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शहीद की पत्नी को 25 साल से पेंशन नहीं मिली, SC ने पाई-पाई के साथ ₹10 लाख और दिलवाए

Supreme Court ने आदेश दिया कि केंद्र सरकार Shaurya Chakra Awardee Soldier Mohan Singh की पत्नी को ‘स्पेशल फैमिली पेंशन’ जारी करे. साथ ही 10 लाख रुपये अतिरिक्त मदद के तौर पर दिए जाएं.

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सुप्रीम कोर्ट ने शहीद की पत्नी के पेंशन को जारी करने का निर्देश दिया. (सांकेतिक फोटो- पीटीआई)

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  • सुप्रीम कोर्ट ने शौर्य चक्र से सम्मानित GREF के शहीद मोहन सिंह की पत्नी कुलदीप कौर को स्पेशल फैमिली पेंशन जारी करने और केंद्र सरकार को उन्हें 10 लाख रुपये अतिरिक्त सहायता देने का आदेश दिया है।
  • मोहन सिंह की पत्नी की पेंशन मांग को केंद्र सरकार ने वर्कमैन कंपनीसेशन एक्ट के तहत तकनीकी नियमों का हवाला देते हुए खारिज कर दिया था, जिससे मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश से कुलदीप कौर को कुल 14 लाख 28 हजार 200 रुपये जारी किए गए हैं और सरकार को विशेष नियमों के तहत अतिरिक्त चार लाख रुपये देने होंगे।
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संजय शर्मा

'जनरल रिजर्व इंजीनियरिंग फोर्स' (GREF) के एक शहीद जवान की पत्नी को ‘स्पेशल फैमिली पेंशन’ के लिए सालों तक कोर्ट के चक्कर लगाने पड़े. अब सुप्रीम कोर्ट ने इस केस में याचिकाकर्ता को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने ‘शौर्य चक्र’ से सम्मानित जवान मोहन सिंह की पत्नी कुलदीप कौर के लिए ‘स्पेशल फैमिली पेंशन’ जारी करने का निर्देश दिया है. इसके अलावा केंद्र सरकार को यह भी आदेश दिया कि वो याचिकाकर्ता को 10 लाख रुपये अतिरिक्त मदद के तौर पर जारी करे.

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शहीद की पत्नी को सालों बाद मिली पेंशन

मामले की सुनवाई जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्ली की बेंच कर रही थी. कोर्ट उस अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के एक फैसले को चुनौती दी गई थी. इंडिया टुडे से जुड़े संजय शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि शहीद के परिवार को उनकी ‘स्पेशल फैमिली पेंशन’ फौरन जारी की जाए.

मामले की संवेदनशीलता देखते हुए कोर्ट ने कहा कि जिन्होंने देश के लिए ‘सर्वोच्च बलिदान’ दिया है उनके परिवारों या विधवाओं को अपने अधिकारों के लिए दशकों तक अदालतों के चक्कर लगाना ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ है. उन्हें अदालतों ऐसा करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए.

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मामला क्या है?

साल 2000 में मोहन सिंह GREF में एक ओवरसियर के तौर पर काम कर रहे थे. वो अरुणाचल प्रदेश में ‘हायलियांग-मेटांगलियांग-चाग्लोहागोम’ में सड़क निर्माण कार्य में ‘इन-चार्ज वर्क्स’ के तौर पर तैनात थे. भारत-चीन बॉर्डर के लिए इस 57 किलोमीटर लंबी सड़क को महत्वपूर्ण बताया गया था. 10 जुलाई, 2000 के दिन इस साइट पर एक हादसा हुआ. पहाड़ से बड़े-बड़े पत्थर गिरने लगे. कंस्ट्रक्शन साइट पर मौजूद कई मजदूर मलबे में फंस गए. तब मोहन सिंह ने पहाड़ से गिरते मलबे के बीच मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई थी. लेकिन इस दौरान खुद मलबे की चपेट में आने से उनकी मौत हो गई.

इस बहादुरी के लिए तत्कालीन सरकार ने साल 2001 में मोहन सिंह को देश के तीसरे सबसे बड़े शांतिकालीन वीरता पुरस्कार 'शौर्य चक्र' से सम्मानित भी किया. इसके बाद शहीद की पत्नी कुलदीप कौर ने ‘स्पेशल फैमिली पेंशन’ के लिए अपील थी, लेकिन केंद्र सरकार ने तकनीकी नियमों का हवाला देकर पेंशन की मांग खारिज कर दी. सरकार का तर्क था कि उन्हें पहले ही ‘वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट’ के तहत मुआवजा मिल चुका है. 

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अब केस की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार ने इस केस को गलत कैटेगरी में रखा है. शहीद के इस सर्वोच्च बलिदान को ‘केंद्रीय सिविल सेवा’ (CCS) नियमों की 'कैटेगरी C' के तहत विशेष लाभ मिलना चाहिए था.

कोर्ट में अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने बताया कि बकाया राशि जारी कर दी गई है. कुल 14 लाख 28 हजार 200 रुपये कुलदीप कौर को ट्रांसफर किए जा चुके हैं. जबकि 4 लाख 12 हजार 64 रुपये एरियर के रूप में दिए गए. इसके अलावा कोर्ट ने कुलदीप कौर को 10 लाख अतिरिक्त देने का निर्देश दिया. सुप्रीम कोर्ट ने अतिरिक्त राशि दिलवाने के लिए अनुच्छेद 142 के तहत अपनी स्पेशल पावर्स का इस्तेमाल किया.

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