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असम के UCC बिल में बहुविवाह बैन, लिव-इन वालों के लिए क्या नियम है?

‘समान नागरिक संहिता विधेयक- 2026’ को असम की नई विधानसभा के पहले सत्र के तीसरे दिन पेश किया गया है. विपक्षी दलों कांग्रेस, रायजोर दल और तृणमूल कांग्रेस ने इस विधेयक की कड़ी आलोचना की है. उनका कहना है कि बिल को पेश करने से पहले इसके सभी स्टेकहोल्डर्स से संवाद करना चाहिए था.

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हिमंता सरकार ने असम विधानसभा में यूसीसी विधेयक पेश किया है. (फोटो- India Today)

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  • असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक-2026 पेश किया गया है, जिसमें एक से अधिक विवाह पर प्रतिबंध और लिव-इन रिलेशनशिप को रजिस्ट्रेशन का अनिवार्य करना शामिल है।
  • इस विधेयक को पेश करने का कारण विवाह और तलाक का पंजीकरण अनिवार्य करने और बहुविवाह को रोकने समेत बच्चों और संपत्ति के अधिकारों को कानूनी मान्यता देना है।
  • विधेयक पास होने पर असम समान नागरिक संहिता लागू करने वाला तीसरा राज्य बनेगा और वहां विवाह, तलाक व लिव-इन रिश्तों का कानूनी नियंत्रण सुनिश्चित होगा।

असम में एक से ज्यादा विवाह पर प्रतिबंध लगाने की तैयारी है. इसके अलावा, लिव-इन में रहने वाले कपल्स को रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा. हर तरह के विवाह और तलाक का भी पंजीकरण किया जाएगा. ये सारे नियम समान नागरिक संहिता विधेयक के रूप में असम की विधानसभा में पेश किए गए हैं. हिमंता बिस्वा सरमा सरकार के संसदीय कार्यमंत्री अतुल बोरा ने इसे सदन के पटल पर रखा है, जिस पर इस हफ्ते के आखिर में चर्चा होगी. 

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, ‘समान नागरिक संहिता विधेयक- 2026’ को असम की नई विधानसभा के पहले सत्र के तीसरे दिन पेश किया गया है. विपक्षी दलों कांग्रेस, रायजोर दल और तृणमूल कांग्रेस ने इस विधेयक की कड़ी आलोचना की है. उनका कहना है कि बिल को पेश करने से पहले इसके सभी स्टेकहोल्डर्स से संवाद करना चाहिए था. 

विधेयक में क्या है?

असम सरकार के इस विधेयक में कहा गया है कि इसका मकसद शादी के लिए मानक शर्तें तय करना है. जैसे प्रदेश में विवाह करने के लिए लड़के की उम्र कम से कम से 21 साल और लड़की की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए. ये बिल किसी व्यक्ति को एक से ज्यादा शादी करने से भी रोकता है. यानी असम में बहुविवाह (पॉलीगामी) को यूसीसी बिल में प्रतिबंधित किया गया है. 

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इस विधेयक के पास होने के बाद असम में हर तरह के विवाह और तलाक का रजिस्ट्रेशन जरूरी हो जाएगा. इसके अलावा लिव-इन रिलेशनशिप को भी कानूनी मान्यता मिलेगी. बिना शादी के साथ रहने वाले कपल्स को भी रजिस्ट्रेशन कराना होगा. इसका मकसद ऐसे कपल्स से पैदा होने वाले बच्चों के अधिकारों को कानूनी मान्यता देना और उनकी सुरक्षा करना है.  

विधेयक में यह भी कहा गया है कि इसका मकसद विरासत के लिए ‘एक तरह का नियम’ बनाना भी है. इससे प्रदेश में रहने वाले लोगों के लिए संपत्ति का ट्रांसफर सही तरीके से हो सकेगा. 

UCC लागू करने वाला तीसरा राज्य

बता दें कि असम में समान नागरिक संहिता को अभी विधानसभा में पेश किया गया है. वहां इस पर बहस होगी और फिर इसे पास कराने के लिए जरूरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी. अगर ये बिल पास हो जाता है तो उत्तराखंड और गुजरात के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला असम देश का तीसरा राज्य बन जाएगा.

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