एक मेज पर दलिया, चना सलाद रखा है. दूसरी टेबल पर पिज्जा और बर्गर. बच्चे किसे सबसे पहले उठाएंगे? शायद जवाब होगा पिज्जा-बर्गर. काफी चांस है कि बच्चे बाहर के खाने की तरफ जाएंगे. पर अगर हेल्दी चीजों को भी लुभावने तरीके से पेश किया जाए तो बच्चे बाहर का जंक फूड नहीं, बल्कि घर का बना हेल्दी खाना खाएंगे.
'Food Porn' दिखाया तो बच्चे हेल्दी चीजें खाने लगे, इस रिसर्च ने चौंकाया
शोध में ये जानने की कोशिश की गई कि बच्चे खाने की ग्लेमर्स तस्वीरों को कैसे देखते हैं. पता चला अगर खाने को 'Foodporn' की तरह पेश किया जाए, यानी हेल्दी खाने को लजीज और सुंदर दिखाया जाए, तो बच्चे उसकी तरफ अपना हाथ बढ़ाएंगे.

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन (ICMR-NIN) के शोधकर्ताओं ने एक स्टडी के आधार पर ये बात कही है. स्टडी का नाम है, ‘Foodporn for e-Priming Healthy Food Choices Among Adolescents: An Experimental Study Using Appealing Food Imagery’. इसे पब्लिक हेल्थ जर्नल BMC (BioMed Central) ने पब्लिश किया है.
शोध में ये जानने की कोशिश की गई कि बच्चे खाने की ग्लेमर्स तस्वीरों को कैसे देखते हैं. पता चला अगर खाने को 'Foodporn' की तरह पेश किया जाए, यानी हेल्दी खाने को लजीज और सुंदर दिखाया जाए, तो बच्चे उसकी तरफ अपना हाथ बढ़ाएंगे.
द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, रिसर्चर्स ने सबसे हेल्दी और अनहेल्दी दोनों तरह के खाने की चीजों की 150 तस्वीरों का एक कलेक्शन तैयार किया. इन इमेज का 43 स्कूली किशोरों के बीच प्री-टेस्ट किया गया. उनकी रेटिंग के आधार पर स्टडी के लिए 15 तस्वीरें फाइनल की गईं.
इंस्टाग्राम पर 203 बच्चों को भेजी तस्वीरेंहेल्दी खाने की तस्वीरों में फल, मिलेट्स (मोटे अनाज), दालें, डेयरी प्रोडक्ट्स, नट्स और बीज शामिल थे. इनकी या तो सिंपल तरीके से क्लिक की गई तस्वीर थी या फिर अट्रैक्टिव वाली. मतलब जिसमें खाने को काफी अच्छे से सजा कर पेश किया गया था.
जिन तस्वीरों का चयन किया गया था, उन्हें पूरे भारत के करीब 203 बच्चों को इंस्टाग्राम पर शेयर किया गया. इन बच्चों की उम्र 13-19 साल थी. पार्टिसिपेंट्स को खाने की तीन कैटेगरी मिली.
पहली- अनहेल्दी फूड, लेकिन देखने में अट्रैक्टिव.
दूसरी- सेहतमंद खाना, लेकिन आकर्षक तस्वीर के साथ.
तीसरी- साधारण तरीके से पेश किया गया सेहतमंद खाना.
स्टडी में कई बच्चों की दिलचस्पी बाजरे का दलिया और ‘चना’ सलाद में दिखी. इसे अट्रैक्टिव कैटेगरी में पेश किया गया था. किशोरों ने तस्वीरों में रंग, बनावट, परोसने का तरीका, आकार, चमक और संतुलन जैसी चीजों को देखा.
उदाहरण के लिए, सजाकर परोसे गए बाजरे के दलिये की इमेज को सादे बाजरे के अनाज के कटोरे की तुलना में बेहतर रेस्पॉन्स मिला. वहीं सादी उबली हुई दाल की तुलना में अच्छी तरह से परोसे गए चना सलाद को ज्यादा पसंद किया गया.
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फूड और तस्वीर के बीच रिलेशननतीजों से पता चला कि खाने की चीज को देखने में आकर्षक होने और उसे खाने की इच्छा के बीच गहरा संबंध है. इंस्टाग्राम पोस्ट में खाने के न्यूट्रिशन से जुड़ी जानकारी भी दी गई थी. लेकिन उस पर किशोरों का ध्यान काफी कम गया. बातचीत से पता चला कि किशोरों ने साथ में लिखे टेक्स्ट के बजाय इमेज पर ज्यादा ध्यान दिया. इससे सोशल मीडिया पर विजुअल कम्युनिकेशन की ताकत का पता चलता है.
रिसर्च टीम को लीड करने वाले सुब्बा राव एम. गवरवरपु ने कहा कि आकर्षक तरीके से परोसा गया खाना किशोरों की हेल्दी खाना खाने की सोच पर असर डालता है. जहां साधारण तरीके से परोसा गया फूड ज्यादातर घर के खाने से जुड़ा होता है. वहीं आकर्षक तरीके से परोसा गया खाना अक्सर रेस्टोरेंट और दोस्तों के साथ होने वाली पार्टियों से जुड़ा होता है.
उन्होंने ये भी बताया कि कई किशोरों ने इन 15 दिनों के दौरान असल में ज्यादा फल और दालें खाई. कुछ ने तो उन्हें दिखाए गए खाने को खोजने के लिए खास कोशिश भी की. NIN की डायरेक्टर भारती कुलकर्णी ने कहा कि ये नतीजे हेल्दी विकल्पों को बढ़ावा देने का एक सस्ता तरीका बताते हैं.
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