जम्मू-कश्मीर का पूर्ण राज्य का दर्जा वापस किया जाए. ये मांग प्रदेश की विधानसभा ने केंद्र सरकार से की है. इससे जुड़ा प्रस्ताव सोमवार, 28 सितंबर को राज्य विधानसभा में पारित हो गया. बीजेपी विधायकों ने इस प्रस्ताव का विरोध करते हुए सदन से वॉकआउट किया. इसके बाद ध्वनिमत से प्रस्ताव पारित हो गया. विरोध करने वाले बीजेपी विधायकों ने स्पीकर अब्दुल रहीम राथर से कुर्सी छोड़ने की मांग की और वेल तक चले आए. उन्होंने ‘भारत माता की जय’ और ‘स्पीकर साहब, कुर्सी छोड़ो’ जैसे नारे भी लगाए.
जम्मू-कश्मीर को फिर पूर्ण राज्य का दर्जा देने का प्रस्ताव विधानसभा में पास, BJP का वॉकआउट
केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर की विधानसभा में सोमवार, 28 सितंबर को वह प्रस्ताव पारित हो गया, जिसमें प्रदेश के पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की गई थी.

साल 2019 में जम्मू-कश्मीर को दो भागों (जम्मू-कश्मीर और लद्दाख) में बांटते हुए उसे केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया था. इससे पहले 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 के तहत मिले विशेष राज्य के दर्जे को भी वापस ले लिया गया था.
पूर्ण राज्य का दर्जा बहाली की मांगकेंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद साल 2024 में जम्मू-कश्मीर में चुनाव हुए, जिसके बाद उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में यहां सरकार बनी. उमर अब्दुल्ला सरकार ने कई बार केंद्र से पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग की है. इन सबके बीच शुक्रवार, 25 सितंबर को राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला एक प्रस्ताव लेकर आए, जिसमें जम्मू कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य बनाने की मांग की गई थी. इस प्रस्ताव पर विधायकों की राय मांगी गई थी.
10 विधायकों ने संशोधन पेश किया, जिनमें से ज्यादातर ने कहा था कि पूर्ण राज्य के साथ विशेष राज्य के दर्जे की मांग भी केंद्र सरकार से की जाए. सोमवार, 28 सितंबर को जब सदन में इस पर वोटिंग हुई तो विशेष राज्य वाली मांग को छोड़कर पूर्ण राज्य के मुद्दे पर प्रस्ताव सदन ने पारित कर दिया. प्रस्ताव में कहा गया है,
जम्मू-कश्मीर विधानसभा 26 जून 2000 और 6 नवंबर 2024 को पारित प्रस्तावों के अलावा भारत सरकार से जम्मू और कश्मीर को तत्काल और आवश्यक रूप से पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का आह्वान करती है. साथ ही यह संकल्प लेती है कि प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा जाए.
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जब ये प्रस्ताव पेश किया तो विपक्ष ने इसका विरोध किया. इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्षी विधायकों के बीच तीखी बहस भी हुई. बीजेपी विधायकों ने प्रस्ताव में 5 अगस्त 2019 से पहले राज्य की स्थिति (आर्टिकल 370) का जिक्र किए जाने पर आपत्ति जताई.
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने कहा कि हम स्टेटहुड के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन अलग संविधान और अलग झंडे की बात भी कैसे कर सकते हैं. ये भारत के संविधान की मूल भावना के खिलाफ है.
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उन्होंने कहा कि बाकी भारत के राज्यों में भारत का संविधान लगेगा. यहां पर मुस्लिम बहुमत है. क्या इसलिए यहां नहीं लगेगा? ये ‘टू नेशन थ्योरी’ जिन्ना की थी. जिसने भारत को विभाजित किया है. इसी टू नेशन थ्योरी पर इस वक्त उमर अब्दुल्ला की सरकार चलना चाहती है. ये कभी स्वीकार्य नहीं होगा.
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