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सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली के महीने में BMC कमिश्नर और अधिकारियों की सैलरी रोक दी

Supreme Court BMC commissioner contempt: सुप्रीम कोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के कमिश्नर के खिलाफ 'अदालत की अवमानना' की कार्यवाही शुरू की है. कमिश्नर पर 5 लाख रुपये का जुर्माना और नवंबर महीने की सैलरी रोकने का भी निर्देश दिया है.

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सुप्रीम कोर्ट ने BMC कमिश्नर को फटकार लगाई. (Courtesy-इंडिया टुडे)

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  • सुप्रीम कोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम के कमिश्नर को अदालत की अवमानना का कारण बताओ नोटिस जारी कर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया और नवंबर तक उनकी सैलरी रोकने का आदेश दिया है।
  • यह कार्रवाई उस जमीन के अतिक्रमण को न हटाने के कारण की गई है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम और प्राइवेट डेवलपर के बीच जारी कानूनी विवाद के तहत बस स्टैंड के लिए जमीन खाली करने का निर्देश दिया था।
  • इस आदेश के बाद कमिश्नर और उनके स्टाफ को वेतन रोकने का निर्देश दिया गया है और कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि निर्देशों का पालन न किए जाने पर आगे सख्त कार्रवाई हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के कमिश्नर को फटकार लगाई है. उनके खिलाफ 'अदालत की अवमानना' की कार्यवाही शुरू की है. 'कारण बताओ नोटिस' जारी किया है. कमिश्नर पर 5 लाख रुपये का जुर्माना. इतना ही नहीं, नवंबर यानी दिवाली के महीने में उनकी सैलरी रोकने का भी निर्देश दिया है.

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यह निर्देश भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की बेंच ने दिया है. कमिश्नर के खिलाफ यह कार्रवाई एक जमीन से अतिक्रमण ना हटा पाने के बाद की गई है.

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, CJI सूर्यकांत ने सवाल पूछते हुए कहा,

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"क्या इससे यह पता नहीं चलता कि आपके अधिकारी मिलीभगत कर रहे हैं? हम उसे जेल भेज देंगे, तब उसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अहमियत समझ आएगी. क्या वह हम पर कोई एहसान कर रहा है?"

CJI ने आगे कहा,

"यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का जानबूझकर किया गया उल्लंघन है. इसमें अतिक्रमण करने वालों की सीधी मिलीभगत और समर्थन शामिल है. अगर आप चाहें, तो हम इन सब बातों को अपने आदेश में भी लिख सकते हैं."

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क्यों अवमानना की कार्रवाई न की जाए नोटिस? 

BMC कमिश्नर ने निर्देशों का पालन करने के लिए और समय मांगा था. लेकिन उनकी अर्जी खारिज कर दी गई. साथ ही 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया. बेंच ने कमिश्नर को एक कारण बताओ नोटिस भी जारी किया, जिसमें पूछा गया कि उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों शुरू ना की जाए.

बेंच ने निर्देश दिया कि जब तक शो कॉज नोटिस पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक कमिश्नर और उनके स्टाफ को वेतन न दिया जाए.

जस्टिस बागची ने कहा,

“1 दिसंबर 2026 तक आपको वेतन नहीं मिलेगा. इसलिए उससे पहले निर्देशों का पालन करें. आप यहां आएं, उसके बाद ही आप अपना वेतन ले सकेंगे.”

अर्जी खारिज करने पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा,

"हमारा रुख बिल्कुल साफ है. हम इस अर्जी को खारिज कर रहे हैं और एक दिन की भी मोहलत नहीं देंगे. वे चाहें तो आधी रात को बैठकर आदेश पारित करें. उन्हें पता चलना चाहिए कि काम कैसे किया जाता है."

कोर्ट के निर्देशों का पालन अब तक ना हो पाने पर BMC ने दावा किया था कि उनके अधिकारियों को मराठी में लिखे दस्तावेजों का इंग्लिश में ट्रांसलेशन करवाना पड़ा. इस पर आपत्ति जताते हुए जस्टिस बागची ने कहा, "हलफनामा दायर करने वाले अधिकारी डॉ. तांबे हैं. क्या आप चाहते हैं कि हम यह मान लें कि उन्हें मराठी नहीं आती?"

क्या है मामला?

ये पूरा विवाद एक जमीन से जुड़ा है, जिस पर BMC और एक प्राइवेट डेवलपर के बीच कई सालों से कानूनी लड़ाई चल रही है. 13 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने डेवलपर को 'बृहन्मुंबई इलेक्ट्रिक सप्लाई एंड ट्रांसपोर्ट' (BEST) बस स्टैंड के लिए 3,400 वर्ग मीटर जमीन को खाली कर कॉर्पोरेशन को सौंपने का निर्देश दिया था.

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नगर निकाय को यह जिम्मेदारी दी गई थी कि वह इस प्रोजेक्ट को अपने हाथ में ले और तीन महीने के भीतर बस स्टैंड को चालू कर दे. लेकिन तीन महीने बाद नवंबर 2025 में कोर्ट ने अतिक्रमण न हटाने पर चिंता जताई थी. 

इसके बाद अदालत ने कमिश्नर से एक पर्सनल एफिडेविट मांगा था, जिसमें जमीन पर रह रहे लोगों, उन्हें जारी किए गए बेदखली नोटिस और उनके किरायेदारी या मालिकाना हक के दावों का पूरा ब्योरा देने को कहा गया था. लेकिन एक साल बात तक भी कुछ नहीं हुआ. एक साल बाद भी BMC ने और समय मांगते हुए अर्जी दाखिल की, जिसे कोर्ट ने खारिज करते हुए नाराजगी जताई.

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