NEET-UG 2026 री-एग्जाम से पहले टेलीग्राम पर लगे अस्थाई बैन को लेकर नई जानकारी सामने आई है. भारत सरकार और टेलीग्राम के बीच ये झगड़ा पिछले चार सालों से चल रहा है. टेलीग्राम को लेकर सरकार की एक बड़ी शिकायत उसके लिमिटेड सर्च फीचर को लेकर रही है. सरकार का कहना है कि टेलीग्राम ने उन एक्टिव चैनलों का पता नहीं लगाया, जिन्हें यूजर्स ने 'नीट पेपर लीक' शब्द का इस्तेमाल करके आसानी से खोज लिया था.
4 साल से कह रहे, लेकिन... सरकार-टेलीग्राम का सालों का झगड़ा खुल गया
Telegram Ban in India: सरकार और टेलीग्राम के बीच चार साल से विवाद है. 3 जून को हुई एक बैठक में सरकार ने टेलीग्राम को फटकार लगाई थी. सरकार ने कहा कि टेलीग्राम ने अपने लिमिटेड सर्च फीचर को बेहतर नहीं बनाया है. जानिए पूरा मामला.


NEET UG 2026 का री-एग्जाम 21 जून को होगा. एग्जाम से पहले भारत सरकार ने 16 जून से टेलीग्राम पर टेम्पररी बैन लगा दिया. इसके पीछे तर्क दिया कि टेलीग्राम पर चलने वाले कई चैनल ऐसा दावा कर रहे थे, कि उनके पास NEET का क्वेश्चन पेपर है.
क्या है पूरा विवाद?इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के मुताबिक, टेलीग्राम पिछले चार सालों से सरकार को ये कहता आ रहा है कि वो अपने सर्च फीचर को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है. जबकि टेलीग्राम का तर्क है कि किसी कीवर्ड या वाक्यांश को पूरी तरह बैन कर देना कंटेंट मॉडरेशन का सही समाधान नहीं है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 3 जून को हुई एक बैठक में सरकार ने टेलीग्राम को फटकार लगाई थी. सरकार ने कहा कि टेलीग्राम ने अपने लिमिटेड सर्च फीचर को बेहतर नहीं बनाया है.
अधिकारियों ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति टेलीग्राम पर ‘नीट लीक्ड पेपर’ सर्च करता था, तब भी पेपर लीक से जुड़े कई एक्टिव चैनल प्लेटफॉर्म पर मौजूद मिल जाते थे. यानी टेलीग्राम ऐसे चैनलों को समय रहते पहचानने और हटाने में विफल रहा. सूचना मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा,
"पिछले चार सालों से टेलीग्राम यह कह रहा है कि उसका सर्च फीचर लिमिटेड है और उस पर काम चल रहा है. अगर प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग को रोकने के लिए सक्रिय कदम नहीं उठाए गए तो सरकार उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई कर सकती है."
टेलीग्राम ने क्या बताया?इस मीटिंग के बाद 5 जून को भेजे गए ईमेल में टेलीग्राम ने कहा कि सर्च सिग्नल और कीवर्ड का इस्तेमाल वो अपने कंटेंट मॉडरेशन सिस्टम में लगातार करता है. इनके जरिए परीक्षा में धोखाधड़ी और पेपर लीक से जुड़े कंटेंट की पहचान कर कार्रवाई की जाती है. लेकिन कंपनी ने यह भी कहा कि किसी कीवर्ड या वाक्यांश (फ्रेज) को पूरी तरह ब्लॉक करना उचित समाधान नहीं है, क्योंकि वही शब्द वैध संदर्भों में भी इस्तेमाल हो सकते हैं. लेकिन कैसे? यह भी टेलीग्राम ने बताया.
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टेलीग्राम के मुताबिक, ‘नीट लीक पेपर’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल केवल धोखाधड़ी करने वाले लोग ही नहीं, बल्कि छात्र, शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोग, मीडिया संस्थान और न्यूज रिपोर्टिंग करने वाली ऑर्गनाईजेशन भी कर सकते हैं. यहां कंटेंट का मतलब एग्जाम के क्वेश्चन पेपर से है. कुल मिलाकर सरकार ने टेलीग्राम से कुछ चीज़ों को सुधारने के लिए कहा था. लेकिन कंपनी ने वो बदलाव नहीं किए.
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