उज्जैन में शाही मस्जिद को गिराए जाने का एक वीडियो वायरल हुआ. वीडियो में दावा किया गया कि मस्जिद को तोड़ा जा रहा है. लेकिन पुलिस के मुताबिक ये वीडियो AI से बनाया गया था. इसमें मस्जिद को गिराए जाने की फर्जी तस्वीर दिखाई गई थी. पुलिस का कहना है कि ऐसे वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लोगों को भड़काया गया. बड़ी संख्या में लोगों को मौके पर पहुंचने के लिए कहा गया. इसके बाद 28 सितंबर को शाही मस्जिद के हिस्से को हटाने की कार्रवाई के दौरान हिंसा भड़क गई. भीड़ ने पुलिस पर पत्थर चलाए और पुलिस ने हालात काबू करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े.
शाही मस्जिद गिराने के AI वीडियो की वजह से भड़की हिंसा, उज्जैन में हुए बवाल पर बड़ा खुलासा
उज्जैन में शाही मस्जिद गिराने के मामले को लेकर भारी बवाल हुआ था. अब पुलिस की जांच में सामने आया है कि एक एआई वीडियो वायरल होने की वजह से भारी संख्या में भीड़ जुट गई और हिंसा भड़की थी. फिलहाल मामले में पुलिस की कार्रवाई चल रही है.

अब इस मामले में पुलिस ने अलग-अलग थानों में 8 FIR दर्ज की हैं. इनमें 20 लोगों को आरोपी बनाया गया है. पुलिस सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट, वीडियो और इन आरोपियों के बीच कनेक्शन की जांच कर रही है. अब तक 15 आरोपियों को गिरफ्तार किया है.
मौके पर पुहंचे उज्जैन के जिला कलेक्टर29 सितंबर को उज्जैन के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर (DC) रोशन कुमार सिंह शाही मस्जिद पहुंचे. वहां उन्होंने प्रभावित हिस्सा हटाने के काम का जायजा लिया. 28 सितंबर के बवाल पर DC रोशन कुमार ने कहा,
5 इन्फ्लुएंसर के खिलाफ FIR"शाही मस्जिद कमेटी के लोग खुद सड़क चौड़ीकरण से प्रभावित हिस्सा हटा रहे हैं. मैं सभी से अपील करना चाहूंगा कि सभी शांति व्यवस्था बनाए रखने में अपना सहयोग करें. कल (28 सितंबर) कुछ लोगों ने अप्रिय स्थित पैदा करने की कोशिश की थी. उनके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जा रही है. मस्जिद के लोग खुद प्रभावित हिस्सा हटा रहे हैं, जो बहुत अच्छा संदेश है."
पुलिस ने एक FIR में 5 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर- साजिद खान, इमरान खान, गुलरेज खान, बिल्लू पठान और आरिफ पठान को आरोपी बनाया है. आरोप है कि ये लोग लगातार ऐसी रील्स बना रहे थे, जिनसे लोगों में गुस्सा और भ्रम फैल रहा था.
इन रील्स में दावा किया गया था कि मस्जिद के पास JCB पहुंच चुकी है और जल्द ही मस्जिद गिराई जाने वाली है. लोगों से अपील की गई कि वे जल्द से जल्द मस्जिद पहुंचें. पुलिस के मुताबिक, पिछले करीब एक हफ्ते में ऐसे कई वीडियो और पोस्ट शेयर किए गए.
पुलिस ने 100 से ज्यादा Instagram अकाउंट्स की भी रिपोर्ट दर्ज की है. इन पर भ्रामक जानकारी फैलाने और सामाजिक-धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने के आरोप में BNS की धाराओं के तहत कार्रवाई की गई. दूसरी FIR में बाहर से उज्जैन आकर अशांति फैलाने की कोशिश करने के आरोप में कुछ लोगों के नाम हैं. पुलिस अब इन लोगों को पकड़कर पूछताछ कर रही है कि वे दूसरे शहरों से उज्जैन क्यों आए थे. इसके अलावा उज्जैन शहर के काजी खलीकुर्रहमान की शिकायत पर भी FIR दर्ज की गई है.
कैसे जुटी भीड़?पुलिस का दावा है कि कुछ लोग शहर में आकर माहौल बिगाड़ना चाहते थे. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि पिछले सात दिनों से सोशल मीडिया पर चल रही मुहिम और 28 सितंबर के उपद्रव के बीच क्या कोई कनेक्शन था? पुलिस की जांच में अब तक कई ऐसी पोस्ट सामने आई हैं, जिनमें लोगों को एक जगह इकट्ठा होने की अपील की गई थी.
