सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने हायर जूडिशरी में महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व पर 'गंभीर चिंता' जताई है. बार एसोसिएशन ने कहा कि 2021 से सुप्रीम कोर्ट में किसी भी महिला जज की नियुक्ति नहीं हुई है. वहीं, वर्तमान में आला अदालत की बेंच में सिर्फ एक महिला जज है.
'2021 से SC में एक भी महिला जज की नियुक्त नहीं...', बार एसोसिएशन ने प्रस्ताव में जताई निराशा
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने इस बात पर भी 'निराशा' जताई कि सुप्रीम कोर्ट में हुई हालिया नियुक्तियों में बार या बेंच से किसी भी महिला को पदोन्नत नहीं किया गया.


SCBA ने शनिवार, 30 अगस्त के एक प्रस्ताव जारी किया. इसमें बताया कि उत्तराखंड, त्रिपुरा, मेघालय और मणिपुर समेत कई हाई कोर्ट्स में वर्तमान में एक भी महिला जज नहीं है. देश भर में हाई कोर्ट्स के जजों के लगभग 1,100 स्वीकृत पद हैं. इनमें से लगभग 670 पर पुरुष कार्यरत हैं. जबकि सिर्फ 103 पर महिलाएं काम करती हैं.
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इंडिया टुडे से जुड़ीं अनीषा माथुर की खबर के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट में हुई हालिया नियुक्तियों में बार या बेंच से किसी भी महिला को पदोन्नत नहीं किया गया. बार बॉडी ने इस बात पर को लेकर 'गहरी निराशा' जताई. इससे पहले, SCBA अध्यक्ष विकास सिंह ने 24 मई और 18 जुलाई को भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई को लेटर लिखे. इसमें उन्होंने जोर दिया कि हायर जूडिशरी में पुरुषों के मुकाबले कम से कम महिलाओं के लिए एक निश्चित रिप्रेजेंटेशन तय हो.
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने कहा कि बेंच में ज्यादा जेंडर आधारित संतुलन, न सिर्फ निष्पक्ष प्रतिनिधित्व के लिए जरूरी है, बल्कि जनता का विश्वास हासिल करने, अलग-अलग नजरियों को लाने और देश की सामाजिक विविधता को सुप्रीम कोर्ट में रिफ्लेक्ट करने के लिए भी अहम है.
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लेटर के आखिर में भारत के मुख्य न्यायाधीश और कॉलेजियम से एक आग्रह किया गया. उसमें कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट्स में ज्यादा महिला जजों की नियुक्ति और पदोन्नति पर ‘तत्काल और उचित विचार’ किया जाए.
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