NEET पेपर लीक की घटना ने राजधानी दिल्ली समेत पूरे देश में उथल-पुथल मचा रखी है. छात्रों के भीषण आंदोलन के बाद हर तबके से लोगों के बयान आए. प्रोटेस्ट का सपोर्ट भी किया गया. विरोध के भी स्वर उठे. लेकिन, जनता की एक खासियत होती है. ऐसे मौकों पर बोलने के सिलसिले में वह हर किसी की आवाज चाहता है. वो जो पहले बहुत से मुद्दों पर बोलते थे, अगर ऐसे बड़े आंदोलन पर चुप हो जाएं. या कम बोलें तो वह लोगों के सवालों के घेरे में आ जाते हैं. विकास दिव्यकीर्ति उन्हीं में से एक हैं.
विकास दिव्यकीर्ति ने बताया मोदी सरकार धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा क्यों नहीं ले रही
NEET पेपर लीक और छात्रों के आंदोलन पर लंबे समय बाद विकास दिव्यकीर्ति ने अपनी चुप्पी तोड़ी है. उन्होंने कहा कि सरकार को पहले ही धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले लेना चाहिए था और छात्रों की बात सुनने से सरकार की छवि मजबूत होती.

शिक्षा से जुड़े हैं. शिक्षाविद् कहे जाते हैं. अफसर बनाने वाले एक संस्थान में बड़े पद पर हैं. लेकिन पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों के आंदोलन को लेकर उनकी मुखरता पर लगातार सवाल उठ रहे थे. अब उन्होंने इस चुप्पी तोड़ी है. उनकी किसी कोचिंग क्लास का एक वीडियो सामने आया है. इसमें वह कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन की पड़ताल करते दिख रहे हैं.
वीडियो में विकास दिव्यकीर्ति ने बताया कि नीट पेपर लीक होने के बाद कुछ बच्चों की आत्महत्या ने ढेर सारी बेचैनियों को एकजुट कर दिया. इस वजह से जंतर-मंतर पर केवल नीट वाले बच्चे नहीं आए. वो सब लोग आए जो समाज में अलग-अलग वजहों से नाराज थे. उन सबकी नाराजगी को एक मंच मिल गया. और इन सबकी शुरुआत एक बयान से हुई. वो बयान जिससे बचा भी जा सकता था.
दिव्यकीर्ति का इशारा भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के उस बयान की तरफ था, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर बेरोजगार युवाओं को कॉकरोच बताया था. इस टिप्पणी के बाद ही सोशल मीडिया पर कॉकरोच जनता पार्टी का जन्म हुआ, जो आज नीट वाले आंदोलन के पीछे की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई है.
ये भी पढ़ेंः पीएम मोदी के लेट नाइट प्रॉमिस के बाद जो बिल आया वो पेपर लीक को रोक पाएगा?
'सीजेआई को सावधान रहना चाहिए'विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि अगर सीजेआई के नाराजगी में दिए एक बयान से इतनी बड़ी पार्टी बन गई तो उन्हें बहुत केयरफुल (सावधान) हो जाना चाहिए था कि ऐसी गलती फिर न हो. उन्होंने आगे कहा कि सरकार ने बहुत कोशिश की कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से मामला हट जाए, लेकिन छात्र अड़ गए हैं कि वो इस्तीफा लेकर ही मानेंगे.
लेकिन सरकार के सामने दुविधा क्या है?
विकास दिव्यकीर्ति ने ये भी समझाया कि सरकार धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्यों नहीं ले पा रही है? उन्होंने कहा,
धर्मेंद्र प्रधान मोदी सरकार के लिए बहुत जरूरी मंत्री हैं. वो ओबीसी का बड़ा चेहरा हैं. ओडिशा में इतने साल के बाद बीजेपी का पहला मुख्यमंत्री बना, इसमें उनकी बड़ी भूमिका रही. वो सब बातें एक तरफ हैं. शिक्षा मंत्री के तौर पर बाकी मामलों में शायद उनका काम बाकी पहले के मंत्रियों से बेहतर है, यह भी एक पक्ष सरकार के पास हो सकता है. लेकिन अब सवाल यह रहा नहीं है.
दिव्यकीर्ति ने कहा कि सरकार के लिए अब ये साख की लड़ाई हो गई है. जो सरकारें बहुत कॉन्फिडेंस में होती हैं, वह आमतौर पर इस्तीफे देती नहीं हैं. क्योंकि इससे उनका इकबाल कमजोर होता है. इससे एक मैसेज जाता है कि ये सरकार झुकाई जा सकती है. बस एक बढ़िया सा मोर्चा बनाओ. आंदोलन करो. सरकार झुक जाएगी. लोगों में ये संदेश जाने लगता है.
उन्होंने सलाह देने के अंदाज में कहा कि ये सब होने से पहले ही मंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए था. पहले भी ऐसा हुआ है. रेल हादसा होता था तो रेल मंत्री इस्तीफा दे देते थे. पहले हमारे देश में ऐसी (सियासी) परंपराएं रही हैं. लेकिन अब ये मुद्दा साख का सवाल हो गया है. अब देखना होगा कि सरकार आगे क्या करती है. हो सकता है 8-10 दिन में शायद इस पर कुछ फैसला निकले.
दिव्यकीर्ति ने सरकार को एक सलाह भी दी. कहा कि ‘इमोशनल इंटेलिजेंस’ में एक फार्मूला यह भी होता है कि बड़े युद्ध जीतने के लिए छोटी-मोटी लड़ाइयां हार जाना ठीक रहता है. अगर कोई छोटी-मोटी लड़ाई इतनी बड़ी हो जाए कि उससे सब कुछ खत्म हो सकता हो तो कभी-कभी अपमान का घूंट पीकर या यह मान कर कि आखिर बच्चे तो सारे देश के बच्चे हैं, एक-आध स्टेप पीछे लेना कोई बहुत बुरी बात नहीं है. उन्होंने कहा कि इससे देश के बच्चों में बड़ा अच्छा मैसेज भी जाएगा कि सरकार हमारी बात सुनती है.
वीडियो: CJP प्रदर्शन के बीच कनॉट प्लेस बंद, क्या जंतर-मंतर पर होगी बड़ी कार्रवाई?













