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'बोलो जुबां केसरी' के लिए FDA का शाहरुख खान, अजय देवगन को नोटिस भेजना कितना सही?

महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के नए कमिश्नर तुकाराम मुंडे अपने सख्त फैसलों के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने बॉलीवुड के तीन बड़े स्टार्स शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को 16 अगस्त को शो कॉज (कारण बताओ) नोटिस जारी किया है. लेकिन कानून के जानकारों की मानें तो इन एक्टर्स पर एक्शन लेना इतना आसान नहीं होगा.

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विमल इलायची के प्रचार के लिए शाहरुख, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस मिला है. (इंडिया टुडे)

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  • महाराष्ट्र FDA ने शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल इलायची के विज्ञापन में परोक्ष प्रचार (Surrogate Advertising) के आरोप में 16 अगस्त को कारण बताओ नोटिस जारी किया।
  • महाराष्ट्र में पान मसाला के प्रतिबंध के कारण कंपनियां इलायची जैसे उत्पादों के माध्यम से प्रतिबंधित उत्पाद का प्रचार करती हैं, जिससे FDA ने इस मामले में जांच शुरू की।
  • FDA ने तीनों अभिनेताओं से विज्ञापन रोकने, सोशल मीडिया पोस्ट हटाने और भविष्य में ऐसा न करने का आश्वासन मांगा है, अब इस मामले की कानूनी वैधता न्यायालय में तय होगी।

महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने एक्टर शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को विमल इलायची के विज्ञापन के मामले में कारण बताओ नोटिस भेजा है. इस नोटिस ने एक नई कानूनी बहस को जन्म दिया है. सवाल उठ रहा है कि क्या FDA किसी प्रतिबंधित प्रोडक्ट के परोक्ष प्रचार (Surrogate Advertising) के आरोप में मशहूर हस्तियों के खिलाफ एक्शन ले सकता है.

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इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, FDA के नए कमिश्नर तुकाराम मुंढे अपने सख्त फैसलों के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने बॉलीवुड के तीन बड़े स्टार्स शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को 16 अगस्त को शो कॉज (कारण बताओ) नोटिस जारी किया.

FDA ने एक्टर्स पर क्या आरोप लगाए हैं?

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ये तीनों एक्टर्स टीवी और डिजिटल मीडियम पर विमल इलायची का विज्ञापन करते हैं, जिसकी फेमस टैगलाइन है, 'बोलो जुबां केसरी. ' FDA का आरोप है कि यह सरोगेट विज्ञापन (Surrogate Advertisement) है. किसी बैन प्रोडक्ट (जैसे शराब या गुटखा/पान मसाला) का विज्ञापन सीधे टीवी पर दिखाया नहीं जा सकता, तो कंपनियां उसी नाम, लोगो और टैगलाइन से कोई दूसरा प्रोडक्ट (जैसे सोडा, पानी या इलायची) बाजार में उतारकर उसका विज्ञापन करती हैं. FDA का कहना है कि इलायची के बहाने असल में प्रतिबंधित विमल पान मसाला का ही प्रचार किया जा रहा है, जो महाराष्ट्र के युवाओं को गुमराह कर रहा है.

FDA ने एक्टर्स से मांगा जवाब

FDA ने तीनों स्टार्स को इस मामले में जवाब देने के लिए 15 दिनों का समय दिया है. साथ ही कुछ निर्देश भी दिए हैं.

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# FDA ने तीनों स्टार्स को कंपनी के साथ उनके कॉन्ट्रैक्ट और विज्ञापन में उनकी भूमिका के बारे में बताने को कहा है.

# रेगुलेटरी एजेंसी ने तीनों स्टार्स के जरिये विमल ब्रांड का किसी भी तरह का प्रचार कराना तुरंत बंद करने का निर्देश दिया है.

# FDA ने तीनों एक्टर्स से अपने सोशल मीडिया अकाउंट (इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब) से इलायची और पान मसाला से जुड़े सभी वीडियो और पोस्ट तुरंत डिलीट करने का निर्देश दिया है.

# FDA ने शाहरुख, अजय और टाइगर से भविष्य में ऐसे किसी भी विज्ञापन का हिस्सा नहीं बनने के लिए लिखित में आश्वासन देने की मांग की है.

किस कानून के तहत FDA ने लिया एक्शन?

धारा 24 : यह भ्रामक (झूठे या गुमराह करने वाले) फूड प्रोडक्ट्स के विज्ञापनों पर रोक लगाती है.

धारा 53 : इसके तहत अगर कोई व्यक्ति झूठे या गुमराह करने वाले वाले विज्ञापन के पब्लिकेशन (Party to the Publication) में शामिल होता है, तो उस पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है.

कानून के जानकारों की क्या राय है?

इंडिया टुडे ने सुप्रीम कोर्ट और बॉम्बे हाई कोर्ट के वकीलों से बात करके यह समझने की कोशिश की है कि क्या महाराष्ट्र FDA के पास शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ के खिलाफ कार्रवाई करने का कानूनी अधिकार है. सीनियर वकीलों ने बताया कि इस मामले में कई पेच हैं.

क्या एक्टर पब्लिशर हैं?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक Consumer Protection Act में ब्रांड एंबेसडर/एंडोर्सर (प्रचारक) शब्द की साफ-साफ परिभाषा  है, लेकिन जिस FSS Act (खाद्य कानून) के तहत FDA ने नोटिस भेजा है, उसमें एंडोर्सर शब्द की परिभाषा ही नहीं है.

FDA एक्टर्स को विज्ञापन पब्लिश करने में भागीदार मानकर कानूनी दायरा बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जो कोर्ट में टिकेगा या नहीं, यह तय नहीं है.

FDA खुद जुर्माना नहीं लगा सकता

धारा 53 में 10 लाख के जुर्माने का जिक्र तो है, लेकिन FDA खुद यह जुर्माना नहीं लगा सकता. जुर्माना लगाने की शक्ति सिर्फ एडिशनल डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (ADM) लेवल के अधिकारी के पास होती है. FDA को पहले मामले को ADM कोर्ट में ले जाना होगा.

सोशल मीडिया पोस्ट डिलीट कराने का अधिकार नहीं

वकीलों के मुताबिक, FDA किसी एक्टर को उनके सोशल मीडिया से कॉन्टेंट हटाने का लीगल ऑर्डर नहीं दे सकता. इंटरनेट से कॉन्टेंट हटाने का कानूनी अधिकार सिर्फ सूचना एंव प्रोद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 69A के तहत केंद्र सरकार या कोर्ट के पास है.

असल दोषी कंपनी या प्रशासन?

सुप्रीम कोर्ट के वकीलों का कहना है कि FDA को सबसे पहले विमल कंपनी से सवाल करना चाहिए था कि उनकी इलायची एक अलग प्रोडक्ट के तौर पर बिकती है या नहीं. एक्टर्स को कंपनी के बिजनेस डेटा के बारे में जानकारी होगी इसकी संभावना कम ही है.

इसके अलावा, अगर महाराष्ट्र में पान मसाला पर बैन है और फिर भी वह बाजार में मिल रहा है, तो यह पुलिस और स्थानीय प्रशासन की नाकामी है. इसका ठीकरा सिर्फ विज्ञापन करने वाले स्टार्स पर नहीं फोड़ा जा सकता. 

वीडियो: पान मसाला के ऐड के लिए शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ को नोटिस

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