाएंगे, तो उनकी सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी तो सरकार की ही होगी. वो जिम्मेदारी केंद्र सरकार निभाती है. हां अगर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर दी जा रही सब्सिडी को खत्म करवाना है, तो उसके लिए केंद्र सरकार से नहीं राज्य सरकारों से कहिए. इस सब्सिडी को खत्म करना राज्य के ही हाथ में है.
ये भी पढ़ें:
इस पहाड़ पर इस वक्त 'ऊं' की आकृति नज़र आना बुरी खबर क्यों है?
क्या और कितनी थी हज सब्सिडी जो अब खत्म हो गई है?
उस गे इंडियन आदमी की कहानी जो चोरी-छिपे हज पर गया
राम को हज से क्या दिक्कत हो सकती है?
अकेली औरत के हज जाने वाले नियम पर ओवैसी सही निकले और PM मोदी गलत
पैगंबर मुहम्मद के वक़्त का वो दूसरा पैगंबर, जो काबे की तरफ मुंह कर के नमाज़ पढ़ने को मूर्तिपूजा कहता था











