तारीख 10 मई, 2025. रात के करीब डेढ़-पौने दो के आसपास का टाइम था. ये वो तारीख थी जब भारतीय सेना का ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जारी था. आतंकी ठिकानों पर हमले के बाद भारत ने अपनी चौकियों और सिविलियन इलाकों पर गोले दाग रही पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान पहुंचाया था. पाकिस्तान बेचैन हो रहा था. इसी बीच उसने एक गलती कर दी. पाकिस्तानी मिलिट्री ने दिल्ली की ओर एक मिसाइल दागी. मीडिया रिपोर्ट्स कहती हैं कि ये एक हाई स्पीड मिसाइल फतह थी. इसकी स्पीड मैक 5 से भी अधिक बताई जाती है. इस मिसाइल को हरियाणा के सिरसा में लगे बराक एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक लिया.
Operation Sindoor का असली हीरो सुखोई, ब्रह्मोस के साथ मिलकर उड़ाई पाकिस्तान की नींद!
Rafale भारत का सबसे एडवांस फाइटर जेट है, लेकिन Operation Sindoor में पाकिस्तान के Airbases पर हुई स्ट्राइक्स में Su-30MKI ने बड़ी भूमिका निभाई. इसी सुखोई से Brahmos Supersonic Cruise Missile दागी गई.

6-7 मई की दरम्यानी रात के बाद ये एक बड़ा Escalation था. अब राजधानी पर हमला हुआ तो भारत के लिए शक की कोई गुंजाइश ही नहीं बची. चंद मिनटों के भीतर इंडियन एयरफोर्स के सुखोई Su-30MKI एयरबॉर्न (हवा में) हो गए. सुखोई की मारक क्षमता और ताकत की वजह से इसे इंडियन एयरफोर्स का बैकबोन कहा जाता है. उस रात इस जेट और उसके पायलट्स ने इसे फिर से साबित कर दिखाया.

सिरसा पर मिसाइल को इंटरसेप्ट हुए लगभग 15-20 मिनट बीत चुके थे. रात के करीब दो, सवा दो का टाइम हो रहा होगा. पाकिस्तान के रावलपिंडी शहर में लोग सो रहे थे. लेकिन 'पाकिस्तानी मिलिट्री हेडक्वार्टर - GHQ रावलपिंडी' में बैठे जनरल्स और अधिकारियों की नींद उड़ी हुई थी. इस बार वजह कुछ और थी. दरअसल इंडिया के जेट्स ने पाकिस्तान के 11 एयरबेस को टारगेट पर ले लिया था. GHQ में बैठे पाकिस्तान के अफसर अगली मिसाइल लॉन्च करने की सोचते, तभी एक जोरदार ब्लास्ट सुनाई दिया. सुखोई Su-30MkI से लॉन्च हुई एक ब्रह्मोस मिसाइल सीधा रावलपिंडी के नूर खान एयरबेस पर आकर गिरी.
अभी वहां मौजूद पाकिस्तानी एयरफोर्स के लोग कुछ समझते, तब तक और हमले हो गए. न सिर्फ ब्रह्मोस, बल्कि भारत ने हेरोप नाम के ड्रोन से भी रावलपिंडी के चकलाला स्थित नूर खान एयरबेस पर हमला किया. कुछ ही सेकेंड्स में पूरा रनवे तबाह हो गया. अब यहां ये जानना जरूरी है कि ये मोमेंट ऑपरेशन सिंदूर का टर्निंग पॉइंट कैसे बन गया.

दरअसल चकलाला एयरबेस को पाकिस्तानी आर्मी और एयरफोर्स ऑपरेट करते हैं. रावलपिंडी में ही पाकिस्तान का मिलिट्री हेडक्वार्टर भी है. मूवमेंट के लिए फौज का हर बड़ा अधिकारी इसी एयरबेस का इस्तेमाल करता है. इसलिए पाकिस्तान इस हमले से सन्न रह गया. लेकिन इंडियन एयरफोर्स ने ठान लिया था कि पाकिस्तानी एयरफोर्स को उन्हें मिसाइल दागने लायक नहीं छोड़ना है. इंडियन एयरफोर्स ने चकलाला के बाद 10 और एयरबेस पर निशाना साधा. एक के बाद एक ताबड़तोड़ हमले किए. इंडियन एयरफोर्स के सुखोई Su-30MkI ही इन स्ट्राइक्स का नेतृत्व कर था.
यूं तो इंडियन एयरफोर्स का सबसे एडवांस जेट रफाल है. लेकिन इन स्ट्राइक्स में सुखोई ने ही एयरफोर्स को लीड किया. डिस्कवरी चैनल पर रिलीज हुई डॉक्यूमेंट्री, Declassified: Operation Sindoor में भी इस बात का जिक्र मिलता है. अब सुखोई के कारनामे तो सुन लिए, इसके इंडियन एयरफोर्स में शामिल होने की कहानी भी जान लेते हैं.

90 के दशक की बात है, चीन-पाकिस्तान की एयरफोर्स तेजी से अपनी ताकत बढ़ा रही थी. इधर इंडियन एयरफोर्स एक ऐसा फाइटर जेट ढूंढ़ रही थी, जो मल्टीरोल यानी हर तरह के ऑपरेशंस करने में सक्षम हो. लिहाजा, बहुत सोच विचार के बाद 30 नवंबर 1996 को रूस की राजधानी मॉस्को में एक ऐतिहासिक डील साइन हुई. इस डील के तहत भारत 50 सुखोई Su-30MkI लेने वाला था.
अब यहां नाम की कहानी भी बड़ी दिलचस्प है. सुखोई नाम सुनकर ये कुछ-कुछ हिंदुस्तानी सा साउंड करता है. लेकिन ये नाम इसलिए पड़ा क्योंकि इसे तब सुखोई कॉर्पोरेशन बनाती थी. MKI का मतलब मॉडर्न कमर्शियलाइज्ड फॉर इंडिया था. इस रूसी जेट में इंडियन एयरफोर्स के लिए कई खास बदलाव किए गए थे. फिर जनवरी 1997 में भारत में 8 सुखोई जेट्स आए. इन्हें पुणे के लोहेगांव एयरबेस पर तैनात किया गया. सुखोई को स्क्वाड्रन No. 24 Squadron, निकनेम Hawks के नाम से जाना गया.

