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थाने में RSS प्रचारक से मारपीट पर NHRC सख्त, राजस्थान के चीफ सेक्रेटरी-DGP को भेजा नोटिस

जयपुर ग्रामीण के नरैना थाने में RSS प्रचारक कृष्ण अवतार के साथ कथित मारपीट के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है. NHRC ने राजस्थान के मुख्य सचिव और DGP को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में रिपोर्ट मांगी है.

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थाने में शिकायत देते संघ के पदाधिकारी (COURTSEY- India Today)

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  • जयपुर के नरेना थाने में RSS प्रचारक कृष्ण अवतार के साथ पुलिस हिरासत में कथित मारपीट और अमानवीय व्यवहार का मामला सामने आया है, जिसमें छह पुलिसकर्मी सस्पेंड हुए हैं।
  • कृष्ण अवतार का कहना है कि उन्हें बिना स्पष्ट कानूनी वजह हिरासत में लिया गया और थाने में उनके साथ खतरनाक मारपीट व आपत्तिजनक व्यवहार किया गया है, जिसके बाद NHRC ने मामले की जांच शुरू की है।
  • इस मामले में NHRC और राज्य मानवाधिकार आयोग ने रिपोर्ट मांगी है और 16 अक्टूबर को अगली सुनवाई होगी, घटना के बाद कई नेताओं व कार्यकर्ताओं ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

जयपुर में एक RSS प्रचारक कृष्ण अवतार के साथ पुलिस हिरासत में मारपीट का मामला सामने आया है. इस कथित मारपीट और अमानवीय व्यवहार के मामले में SHO समेत 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड हो चुके हैं. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी मामले का संज्ञान लिया है. NHRC ने राजस्थान के मुख्य सचिव और DGP को नोटिस जारी कर दो हफ्ते में डिटेल रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है. आयोग ने पूछा है कि कृष्ण अवतार को किन परिस्थितियों में हिरासत में लिया गया? पुलिस स्टेशन में उनके साथ क्या हुआ और इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई है? 

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आयोग ने ये भी पूछा है कि मामले से जुड़े CCTV फुटेज, पुलिस रिकॉर्ड और मेडिकल डॉक्युमेंट्स सेफली रखे गए हैं या नहीं. NHRC ने कहा है कि अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो ये कस्टडी में हिंसा का बेहद गंभीर मामला होगा. आयोग के मुताबिक, पुलिस हिरासत में किसी को पीटना, जबरन कपड़े उतरवाना, बेइज्जत करना या जानबूझकर चोट पहुंचाना उसके Right To Life, Personal Liberty और Dignity का उलंघन है. संविधान का Article 21 इन अधिकारों की रक्षा करता है. 

क्या है पूरी कहानी?

ये मामला जयपुर ग्रामीण के नरेना थाने का है. RSS प्रचारक कृष्ण अवतार का आरोप है कि 10 अक्टूबर की रात उन्हें पुलिस थाने ले जाया गया. शिकायत के मुताबिक, उन्हें हिरासत में लेने की कोई साफ कानूनी वजह नहीं बताई गई. आरोप है कि थाने के अंदर उनके साथ मारपीट की गई. उन्हें कथित तौर पर कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया गया और उनके प्राइवेट पार्ट्स पर भी हमला किया गया.

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शिकायत में ये भी आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने कृष्ण अवतार और उनके परिवार को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं. उन्होंने खुद के RSS प्रचारक होने की बात भी बताई थी. पुलिस ने इसके बाद भी बदसलूकी की. हालांकि, ये सभी शिकायत में लगाए गए आरोप हैं और इनकी पुष्टि अभी नहीं हुई है. जांच के बाद ही पूरी तस्वीर साफ होगी. घटना के बाद कृष्ण अवतार की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई. उन्हें जयपुर के SMS अस्पताल में भर्ती कराया गया.

SHO समेत 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड

मामला सामने आने के बाद जयपुर ग्रामीण के एसपी हनुमान सहाय ने लोगों को कार्रवाई का आश्वासन दिया. इस मामले में नरेना थाने के SHO उमराव सिंह समेत 6 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर द‍िया गया है. वहीं, मामले में कुल सात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. पुलिसकर्मियों पर चोट पहुंचाने, गलत तरीके से रोकने और हिरासत में रखने, जानबूझकर अपमान करने और धमकी देने जैसी धाराओं में केस दर्ज किया गया है.

लेकिन मामला यहीं नहीं रुका. घटना के विरोध में RSS कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने नरेना पुलिस स्टेशन का घेराव किया. साथ ही BJP के पूर्व विधायक रामलाल शर्मा समेत कई नेताओं ने भी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. पूर्व विधायक निर्मल कुमावत और भाजपा जयपुर देहात दक्षिण के जिलाध्यक्ष राजेश गुर्जर तो धरने पर बैठ गए.

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मानवाधिकार आयोग एक्टिव

अब इस मामले में राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग यानी RSHRC भी एक्टिव हो चुका है. राज्य मानवाधिकार आयोग ने मामले पर स्वतः संज्ञान लिया है. एनएचआरसी ने पुलिस से CCTV फुटेज, थाने के रिकॉर्ड और कृष्ण अवतार की मेडिकल रिपोर्ट मांगी है. आयोग ने जयपुर रेंज के IG और जयपुर ग्रामीण SP से रिपोर्ट तलब की है. साथ ही, जांच SP रैंक के अधिकारी से कराने का निर्देश दिया है. इस मामले में अगली सुनवाई 16 अक्टूबर को होनी है.

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अब यहां कई बड़े सवाल हैं. जैसे कृष्ण अवतार को आखिर पुलिस ने किस आधार पर हिरासत में लिया था? सवाल यह भी है कि थाने के अंदर उस रात असल में क्या हुआ था? क्या CCTV फुटेज से लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है? क्या मेडिकल रिपोर्ट भी इन आरोपों से मेल खाती है?  और सबसे बड़ा सवाल, अगर पुलिस हिरासत में मारपीट और अमानवीय व्यवहार के आरोप सही साबित होते हैं, तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर आगे क्या कार्रवाई होगी? 

अब NHRC और राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग मामले की जांच कर रहे हैं. जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि उस रात नरेना थाने में आखिर हुआ क्या था.

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