भारत के नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) अजीत डोभाल तब एक यंग IPS ऑफिसर थे. नए-नए इंटेलिजेंस में आए थे. तब चीन बॉर्डर के पास एक मिशन के दौरान कुछ गड़बड़ हो गई. इससे अजीत डोभाल इतने स्ट्रेस में आ गए कि उन्हें लगा कि उनका करियर खत्म हो सकता है. लेकिन हुआ इसका उल्टा. इस एक्सपीरियंस ने उन्हें जिंदगी का ऐसा सबक सिखाया, जिसे वे आज तक नहीं भूले. डोभाल उस घटना को अपनी सफलता का एक कारण भी मानते हैं.
किस बात से डर गए थे अजीत डोभाल? इस घटना के बाद NSA को लगा था खत्म हो गया करियर!
देश के मौजूदा NSA अजीत डोभाल ने अपने लंबे करियर में कई साहसिक मिशन अंजाम दिए हैं. हालांकि, उनके करियर में एक ऐसा दौर भी आया था जब वह काफी डर गए थे और उन्हें लगा था कि उनका करियर खत्म हो सकता है. जानें क्या है वह किस्सा.

आमतौर पर कम बोलने वाले अजीत डोभाल ने अपने करियर के शुरुआती दौर का एक्सपीरियंस शेयर किया था. मौका था इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रूड़की (IIT Roorkee) के दीक्षांत समारोह का. शनिवार, 19 सितंबर को उन्होंने IIT स्टूडेंट्स के सामने अपने करियर का वह किस्सा सुनाया, जब उन्हें बहुत डर लगा था.
अजीत डोभाल के साथ सिक्किम में क्या हुआ?अजीत डोभाल उम्र के 20वें दशक में चल रहे थे. उनकी तैनाती सिक्किम में थी. उस समय सिक्किम भारत का हिस्सा नहीं था. वहां राजशाही थी. सिक्किम को भारत में मिलाने का प्रोसेस चल रहा था. अजीत डोभाल को सिक्किम में चीन बॉर्डर पर चीनी सेना (पीपुल्स लिबरेशन आर्मी - PLA), चीन के रिवाज और उसके सिस्टम के बारे में जानकारी इकट्ठा करने की जिम्मेदारी दी गई थी.
NSA अजीत डोभाल कहते हैं,
"एक बार हमने एक इंटेलिजेंस मिशन किसी ऑपरेशन पर बॉर्डर एरिया में भेजा. उसे 6 दिन के बाद वापस आना था... 5 दिन हो गए, वे लोग नहीं आए. 6 दिन हो गए. फिर 10 दिन हो गए. अब मेरे लिए यह बहुत बड़ी चिंता की बात थी. ना सिर्फ प्रोफेशनली बल्कि इंसानी तौर पर भी कि इतने सारे लोग हैं, जिनके बारे में हम यह भी नहीं जानते कि वे जिंदा हैं या नहीं. उनके साथ क्या हुआ है? हमें किसी एवलांच आने की भी कोई रिपोर्ट नहीं मिली."
उन्होंने आगे बताया,
"उनके यहां से तो कोई खबर नहीं आई, लेकिन मेरे पास हेडक्वार्टर से टेलीफोन कॉल आ गया. मेरे बॉस ने पूछा कि क्या तुमने कुछ लोगों को बॉर्डर के पार भेजा है. मैंने कहा हां सर भेजा तो थे. उन्होंने पूछा कि वे कहां हैं? मैंने कहा कि मुझे नहीं पता, लेकिन वे वापस आ रहे होंगे. उन्हें 5-6 दिन में वापस आ जाना था, लेकिन 10-11 दिन बीत चुके थे."
अजीत डोभाल को उनके बॉस ने बताया कि जो लोग उन्होंने सीमा पार भेजे, उन्हें चीन ने पकड़ लिया है. चीनियों ने उनसे पूछताछ की. हालांकि, बाद में चीन ने उन्हें छोड़ दिया. उनकी वापसी के लिए जरूर कुछ सीनियर लेवल पर कोई बातचीत या डील या नेगोशिएशन हुई होगी.
चीन की हिरासत से छूटे एजेंट्स की हालत बयां करते हुए अजीत डोभाल बोले,
"वे पूरी तरह टूटे-फूटे होकर लौटे. एक जांच बैठी. मुझे पता था कि यह मेरे करियर का अंत है. मुझे लगा कि ठीक है. मैं अभी अपनी उम्र के बीसवें दशक में था, तो झेल सकता था. मैं एक नया करियर शुरू कर सकता था. लेकिन यह बहुत प्रोफेशनलिज्म की बात है. लेकिन जो कुछ हुआ, वो बहुत अनप्रोफेशनल था."
जांच में अजीत डोभाल को क्लीन चिट मिल गई, क्योंकि हेडक्वार्टर से उन्हें जो मैप और स्केच मिले थे, उनमें खामी थी. इस तरह डोभाल बच गए. उन्होंने कहा कि मेरी गलती नहीं मानी गई, तो हो सकता है कि शायद मैंने सबकुछ सही किया होगा.
भले ही मिशन में विफलता को लेकर अजीत डोभाल को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया. लेकिन उन्हें जिंदगी का बड़ा सबक जरूर मिला. उन्होंने कहा कि इस घटना से बहुत दुखी रहते थे. अजीत डोभाल ने उस दौर को याद करते हुए कहा, "मैं बहुत दुखी था. यह जिंदगी का ऐसा दौर था जब आप बहुत उदास महसूस करते हैं."
शेरपा की तीन बातों ने बड़ी सीख दीहालांकि, इंटेलिजेंस ब्यूरो में उनके साथ काम करने वाले एक तिब्बती शेरपा की एक अनोखी सलाह ने उन्हें इस घटना से निपटने में मदद की. शेरपा ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे, लेकिन उन्हें बर्फीले पहाड़ों में अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा गुजारा था. उन्हें पहाड़ी रास्तों की गहरी समझ थी.
शेरपा ने अजीत डोभाल से कहा कि यह सब मैप पढ़ने का चक्कर है. कुछ लोग मैप ढंग से पढ़ते हैं, तो कुछ गलत पढ़ लेते हैं. डोभाल ने शेरपा का नाम तो नहीं बताया लेकिन उनसे सीखी तीन बातें बताईं-
पहली- आप कहां पर हो?
दूसरी- आपको कहां जाना है?
तीसरी- जहां जाना है, उसका रूट क्या होगा? अगर हो सके, तो वापस आने का भी रास्ता पता हो.
भारत के तेज-तर्रार जासूसअजीत डोभाल के मुताबिक, शेरपा की सीख ने जिंदगी को लेकर उनका नजरिया बदल दिया. इससे उन्हें जिंदगी में आगे बढ़ने में मदद मिली. पता चला कि लाइफ में क्या करना है और कैसे करना है. अजीत डोभाल का नाम भारत के सबसे जाने-माने, तेज-तर्रार और काबिल जासूसों में शामिल है.
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2014 से नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (NSA) के तौर पर वे अहम नेशनल-सिक्योरिटी ऑपरेशन्स में सबसे आगे रहे हैं. इनमें पाकिस्तान में 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 की बालाकोट एयरस्ट्राइक और 2025 में ऑपरेशन सिंदूर शामिल हैं.
वीडियो: अजीत डोभाल ने Gen-z को क्या समझाया?









