तेलंगाना के राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज अस्पताल के स्पेशल नियोनेटल केयर यूनिट (SNCU) में आग लगने से 5 नवजात बच्चों की मौत हो गई. हादसे के वक्त यूनिट में इन पांचों के अलावा और भी कई नवजात मौजूद थे. बताया गया कि उनकी जान बचाने के लिए अस्पताल के स्टाफ ने अपनी जान की परवाह नहीं की. फायर ब्रिगेड के पहुंचने से पहले ही डॉक्टरों ने अटेंडेंट और नर्सों की मदद से ज्यादातर बच्चों को SNCU से बाहर निकाल लिया था.
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Telangana Hospital Fire: डॉ. राठौर ने बताया कि उन्हें ‘अंदर भागते हुए धुएं की गंध आ रही थी.’ इस दौरान उन्होंने फौरन कम से कम 4 बच्चों को गोद में उठाकर बाहर ले आए. डॉक्टर ने बताया कि यह रेस्क्यू ऑपरेशन काफी मुश्किल था. क्योंकि, कुछ बच्चे समय से पहले ही पैदा हो गए थे. इसलिए उन्हें कई तरह की मशीनों से जोड़कर रखा गया था.

नवजात बच्चों के रेस्क्यू के समय एक डॉक्टर बेहोश भी हो गए थे. उन्हें बाद में मौके से हटाया गया. रेस्क्यू में शामिल डॉक्टर नवनीत राठौर ने इंडियन एक्सप्रेस अखबार से बात की. डॉ. राठौर ने बताया कि वो एक कंसल्टेशन के लिए उस फ्लोर पर गए थे, जहां SNCU था. उन्होंने वहां लगे AC में से चिंगारी और धुआं निकलते हुए देखा, जिसके बाद वो कमरे के अंदर दौड़ गए.
डॉ. राठौर ने बताया कि उन्हें अंदर भागते वक्त धुएं की गंध आ रही थी. वो फौरन कम से कम 4 बच्चों को गोद में उठाकर बाहर ले आए. डॉक्टर ने बताया कि यह रेस्क्यू ऑपरेशन काफी मुश्किल था. क्योंकि, कुछ बच्चे समय से पहले ही पैदा हो गए थे. इसलिए उन्हें कई तरह की मशीनों से जोड़कर रखा गया था. डॉक्टर नवनीत ने कहा,
‘हमें सबसे पहले बच्चों को इनट्यूबेशन, वार्मर और मैकेनिकल वेंटिलेटर से हटाना था. हमने इस काम में बहुत कम समय लिया.’

रेस्क्यू के दौरान अस्पताल में तैनात सर्जन डॉ. इफ्तेखार भी पहुंच गए. उन्होंने SNCU से रेस्क्यू करके 3 नवजात बच्चों को मशीनों से अलग किया और उन्हें कमरे से बाहर निकाला. लेकिन इस बीच अंदर-बाहर होने की वजह से उनके शरीर में काफी धुआं चला गया था. इसी कारण रेस्क्यू के दौरान एक दफा वो SNCU में ही गिर गए थे. हालांकिस्टाफ ने उन्हें कमरे से बाहर निकाल लिया था.
नवजात बच्चों को बचाने के लिए डॉक्टर श्रावंती भी लगी हुई थीं. उन्हें दो बच्चों को वार्मर से निकालकर बाहर लाते हुए देखा गया. चश्मदीदों ने बताया कि SNCU में रेस्क्यू के दौरान भी AC में धमाका हुआ और फर्श पर भी आग लग गई थी. डॉ. इफ्तेखार ने कहा,
‘फर्श पर आग लग गई थी. बावजूद इसके अटेंडेंट और अन्य स्टाफ ज्यादा से ज्यादा नवजातों को कमरे से बाहर निकालने में लगे हुए थे. रेस्क्यू के लिए वो लगातार अंदर-बाहर कर रहे थे.’
घटना पर डॉ. डम्पा अशोक ने भी अखबार से बात की. उन्होंने बताया कि बच्चों के पेरेंट्स के रोने की आवाज सुनकर वो SNCU में आखिरी बार गए थे. उन्होंने कहा,
‘मैंने पहले इस यूनिट में एक दिन काम किया था. इसलिए मुझे पता था कि बच्चे कहां है. मैं उनके रोने की आवाज सुन सकता था. मैं बस अंदर भागा और दो नवजात बच्चों को लेकर बाहर आया.’
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रिपोर्ट के मुताबिक, ये वो आखिरी दोनों बच्चे थे, जिन्हें जिंदा बाहर लाया गया था. डॉ. राठौड़ ने बताया कि धुएं की वजह से कुछ भी साफ नहीं दिखाई दे रहा था. ऐसे में वही लोग रेस्क्यू कर पाए, जिन्हें SNCU के बारे में पहले से पता था. हादसे वाली रात को याद करते हुए डॉ. राठौर ने कहा कि वो अपनी जिंदगी में इस रात को कभी नहीं भूल पाएंगे.
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