आगे चलकर सन 2000 में नासिक स्थित HAL प्लांट में सुखोई बनाने का करार हुआ. 2007 में 40 और फिर 2012 में 42 और सुखोई एयरफोर्स में शामिल हुए. अब नंबर 272 पर पहुंच चुका था. फिर इस जेट को भारत ने नई तकनीक और बदलती ज़रूरतों के मुताबिक ढालना शुरू किया. इसमें अपनी जरूरत के हिसाब से सेन्सर्स और रडार को और मॉडर्न बनाया. भारत के सुखोई की खासियतों पर एक नजर डालें तो ये -
- डबल इंजन वाले इस जेट को 2 पायलट उड़ाते हैं. एक पायलट होता है, दूसरा वेपन सिस्टम यानी हथियारों का ऑपरेटर. एयरफोर्स की भाषा में Wizzo कहते हैं.
- एक बार की उड़ान में ये 3 हजार किलोमीटर की रेंज रखता है.
- मैक 2 की स्पीड तक उड़ सकता है.
- 8 हजार किलोग्राम तक के हथियार ले जा सकता है. साथ ही इसमें 12 हार्ड पॉइंट्स हैं. माने वो जगह जहां हथियार लगाए जाते हैं.
- इसमें N011M PESA रडार लगा है. ये रडार लगभग 150 किलोमीटर की दूरी से 15 से अधिक टारगेट्स ये खतरों को ट्रैक कर सकता है.

हालांकि कुछ सुखोई को Modernization Program के तहत मेड इन इंडिया 'Virupaksha' रडार से रिप्लेस भी किया जा रहा है. सूत्रों के मुताबिक इसकी रेंज 350 किलोमीटर से अधिक होगी. साथ ही, ये एक साथ 70 से अधिक हवाई खतरों को ट्रैक कर सकेगा.
सुखोई में ब्रह्मोस लगाया गया2016 में सुखोई में ब्रह्मोस लगा कर टेस्ट शुरू किया गया. 2019 आते-आते ये टेस्ट सफल रहा. इस बारे में लल्लनटॉप के खास शो गेस्ट इन द न्यूजरूम में खुद ब्रह्मोस Aerospace के पूर्व DG, डॉ सुधीर कुमार मिश्रा ने जानकारी दी थी. उन्होंने बताया था कि ब्रह्मोस जैसे क्रिटिकल और खतरनाक सिस्टम को सुखोई में लगाना एक मुश्किल काम था. सबसे बड़ा डर ये था कि लॉन्च होने के बाद मिसाइल आगे जाने की जगह कहीं पीछे न आ जाए. इससे एयरक्राफ्ट को खतरा था. हालांकि एयरफोर्स को टेक्निशियंस और साइंटिस्ट्स पर पूरा भरोसा था. लेकिन ऐसे क्रिटिकल टेस्ट्स में डर लगना भी स्वाभाविक है. क्योंकि फेल हुए तो पायलट की जान भी खतरे में पड़ सकती है.
लेकिन इंडियन एयरफोर्स, HAL, DRDO और ब्रह्मोस Aerospace के साइंटिस्ट्स की बदौलत ये टेस्ट सफल हुआ. इसके बाद सुखोई को ब्रह्मोस नाम का एक खतरनाक हथियार मिला. और इसी सुखोई और ब्रह्मोस की जोड़ी ने ऑपरेशन सिंदूर में अपना कमाल दिखाया. डिस्कवरी चैनल की डॉक्यूमेंट्री में महिला पायलट कहती हैं-
मैं मुरीदके पर हमला करने वाले एक स्ट्राइक पैकेज का हिस्सा थी. हमने उन पर बिल्कुल सटीक हमले किए. हम या कोई भी सोल्जर इसी दिन के लिए यूनिफार्म पहनता है.

कुल मिलाकर देखें तो इंडियन एयरफोर्स के जांबाज पायलट्स, सुखोई जैसे शानदार जेट, और ब्रह्मोस जैसे सटीक और घातक हथियार ने पाकिस्तान के 11 एयरबेसेज को धुआं-धुआं कर दिया. हालांकि इन स्ट्राइक्स में रफाल से निकली SCALP, HAMMER और Rampage जैसी मिसाइलों का भी इस्तेमाल हुआ. Sukhoi अकेला हीरो नहीं था. लेकिन Operation Sindoor ने दिखाया कि भारत ने Su-30MKI को सिर्फ air-superiority fighter नहीं रहने दिया, बल्कि उसे long-range stand-off strike platform में बदल दिया.
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और ब्रह्मोस का हमला ऐसा था कि पाकिस्तानी DGMO मेजर जनरल काशिफ अब्दुल्लाह ने इंडियन DGMO लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई को फोन पर कहा,
सर, आपने तो अब हमारे एयरबेसेज पर इतने ब्रह्मोस मार दिए. अब तो आप संतुष्ट हो गए होंगे.
तो ये थी कहानी ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तानी ठिकानों पर आग बरसाने वाले सुखोई फाइटर जेट, उसे उड़ाने वाली एक महिला पायलट और ब्रह्मोस की.
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