उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर ने जो ‘रायता’ फैलाया है वो अधिकारियों से समेटे नहीं बन रहा है. ‘राम ने यादव को मारा’, ‘मूर्ख काली देवी’ वाले नाम सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए. जिसके बाद चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए. लेकिन इन गड़बड़ियों को केवल ‘सॉफ्टवेयर ग्लिच’ तक सीमित नहीं रखा गया. नामों में गड़बड़ियों को लेकर जातिवादी होने के आरोप भी लगे.
'राम ने सिर्फ यादव नहीं, शर्मा को भी मारा', चुनाव आयोग का जवाब सुन माथा पकड़ लेंगे
उत्तर प्रदेश में चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर की गड़बड़ी की वजह से अजीब स्थिति बन गई है. विपक्षी दलों के आरोप पर उत्तर प्रदेश के चीफ इलेक्शन ऑफिसर (CEO) ने सफाई दी है. AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा, तो UP के CEO ने भी जवाब दिया है.

अब उत्तर प्रदेश के चीफ इलेक्शन अफसर (CEO) ने ऐसा जवाब दिया है, जिसके बाद यह विवाद थामे नहीं थम रहा है. आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि राम ने यादव को ही क्यों मारा? इसपर उत्तर प्रदेश के CEO ने सफाई देते हुए कहा कि ‘भगवान का शुक्र है कि राम ने किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा’.
UP के चीफ इलेक्शन अफसर ने दिया जवाबप्लेटफॉर्म X पर ये पूरा खेल चला. 25 अक्टूबर को शाम 6 बजे संजय सिंह ने अपने X हैंडल से एक वीडियो शेयर किया. जिसमें उन्होंने आरोप लगाया,
‘ज्ञानेश कुमार जी आख़िर राम ने “यादव” को ही क्यों मारा? राम ने किसी सिंह, पाठक, अस्थाना, शर्मा, राय, बिष्ट को क्यों नही मारा? आपका कंप्यूटर घोर जातिवादी है क्या? क्या आप किसी पार्टी का एजेंडा चला रहे हैं?’
इस वीडियो का जवाब देते हुए उत्तर प्रदेश के CEO ने अपने X हैंडल से एक तस्वीर शेयर की. उसमें वोटर का नाम रवि शर्मा लिखा है और पिता का नाम ‘राम ने शर्मा को मारा’ लिखा है. कैप्शन में सांसद ने लिखा,
‘हालिया विधान परिषद के चुनाव की मतदाता सूची में एक अजीबोगरीब नाम “राम ने शर्मा को मारा” भी है. कंप्यूटर/सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं है. हमारे द्वारा गलती किया जाना स्वीकार है लेकिन हमारे सौभाग्य से गलती होते समय भी जाति का भेदभाव नहीं हुआ है. भगवान का यह भी शुक्र है की राम ने किसी अल्पसंख्यक को नहीं मारा है. नहीं तो जातिवादी होने के साथ-साथ सांप्रदायिक होने का इल्ज़ाम भी लगता.’
यानी इलेक्शन अधिकारी ने ये माना कि गड़बड़ी हुई है और सॉफ्टवेयर जातिवादी नहीं है. लेकिन उन्होंने जवाब देने के लिए एक जाति का ही इस्तेमाल किया और खुद जातिवादी टिप्पणी कर दी. जब ‘यादव’ जाति को लेकर सवाल उठे तो उन्होंने ‘शर्मा’ जाति का उदाहरण देकर कहा कि सॉफ्टवेयर ने भेदभाव नहीं किया है. साथ ही उन्होंने अल्पसंख्यकों पर भी टिप्पणी कर दी.
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आखिर ये गड़बड़ी हुई कैसे?उत्तर प्रदेश विधान परिषद के चुनावों के लिए वोटर लिस्ट में नाम दर्ज कराने के लिए पहली बार ऑनलाइन सुविधा दी गई थी. एक सॉफ्टवेयर बनाया गया, जिसका काम अंग्रेजी के रोमन लिपि में लिखे नामों को हिंदी की देवनागरी लिपि में लिखना था. इसे ‘ट्रांस्लिट्रेशन’ कहते हैं. मगर सॉफ्टवेयर ने ट्रांसलेट कर दिया यानी अंग्रेजी के नामों को हिंदी में अनुवाद कर दिया. इसी वजह से ‘Ram hit Yadav = राम ने यादव को मारा’ और ‘Fool Kalidevi = मूर्ख काली देवी हो गया.’
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 5 स्नातक और 6 शिक्षक निर्वाचन सीटों पर चुनाव हो रहे हैं. ये पूरा केस इसी चुनाव की वोटर लिस्ट का है. चुनाव में दर्ज कुल 14.81 लाख मतदाताओं की सूची में ऐसी 158 गड़बड़ियां सामने आईं हैं.
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