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तुकाराम मुंढे के निशाने पर अब अस्पताल और मेडिकल आइटम्स, बोले- '₹11 की चीज ₹325 में बिक रही'

Tukaram Mundhe hospital items price: FDA के चीफ तुकाराम मुंडे ने अस्पतालों पर भी निशाना साधा है. उन्होंने एक पोस्ट में कहा है कि जो सामान काफी कम कीमत में खरीदा गया होता है, उसे हॉस्पिटल में काफी कीमत बढ़ाकर दिया जाता है.

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तुकाराम मुंडे ने एक्स पोस्ट में हॉस्पिटल बिल पर बात की है. (कर्टसी-इंडिया टुडे)

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  • महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के चीफ तुकाराम मुंढे ने मेडिकल सामान की खरीद कीमत और अस्पतालों द्वारा बिल में लगाए गए प्राइस में भारी अंतर को सार्वजनिक किया है।
  • महाराष्ट्र के अस्पतालों में मेडिकल उपकरण की असली खरीद कीमत और मरीजों से वसूली गई दरों में व्यापक अंतर होने के चलते मरीजों को असल मूल्य की जानकारी नहीं मिल पाती।
  • महाराष्ट्र FDA ने इस समस्या के समाधान हेतु मेडिकल सामान के ट्रेड प्राइस और MRP के बीच स्वीकार्य अंतर के लिए स्पष्ट गाइडलाइन बनाने की सिफारिश केंद्र और संबंधित विभाग को भेजी है।

महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के चीफ तुकाराम मुंढे ने मेडिकल सामान के प्राइस पर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि मरीज को मेडिकल सामान की असल कीमत पता ही नहीं होती. वो नहीं जानता कि जो IV इन्फ्यूजन सेट उसे लगा है, उसकी कीमत बिल में बताए गए प्राइस से काफी कम है.  

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तुकाराम मुंढे ने कहा कि 6.75 रुपये में खरीदी गई सिरिंज को हॉस्पिटल में 57.20 रुपये का बताया जा सकता है. और 29.41 रुपये में खरीदे गए कैथेटर (ट्यूब) का प्राइस 310 रुपये तक हो सकता है.

तुकाराम मुंढे ने एक्स पर पोस्ट कर मेडिकल बिल पर बात की. उन्होंने माना कि एक सामान की असल कीमत और बाद में तय किए गए प्राइस की जानकारी नहीं होती. ये पब्लिक हेल्थ से जुड़ा मुद्दा है. उन्होंने लिखा,    

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“अस्पताल के बिल का सबसे महंगा हिस्सा शायद अस्पताल तक कभी पहुंचता ही नहीं है. इलाज के लिए भर्ती मरीज के पास यह जानने का कोई तरीका नहीं होता कि मेडिकल सामान की कीमत उसकी असली लागत है. या फिर वार्ड तक पहुंचने से पहले तय किया गया मार्कअप. जानकारी का ये अंतर असल में एक पब्लिक हेल्थ का मुद्दा है.”

मेडिकल सामान में पाया गया अंतर

उन्होंने महाराष्ट्र में अस्पताल के सामान के एक सर्वे के नतीजों का जिक्र किया. सर्वे में कई सामान की असल लागत और हॉस्पिटल बिल में काफी अंतर दिखा. पोस्ट में बताया गया…

- 11.05 रुपये के ट्रेड प्राइस वाले IV इन्फ्यूजन सेट (नसों के जरिए दवा देने वाला सेट) पर 325 रुपये की MRP छपी थी. यानी 2841% का मार्कअप.

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- 76.75 रुपये में खरीदी गई सिरिंज पर 257.20 रुपये की MRP थी.

- 29.41 रुपये में खरीदे गए कैथेटर पर 310 रुपये की MRP थी.

चर्चित अधिकारी ने लिखा, 

“ये ऐसी चीजें नहीं हैं, जो अपनी मर्जी से खरीदी जाएं. इलाज के दौरान मरीज न तो कीमतों की तुलना कर सकते हैं, न ही कोई दूसरा ऑप्शन ढूंढ सकते हैं. ना ही बॉक्स पर छपी कीमत पर सवाल उठा सकते हैं. अक्सर MRP खुद मैन्युफैक्चरर और डिस्ट्रीब्यूटर तय करते हैं. यह ट्रेड प्राइस से बहुत ज्यादा और अंतर पर होती है.”

FDA कमिश्नर के तौर पर दवाओं की कीमत और उनसे जुड़े नियमों को देखने वाले मुंढे  ने कहा, “नतीजा एक ऐसा सिस्टम है जिसमें कीमत चुकाने वाले के पास ही उसे परखने के लिए सबसे कम जानकारी होती है.”

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अधिकारी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखा. (कर्टसी-Tukaram_IndIAS)

अधिकारी ने मेडिकल इस्तेमाल की चीजों की कीमतों में एक स्ट्रक्चरल रेगुलेटरी गैप की ओर भी इशारा किया. उन्होंने कहा कि 'ड्रग्स (प्राइसेस कंट्रोल) ऑर्डर, 2013' के तहत लिस्टेड दवाओं की कीमतें तय होती हैं. ज्यादातर मेडिकल डिवाइस और इस्तेमाल होने वाली चीजों की कीमतों और उनसे जुड़ी जानकारी पर लगभग कोई निगरानी नहीं रखी जाती है.

गाइडलाइन बनाने की कि सिफारिश

महाराष्ट्र FDA की ओर से सामने रखे गए सर्वे के नतीजों की समीक्षा की सिफारिश की गई है. साथ ही ट्रेड प्रोक्योरमेंट प्राइस और घोषित MRP के बीच स्वीकार्य अंतर को लेकर स्पष्ट गाइडलाइन बनाने की बात कही गई है. यह सिफारिश डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्यूटिकल्स और नेशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) को भेजी गई है.    

तुकाराम मुंढे का कहना है कि ये कार्रवाई ना सिर्फ कीमतों के अंतर को कम करने की तरफ एक कदम है, बल्कि इससे उन मरीजों को भी मदद मिलेगी जिन्हें असल कीमत के बारे में नहीं पता.

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तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में FDA पूरे महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़े पैमाने पर कार्रवाई कर रही है. कई होटलों, रेस्तरां, क्लबों और अन्य जगहों पर छापेमारी की गई है. और उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं. नियमों के उल्लंघन के कारण कुछ को बंद भी कर दिया गया है. 

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