मच्छरों की भिनभिनाने वाली आवाज़ सोते वक्त बहुत बुरी लगती है. खून चूसते हैं वो अलग. इनसे निपटने का कोई माकूल तरीका नहीं है. बस खुजलाते हुए अनुभव हैं. तमाम जतन करके भी इससे निजात मिलती नहीं. लेकिन जो हम आपसे कहें कि AI आपको इस भिनभिनाहट से मुक्ति दिला सकता है तो आपको यकीन नहीं होगा. लेकिन ऐसा हो गया है. एक चीनी स्टार्टअप का दावा है कि वह एआई से पहचानकर उड़ते हुए मच्छरों को पहचान कर लेजर लाइट से उनका खात्मा कर सकता है.
चीन में मच्छर चटकाने के लिए 'गब्बर सिंह' डिवाइस बना, पंख ही जला देगा
चीनी कंपनी Photon Matrix ने 1,000 डॉलर (लगभग 85,000-90,000 रुपये) की कीमत वाला एक ऐसा एआई पावर डिवाइस बाजार में उतारना शुरू किया है जो उड़ान के दौरान मच्छरों को ट्रैक करता है और उनके पंखों को जला देता है.

चीनी कंपनी Photon Matrix ने 1,000 डॉलर (लगभग 85,000-90,000 रुपये) की कीमत वाला एक ऐसा एआई पावर डिवाइस बाजार में उतारना शुरू किया है जो उड़ान के दौरान मच्छरों को ट्रैक करता है और उनके पंखों को जला देता है. गब्बर सिंह टाइप मामला लग रहा ये तो. बस जलाने का फर्क है. गब्बर ने ठाकुर के हाथ काटे थे. ये पंख जलाएगा.
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक चांगझोऊ स्थित 'फोटोन मैट्रिक्स' का कहना है कि उसे अपने 'लेज़र मॉस्किटो एयर डिफेंस सिस्टम' के लिए पहले ही 5,000 प्रीपेड ऑर्डर मिल चुके हैं और वह बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करने की तैयारी कर रही है. कंपनी चीन, यूरोप और अमेरिका में जरूरी रेगुलेटरी मंजूरी हासिल करने के लिए भी काम कर रही है.
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कंपनी ने इस तकनीक का प्रदर्शन भी किया जिसमें हवा में उड़ते मच्छर एक के बाद एक नीचे गिरते देखे गए, और इस दौरान रंगीन रोशनी की हल्की चमक भी दिखाई दी. सफेद रंग की, लगभग ईंट के आकार की इस मशीन ने एक के बाद एक मच्छरों को तेजी से zapped किया, जिनमें से हर मच्छर एक छोटे से 'पॉप' (धमाके) के साथ हरे या नीले रंग की लौ में भस्म हो गया.
हालांकि कंपनी के मुताबिक ये लेज़र मच्छरों के उड़ने की क्षमता को नष्ट कर देता है, लेकिन ज़रूरी नहीं कि वे तुरंत मर ही जाएं. कंपनी के संस्थापक वांग चुआन के अनुसार, उड़ने में अक्षम हो चुके कुछ मच्छर कई दिनों तक जीवित रह सकते हैं.
मच्छर मारने वाली या मच्छरों को गिराने वाली मशीन ऑटोनॉमस व्हीकल्स की तकनीक का इस्तेमाल करती है. इसमें लिडार (lidar) की मदद से एक तय इलाके की निगरानी की जाती है और वहां हिलने-डुलने वाले छोटे लक्ष्यों की पहचान की जाती है. यह मशीन हर सेकंड 100,000 कम तीव्रता वाली लेज़र पल्स भेजकर कीड़ों का पता लगाती है, और फिर उनके पंखों पर एक बहुत तेज़ लेज़र बीम डालती है.
LiDAR (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग-Light Detection and Ranging) एक उन्नत रिमोट सेंसिंग तकनीक है, जिसका उपयोग किसी वस्तु या सतह की सटीक दूरी मापने और उसका 3D मैप या मॉडल तैयार करने के लिए किया जाता है. Tesla की कारों से लेकर बिना ड्राइवर वाली कैब में इसका खूब इस्तेमाल होता है. यह तकनीक ठीक उसी सिद्धांत पर काम करती है जैसे चमगादड़ (Bats) या सोनार (Sonar) करते हैं, लेकिन इसमें ध्वनि तरंगों के बजाय लेज़र लाइट (Laser Light) का उपयोग किया जाता है.
सेफ्टी को लेकर सवालटाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस डिवाइस में सबसे बड़ी बाधा सुरक्षा की हो सकती है. सिस्टम में 'क्लास 4' लेज़र का इस्तेमाल होता है, जो इतना शक्तिशाली है कि पल भर में आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. इस खतरे को कम करने के लिए, 'फोटॉन मैट्रिक्स' ने मशीन में ऐसे कैमरे और सेंसर लगाए हैं जो लोगों, जानवरों और खतरनाक रिफ्लेक्शन (परावर्तन) को पहचान सकते हैं, और ज़रूरत पड़ने पर लेज़र को अपने आप रोक देते हैं.
संस्थापक वांग चुआन ने बताया कि कंपनी ने शुरुआत में कम पावर वाले लेज़रों के साथ प्रयोग किया था, लेकिन वे भरोसेमंद नहीं लगे. अंत में, इंजीनियरों ने एक ज़्यादा शक्तिशाली लेज़र से बहुत कम समय के लिए लेज़र बीम छोड़ने का तरीका चुना. इसके खरीदारों को भी इस्तेमाल से पहले एक अनिवार्य सेफ्टी क्विज़ भी पास करना होगा.
अब मशीन वाकई में मच्छर मारेगी या मच्छर मारती रह जाएगी वो तो 'भिनभिनाता' भविष्य बताएगा. वैसे मच्छरों के खिलाफ लेजर का इस्तेमाल करने के विचार पर पहले भी काम किया जा चुका है. 2010 में 'इंटेलेक्चुअल वेंचर्स' ने इसी तरह के एक कॉन्सेप्ट का प्रदर्शन किया था, लेकिन यह कभी कोई कमर्शियल प्रोडक्ट नहीं बन पाया.
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