सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों पर दर्ज FIR को रद्द कर दिया है. पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था. 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हुई थी. इसके बाद कई छात्रों के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी. 1 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 के तहत मिली विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए FIR रद्द करने का आदेश दिया है.
CJP प्रोटेस्ट में शामिल सभी छात्रों पर दर्ज FIR रद्द, लेकिन इन 2873 लोगों पर होगी कार्रवाई, SC का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज हुई FIR को रद्द करने का आदेश दिया है. मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच कर रही थी.

शीर्ष अदालत ने कहा है कि किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में 20-25 जुलाई के बीच हुई घटनाओं से जुड़ी FIR पर आगे कोई कार्रवाई या जांच नहीं होगी. उन्हें हर तरह से बंद माना जाएगा. कोर्ट के इस फैसले के बाद दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और असम में छात्रों के खिलाफ FIR रद्द होंगी.
5 सितंबर का CJP का दिल्ली मार्च रद्दमामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच कर रही थी. बेंच ने कहा कि यह आदेश उन छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए दे रहा है, जो ईमानदारी (बिना किसी गलत मंशा के) से विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे.
कोर्ट के इस आदेश के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को होने वाले अपने दिल्ली मार्च को वापस लेने का फैसला किया है. CJP के प्रवक्ता ने SC को कहा कि यह केंद्र के सकारात्मक आश्वासन और SC के आदेश को देखते हुए किया जा रहा है.
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2873 लोगों के खिलाफ FIR की इजाजतहालांकि कोर्ट ने जंतर मंतर प्रोटेस्ट में मौजूद रहे उन 2873 लोगों के खिलाफ फ्रेश FIR दर्ज करने की इजाजत दी है, जिनके सीरियस क्रिमिनल रिकॉर्ड हैं. अगस्त में भी प्रदर्शनकारी छात्रों पर FIR से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई थी. Live Law की रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा था कि 2873 लोगों को छोड़कर अन्य लोगों के खिलाफ मामले रद्द किए जा सकते हैं. क्योंकि इन 2873 लोगों पर हत्या, बलात्कार, अपहरण जैसे गंभीर अपराधों के मामले दर्ज हैं.
आज 1 सितंबर को प्रदर्शन में शामिल आम छात्रों पर दर्ज FIR रद्द होने पर सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट में कहा कि केंद्र ने अपने वादों पर कार्रवाई शुरू कर दी है. इसलिए उन्हें उम्मीद है कि CJP दिल्ली में 5 सितंबर को घोषित विरोध मार्च को रद्द कर देगी. इसके जवाब में कोर्ट में मौजूद CJP के प्रवक्ता सौरभ दास ने बेंच के सामने अपने दिल्ली मार्च को वापस लेने की बात कही.
दास ने CJP की ओर से एक बयान पढ़ते हुए कहा,
“CJP के सह-संयोजक के तौर पर मैं यह कहना चाहता हूं कि भारत सरकार के सकारात्मक आश्वासनों और आज मिली न्यायिक मान्यता को देखते हुए और कोर्ट के आदेश को ध्यान में रखते हुए CJP 5 सितंबर को मार्च करने के अपने फैसले को वापस लेना सही समझता है. मैं इस फैसले के लिए कोर्ट का और दोनों पक्षों के वकीलों सुश्री वृंदा ग्रोवर और सॉलिसिटर जनरल का उनकी कोशिशों के लिए धन्यवाद भी देता हूं.”
सॉलिसिटर जनरल ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार NEET परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने के अपने वादे को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है. हालांकि, इस मुआवजे की राशि और उसे देने की प्रक्रिया तय करने के लिए तीन महीने का समय मांगा है.
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