एक पोस्ट में 27 सितंबर को छत्री चौक पर ज्यादा से ज्यादा लोगों के पहुंचने की बात कही गई. वहीं एक दूसरे वीडियो में रात करीब 2 बजे बड़ी संख्या में लोगों से मस्जिद पहुंचने की अपील की गई. इसके बाद 28 सितंबर की सुबह जैसे ही मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की खबर फैली, बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंचने लगे. देखते ही देखते माहौल तनावपूर्ण हो गया और पथराव शुरू हो गया.
फिलहाल पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल ऑनलाइन एक्टिविटी पर लगातार नजर रख रही है. पुलिस ने साफ किया है कि अफवाह, भ्रामक वीडियो या आपत्तिजनक कंटेंट के जरिए माहौल बिगाड़ने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.
अब समझते हैं कि आखिर उज्जैन की शाही मस्जिद का पूरा विवाद क्या है.
सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियों के लिए उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है. इसी सड़क के दायरे में शाही मस्जिद का एक हिस्सा आ रहा है. प्रशासन के मुताबिक प्रभावित हिस्से को हटाना सड़क चौड़ीकरण के लिए जरूरी है.
मस्जिद की उम्र को लेकर भी अलग-अलग दावे हैं. दस्तावेजों में इसके 100 साल से ज्यादा पुराना होने की बात सामने आती है. मस्जिद के इमाम का दावा है कि यह 600 साल से ज्यादा पुरानी है.
27 सितंबर की रात करीब 9 बजे मुस्लिम समाज के लोग शाही मस्जिद में इकट्ठा हुए. मस्जिद का हिस्सा हटाए जाने के विरोध में प्रदर्शन हुआ. इसके बाद जिला प्रशासन और मुस्लिम नुमाइंदा कमेटी के बीच बैठक हुई. बैठक में कथित तौर पर सहमति बनी कि मुस्लिम समाज अपने हाथों से मस्जिद का प्रभावित हिस्सा हटाएगा. इसके बाद लोग घर लौट गए. लेकिन 28 सितंबर की सुबह तस्वीर बदल गई.
एसपी प्रदीप शर्मा फोर्स के साथ छत्री चौक पहुंचे. इलाके में बैरिकेडिंग की गई. मजदूरों के मस्जिद के अंदर पहुंचने और प्रभावित हिस्से को हटाने का काम शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए. करीब 100 लोग टंकी चौक की तरफ पहुंचे और मस्जिद का हिस्सा हटाए जाने के खिलाफ नारेबाजी करने लगे. बैरिकेडिंग हटाने की कोशिश हुई और पुलिस पर पथराव किया गया. जवाब में पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े.
सुबह से शुरू हुआ विरोध दोपहर तक रुक-रुककर चलता रहा. बाद में पुलिस ने हालात काबू में किए और मस्जिद में प्रभावित हिस्से को हटाने का काम आगे बढ़ा. इसी बीच मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शाही मस्जिद कमेटी की याचिका डिस्पोज ऑफ कर दी.
इस पूरे विवाद में मस्जिद से जुड़े लोगों की तरफ से तर्क दिया जा रहा है कि आसपास की कई दुकानों और दूसरे हिस्सों को पहले ही सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाया जा चुका है. उनका कहना है कि मस्जिद का हिस्सा हटाने के बजाय सड़क का एलाइनमेंट बदलने जैसे विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए.
वहीं प्रशासन का कहना है कि तय सड़क चौड़ाई और सिंहस्थ की तैयारियों को देखते हुए प्रभावित निर्माण को हटाना जरूरी है. इसी बीच शहर काजी खलीकुर्रहमान ने लोगों से विवाद में नहीं पड़ने और प्रशासन की तय व्यवस्था के मुताबिक काम करने की अपील की. उन्होंने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने को भी कहा. लेकिन जमीन पर सहमति के बावजूद विरोध करने वाला दूसरा गुट सामने आया और मामला बिगड़ गया.
यानी पूरे विवाद की कड़ी रविवार रात की बैठक और सहमति से सोमवार सुबह के विरोध तक जुड़ती है. एक तरफ प्रभावित हिस्सा खुद हटाने पर सहमति बनी, तो दूसरी तरफ विरोध करने वाला गुट सड़क पर उतर आया. इस पूरे घटनाक्रम में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और पोस्ट की भूमिका अब पुलिस जांच का अहम हिस्सा है.
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खास तौर पर ये पता लगाने की कोशिश हो रही है कि AI से बनाए गए फर्जी वीडियो किसने बनाए, किसने शेयर किए, किन अकाउंट्स से इन्हें फैलाया गया और इन पोस्ट के बाद मौके पर जुटी भीड़ के बीच क्या कनेक्शन था.
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