पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात के दौरान उनके क्लासमेट ने बीजेपी विधायक पर अपनी जमीन पर कथित कब्जे की शिकायत की थी. इसके ठीक एक हफ्ते बाद विधायक ने जमीन से कब्जा छोड़ने का ऐलान कर दिया. साथ ही, पीएम मोदी के क्लासमेट के खिलाफ अपनी शिकायत भी वापस लेने की बात कही है.
PM मोदी से दोस्त ने की शिकायत और 8 दिन में एक्शन, BJP विधायक ने करोड़ों की जमीन पर छोड़ा कब्जा
PM Modi classmate land dispute: पीएम मोदी के स्कूलमेट रहे असगर अली वोरा (81 साल) का आरोप है कि उनकी करीब 2,810 स्क्वायर मीटर जमीन पर कथित तौर पर कब्जा किया गया था. आरोप बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता पर है.

मामला महाराष्ट्र क ठाणे जिला के मीरा-भायंदर इलाके का है. पीएम मोदी के स्कूलमेट रहे असगर अली वोरा (81 साल) का आरोप है कि उनकी करीब 2,810 स्क्वायर मीटर जमीन पर कथित तौर पर कब्जा किया गया था. उन्होंने 8 सितंबर को पीएम से मुलाकात में यही शिकायत रखी थी. इसके बाद सरकारी स्तर पर बैठक हुई थी. अब बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता ने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और वहां मिली कंस्ट्रक्शन की मंजूरी सरेंडर करने की बात कही है.
पूरी कहानी क्या है?कहानी जितनी सीधी दिख रही है, उतनी है नहीं. आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, जमीन पर कब्जे के आरोप को BJP विधायक नरेंद्र मेहता ने स्वीकार नहीं किया है. उनका दावा है कि उन्होंने ये जमीन 2019 में एक शख्स से खरीदी थी. यानी जमीन के मालिकाना हक को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं और मामला कोर्ट में भी चल रहा है.
असगर अली और पीएम मोदी ने गुजरात के वडनगर के बीएन स्कूल से पढ़ाई की थी. 8 सितंबर को वोरा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. इस मुलाकात में उन्होंने भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में अपनी जमीन से जुड़े विवाद का मामला सामने रखा.
असगर के मुताबिक जमीन 1989 में एक एग्रीमेंट के जरिए खरीदी गई थी. लेकिन उनका आरोप है कि 2011 में इस जमीन पर अतिक्रमण कर लिया गया.
वोरा ने आरोप लगाया कि जमीन से जुड़े कथित फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और जमीन को दो हिस्सों में बांटकर अलग-अलग कंस्ट्रक्शन एंटिटीज के नाम पर दिखाया गया. उनके मुताबिक, इनमें स्वयं बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस का नाम शामिल है.
15 सितंबर को महाराष्ट्र मंत्रालय में एक बैठक हुई. ये बैठक मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी ने बुलाई थी. इसमें असगर अली वोरा, बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता, मीरा-भायंदर की म्युनिसिपल कमिश्नर राधा बिनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे मौजूद थे.
बैठक में नरेंद्र मेहता ने टाउन प्लानिंग डिपार्टमेंट को एक पत्र सौंपा. इसमें उन्होंने कहा कि वो विवादित जमीन का कब्जा छोड़ रहे हैं और प्लॉट पर मिली कंस्ट्रक्शन की मंजूरी भी सरेंडर कर रहे हैं. इसके अलावा, पुलिस कमिश्नर को लिखे एक अलग पत्र में मेहता ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है. वो असगर अली वोरा के खिलाफ पहले की गई अपनी शिकायत वापस ले रहे हैं.
हालांकि, मेहता ने जमीन पर अवैध कब्जे के आरोप को स्वीकार नहीं किया है. उनका कहना है कि उन्होंने भायंदर ईस्ट की ये जमीन साल 2019 में मर्विन फर्नांडीस से खरीदी थी.
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कौन हैं नरेंद्र मेहता?नरेंद्र मेहता मीरा-भायंदर से बीजेपी विधायक हैं. साल 2014 में पहली बार इस सीट से विधानसभा पहुंचे थे. 2019 में उन्हें निर्दलीय उम्मीदवार गीता जैन से हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद 2024 में उन्होंने दोबारा बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और मीरा-भायंदर से जीत दर्ज की.
मेहता इससे पहले मीरा-भायंदर नगर निगम के मेयर भी रह चुके हैं. उनके चुनावी हलफनामे के मुताबिक, 2024 में उनके खिलाफ 18 मामले घोषित थे और उनकी कुल घोषित संपत्ति करीब 63 करोड़ रुपये थी. नरेंद्र मेहता और उनकी पत्नी सुमन से जुड़ा एक आय से अधिक संपत्ति का मामला भी 2022 में सामने आया था. उनकी पत्नी सुमन साल 2016 में भी खबरों में आई थीं, जब उनकी लेम्बोर्गिनी कार मीरा-भायंदर में एक ऑटोरिक्शा से टकरा गई थी.
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