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आसमान नहीं गिर जाएगा... मदरसों में वंदे मातरम के 6 छंद गाने के मामले में HC की टिप्पणी

Calcutta High Court ने पूछा कि क्या मदरसों में वंदे मातरम गाने को जरूरी बनाने वाले सर्कुलर को ना मानने वालों के खिलाफ कोई एक्शन लिया गया है. पिटीशनर्स के सीनियर वकील ने जवाब दिया, "उन्होंने अभी तक इसे लागू करने की हिम्मत नहीं की है."

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कलकत्ता हाई कोर्ट में मदरसों में वंदे मातरम गाने के सरकारी सर्कुलर पर बहस हुई. (ITG)

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  • कलकत्ता हाई कोर्ट ने मदरसों में वंदे मातरम गाना अनिवार्य करने के सरकारी नोटिफिकेशन पर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की कि आसमान नहीं गिर जाएगा।
  • पिटीशनर्स ने दलील दी कि राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम को मदरसों में पढ़ाने या गाने के लिए जबरदस्ती नहीं किया जा सकता और इसे राष्ट्रीय गीत की तुलना में भारत के राष्ट्रगान से अलग माना जाना चाहिए।
  • कोर्ट ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगते हुए सुनवाई टाल दी है और पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से हलफनामा देकर आगे की कार्रवाई के निर्देश लेने का आग्रह किया गया है।

'आसमान नहीं गिर जाएगा'. कलकत्ता हाई कोर्ट ने मदरसों में वंदे मातरम गाना जरूरी करने के सरकारी नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली याचिका पर यह टिप्पणी की. मंगलवार, 4 अगस्त को कोर्ट ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई की. इस बीच एक्टिंग चीफ जस्टिस (ACJ) तपब्रत चक्रवर्ती ने अपने कॉमेंट को मजबूती देने के लिए क्रिश्चियन स्कूलों का भी उदाहरण दिया.

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सीनियर एडवोकेट विकास रंजन भट्टाचार्य ने यह PIL दाखिल की थी. एक्टिंग चीफ जस्टिस तपब्रत चक्रवर्ती और जस्टिस पार्थ सारथी सेन ने इस पर सुनवाई की. लीगल वेबसाइट लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, मामले में उठी चिंताओं पर बात करते हुए ACJ तपब्रत चक्रवर्ती ने कहा,

"आसमान नहीं गिर जाएगा... आज अगर मुझसे कोई ऐसा कोट बोलने के लिए कहा जाए जो मेरे धर्म में नहीं है... तो क्या होगा? क्या मैं उस धर्म का नहीं रहने वाला इंसान बन जाऊंगा?"

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मदरसों में वंदे मातरम

कोर्ट ने ऐसे एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन का जिक्र किया, जो दूसरे धार्मिक समुदाय चलाते हैं. वहां के तरीकों की तुलना करते हुए कोर्ट ने कहा,

“हजारों क्रिश्चियन स्कूल हैं जहां सभी स्टूडेंट्स को ईश्वर से प्रार्थना करने के लिए कहा जाता है. तो क्या किसी खास समुदाय के स्टूडेंट्स पूछते हैं कि उन्हें क्रिश्चियन धर्म की कुछ खास चीजें गाने के लिए क्यों कहा जा रहा है?”

पिटीशनर्स के सीनियर वकील ने दलील दी कि वंदे मातरम को राष्ट्रीय गीत के तौर पर अपनाया गया था. इसे मदरसों में पढ़ने वाले बच्चों पर नहीं थोपा जा सकता. तर्क दिया गया, "राष्ट्रीय गीत की तुलना में राष्ट्रगान का स्थान ऊंचा है."

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इस पर एक्टिंग चीफ जस्टिस ने सवाल किया. पूछा कि क्या मदरसों में वंदे मातरम गाने को जरूरी बनाने वाले सर्कुलर को ना मानने वालों के खिलाफ कोई एक्शन लिया गया है. पिटीशनर्स के सीनियर वकील ने जवाब दिया, "उन्होंने अभी तक इसे लागू करने की हिम्मत नहीं की है."

बंगाल सरकार ने क्या कहा?

पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) धीरज कुमार त्रिवेदी पेश हुए. उन्होंने कोर्ट से अगली तारीख देने की गुजारिश की, ताकि वे रिपोर्ट के रूप में हलफनामे के जरिए निर्देश ले सकें. उन्होंने आगे कहा कि याचिकाकर्ता केवल आशंका के आधार पर रोक (इंजंक्शन) की मांग नहीं कर सकते. कोर्ट ने राज्य सरकार की रिपोर्ट दाखिल होने के बाद मामले की सुनवाई टाल दी.

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