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परिवार ने 80 साल के बुजुर्ग का शव 4 साल तक फ्रीजर में रखा, वजह जान सिर पीट लेंगे!

मुंबई में 80 साल के एक बुज़ुर्ग का शव चार साल तक फ्रीज़र में परिवार ने छुपाकर रखा. पुलिस ने अब शव बरामद कर लिया है. जानिए भारत के कानून के मुताबिक, किसी शव को सुरक्षित रखने और अंतिम के बारे में कानूनी प्रावधान क्या है.

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मुंबई में परिवार ने एक 80 साल के शख्स का शव चार साल तक फ्रीजर में रखा. (courtesy: AI-generated)

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  • मुंबई के मलाड ईस्ट के कुरार इलाके में पुलिस ने 80 साल के बुज़ुर्ग का चार साल पुराना शव एक क्लिनिक के फ्रीजर में बरामद किया, जिसे परिवार ने क्रायोप्रिजर्वेशन की उम्मीद से सुरक्षित रखा था।
  • परिवार शव को अमेरिका के क्रायोनिक्स सेंटर ले जाना चाहता था ताकि क्रायोप्रिजर्वेशन तकनीक से भविष्य में फिर से जीवित करने की संभावना बनी रहे, जबकि भारत में इस प्रक्रिया का कोई कानूनी ढांचा नहीं है।
  • पुलिस ने शव बरामद कर जांच शुरू कर दी है क्योंकि शव छुपाने की वजह से मामला क़ानूनी रूप से जांच का विषय बन गया है, और शव अभी भी उसी क्लिनिक में सुरक्षित रखा गया है।

मुंबई के मलाड ईस्ट के कुरार इलाके में पुलिस ने 80 साल के एक बुज़ुर्ग व्यक्ति का शव बरामद किया है. मौत चार साल पहले यानी साल 2022 में हो चुकी थी. पता लगा है कि घरवालों ने शव जानबूझकर फ्रीजर में सुरक्षित रखा हुआ था. परिवार का मानना था कि शव को फ्रीजर में रखने से बुजुर्ग फिर से जिंदा होकर लौट आएंगे. 

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फ्रीजर में मिला शव

आजतक से जुड़े मुस्तफा शेख की रिपोर्ट के मुताबिक, परिवार ने शव को मलाड इलाके के एक क्लिनिक के फ्रीजर में छुपाकर रखा हुआ था. पुलिस के मुताबिक, परिवार उनकी मौत से बहुत दुखी था और उनके शव को अमेरिका ले जाना चाहता था. परिवार की इच्छा थी कि शव को क्रायोप्रिजर्वेशन (Cryopreservation) तकनीक की मदद से ज्यादा से ज्यादा समय के लिए सुरक्षित रखा जा सके. तकनीक डेवलप होने के बाद उन्हें फिर से ज़िंदा किया जा सके. इसी वजह से उन्होंने अभी तक अंतिम संस्कार नहीं किया था.    

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस बात की भनक पुलिस को एक खबरी के ज़रिए लगी. इसके बाद छापेमारी के दौरान पुलिस ने शव बरामद किया. पुलिस का कहना है कि परिवार शव को अमेरिका के क्रायोनिक्स सेंटर ले जाने वाली थी. मृतक और उनके घरवालों की पहचान गुप्त रखी गई है. 

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विज्ञान की दुनिया में सेल्स, टिशूज और भ्रूण का क्रायोप्रिजर्वेशन एक स्थापित प्रक्रिया है. लेकिन इंसानी शरीर की क्रायोनिक्स तकनीक अभी भी पूरी तरह एक्सपेरिमेंटल है. 

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शव प्रिज़र्व करना लीगल?

रिपोर्ट के मुताबिक, लीगल एक्सपर्ट एडवोकेट स्वप्ना कोड ने शवों को प्रिज़र्व करने को लेकर नियम कानून बताए हैं. भारत में इंसानी शरीरों को लंबे समय तक फ्रीज़ करने या क्रायोजेनिक तरीके से सुरक्षित रखने (क्रायोप्रिजर्वेशन) के लिए कोई व्यवस्थित कानूनी प्रावधान नहीं है. फिलहाल इस पर कोई नियम लागू नहीं होता और यह एक अस्पष्ट स्थिति है. लेकिन ये मामला संविधान के आर्टिकल 21 से कहीं न कहीं टकराता है. 

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आर्टिकल 21 माने राइट टू लाइफ एंड डिग्निटी. सुप्रीम कोर्ट ने एक जजमेंट में कहा था कि ये मौलिक अधिकार शवों पर भी लागू होता है. इसका मतलब है कि शव का सम्मान होना चाहिए और उचित रीति-रिवाजों के अनुसार उसका निपटान किया जाना चाहिए. मगर यहां भी एक पेंच है. कुछ वकील मानते हैं कि अगर कोई शख्स अपनी मर्ज़ी से क्रायोप्रिजर्वेशन कराना चाहे तो इसे मंजूरी देने के लिए कोई नियम नहीं हैं. 

आगे क्या होगा?

यहां एक अंतर और समझ लीजिए. प्राइवेट तरीके से शव को फ्रीज करना और क्रायोनिक्स के ज़रिए लम्बे समय तक फ्रीज करना, दो अलग अलग चीज़ें हैं. साल 2014 का एक मामला देखिए. आध्यात्मिक गुरु आशुतोष महाराज को क्लिनिकली मृत घोषित कर दिया गया था. पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने उनके शिष्यों को शव को अनिश्चित काल तक एक कमर्शियल फ्रीज़र में सुरक्षित रखने की इजाज़त दे दी. कोर्ट ने शिष्यों की धार्मिक आज़ादी को तरजीह दी और उनके इस दावे को प्राथमिकता दी कि वो गहरी ध्यान-अवस्था (समाधि) में थे.  

लेकिन मुंबई का ये मामला पुलिस जांच के अंतर्गत आता है. क्यों? क्योंकि अगर मौत छुपाने के लिए शव फ्रीजर में रखा गया है और इसके तहत किसी फ्रॉड को अंजाम दिया गया है तो मामला लीगल हो जाता है. शव फिलहाल उसी क्लिनिक में मौजूद है. वहां पुलिस बल भी तैनात किया गया है.  

वीडियो: Sejal Pawar के खिलाफ क्या एक्शन हुआ? शवों के प्राइवेट पार्ट का मज़ाक उड़ा रही थी

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