कहीं से पढ़े नहीं हैं लेकिन प्रैक्टिशनर हैं. डॉक्टरी की डिग्री नहीं है लेकिन दवाईयां देते हैं, इलाज करते हैं. साल 2020 में बिहार की चुनावी कवरेज के दौरान रोहतास में हमारे सरपंच को एक तथाकथित डॉक्टर संजय पासवान मिले थे. बड़े गर्व से खुद को एलौपेथ का प्रैक्टिशनर बता रहे थे. और कह रहे थे कि उनके जैसे बिहार में जगह-जगह छाए हुए हैं. संजय पासवान की ये बात सच है लेकिन पूरी तरह नहीं. क्योंकि उनके जैसे प्रैक्टिशनर या कहें तो झोलाछाप डॉक्टर सिर्फ बिहार में ही नहीं बल्कि देश के कोने-कोने में बसे हैं. यकीन करिए. अगर आप गूगल पर 'झोलाछाप डॉक्टर' या 'फेक डॉक्टर' जैसे कीवर्ड डालेंगे. तो रिजल्ट में आपको झोलाछाप डॉक्टर से संबंधित सैकड़ों कारनामें नज़र आ जाएंगे. देखें वीडियो.
'झोलाछाप डॉक्टरों' पर मोदी सरकार ने निकाला डाटा, 'नीम हकीमों' पर क्या कार्रवाई होगी?
क्या इन झोलाछाप चिकित्सकों ने प्रैक्टिस करने के लिए कोई व्यावसायिक डिग्री या डिप्लोमा हासिल किया है?
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