दिल्ली के जंतर-मंतर पर पेपर लीक और एजुकेशन सिस्टम के खिलाफ एक आंदोलन चल रहा है. और इस बीच दो और पेपर लीक हो गए हैं. उत्तराखंड प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी (UTU) में दो पेपर लीक हुए हैं. और आरोप यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर पर आया है. दोनों पेपर कैंसिल कर दिए गए हैं और अब री-एग्ज़ाम अगस्त के तीसरे हफ्ते में कराया जाएगा.
CJP प्रोटेस्ट के बीच दो पेपर लीक, सेट करने वाले टीचर ने वॉट्सऐप पर भेजे
Uttarakhand paper leak: उत्तराखंड प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी (UTU) में दो पेपर लीक हुए हैं. और आरोप यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर पर आया है. मामला खुलने के बाद दोनों एग्जाम कैंसिल कर दिए गए हैं और जांच शुरू हो गई है.

इंडिया टुडे से जुड़े अंकित शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, बीटेक थर्ड ईयर के सेमेस्टर एग्जाम 7 जुलाई को खत्म हो गए थे. लेकिन बाद में जानकारी मिली कि एग्ज़ाम से पहले ही वॉट्सऐप ग्रुप पर दो विषयों के पेपर शेयर किए जा रहे थे. इन दो विषयों के नाम हैं- Machine Learning for Internet of Things और Electromagnetic Field Theory.
प्रोफेसर ने लीक किया पेपर?रिपोर्ट के मुताबिक, आशीष कुमार शिवालिक नाम के प्रोफेसर पेपर सेटर के तौर पर काम करते हैं. आशीष पर आरोप है कि इन्होंने परीक्षा से मिलता-जुलता पेपर कॉलेज के वॉट्सऐप ग्रुप में कुछ स्टूडेंट्स के साथ शेयर किया था. ये जानकारी जैसे ही सामने आई, दोनों पेपर कैंसिल कर दिए गए. और आशीष को अरेस्ट कर लिया गया.
यूनिवर्सिटी की कुलपति तृप्ता ठाकुर ने बताया कि आरोपी प्रोफेसर को परीक्षा संबंधित कामों से 7 साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है. उन्होंने कहा,
‘एक टीचर ने अपने 22 बच्चों के लिए अपने सिद्धांतों के साथ समझौता किया. कहीं न कहीं कॉलेज भी ज़िम्मेदार है क्योंकि वो किस तरह के टीचर रखते हैं, ये मायने रखता है. हम इसकी निंदा करते हैं.’
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देहरादून के एसपी सिटी प्रमोद कुमार ने बताया कि पेपर लीक मामले में एक्शन लिया गया है. और जांच के लिए दो टीमें बनाई गई हैं. उन्होंने कहा,
‘जो दो पेपर सेट किए गए थे उनके प्रश्न पत्र पहले से ही व्हाट्सऐप पर शेयर होने लगे थे. जांच के लिए UTU ने भी दो टीमें बनाई थीं. तहरीर के आधार पर केस रजिस्टर कर लिया गया है.’
23 जुलाई को पेपर लीक के खिलाफ NSUI के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया था. NSUI के जिलाध्यक्ष हिमांशु ने आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी में पहले भी कई धांधलियां हो चुकी हैं. लेकिन फिर भी सरकार ने कोई एक्शन नहीं लिया.
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