स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के नोटिस का तो इन दिनों जलवा है. दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता हों या पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल. पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी हों या चुनाव आयुक्त एसएस संधू. दिल्ली के कई दिग्गज लोगों के घरों तक उसका आना-जाना हो गया. सवाल उठा कि वोटर लिस्ट की सफाई में जब VIP लोगों का ये हाल है तो आम आदमी का क्या होगा? इस ‘किरकिरी’ के बीच चुनाव आयोग ने बूथ लेवल ऑफिसर्स के लिए बने ऐप में एक ‘Mark VIP’ फीचर जोड़ दिया है. हालांकि, ये फीचर क्यों जोड़ा गया, किसने जोड़ा, इसे जोड़ने का अधिकार किसके पास है इसकी जानकारी नहीं मिली है.
चुनाव आयोग ने SIR प्रोसेस में 'Mark VIP' का ऑप्शन डाला, कौन हैं ये लोग?
16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे SIR के बीच BLO ऐप में ‘Mark VIP’ नाम का फीचर जोड़े जाने की जानकारी सामने आई है. इस फीचर से VIP मतदाताओं को चिह्नित किया जा सकता है, लेकिन इसे क्यों और किसके आदेश पर जोड़ा गया, इस पर चुनाव आयोग की ओर से जवाब नहीं आया है.

सवाल उठ रहे हैं कि क्या ये फीचर नागरिकों को ‘आम नागिरक’ और ‘VIP’ कैटेगरी में बांट देगा? इसके बाद VIP लोगों को एसआईआर प्रक्रिया में ज्यादा तरजीह दी जाएगी, जबकि आम आदमी को कतारों में खड़े होकर अपना काम कराना होगा. चुनाव आयोग ने इस पर जवाब दिया है. वो जानेंगे, लेकिन पहले ये जान लें कि ऐप में ये बदलाव किया कब गया.
SIR में अब 'Mark VIP'देश के 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) चल रहा है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बीच आयोग ने बूथ लेवल के अफसरों (BLOs) के लिए इस्तेमाल होने वाले ‘BLO ऐप’ में एक बड़ा बदलाव किया है. इसमें एक फीचर जोड़ा गया है, जो खास वोटरों के VIP स्टेटस को मार्क करने के लिए है. दिल्ली में SIR करा रहे बीएलओ के ऐप में ‘Mark VIP’ नाम का ये फीचर मौजूद है. दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के दफ्तर के अफसरों ने पुष्टि की कि ‘BLO App’ को 30 जुलाई को अपडेट किया गया था. इसी दौरान इसमें ‘Mark VIP’ वाला फीचर जोड़ा गया.

हालांकि, दिल्ली के CEO दफ्तर के एक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर HT से कहा कि ऐप या सॉफ्टवेयर में CEO ऑफिस अपनी तरफ से कोई बदलाव नहीं कर सकता. इसके लिए आदेश सीधे केंद्रीय चुनाव आयोग से आते हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, ऐप में बदलाव के बारे में जानकारी सिर्फ ‘Apple App Store’ के रिकॉर्ड में दिख रहा है. Android Play Store पर इस चेंज का कोई रिकॉर्ड मौजूद नहीं है. एप्पल पर ऐप का ये अपडेट 31 जुलाई को दर्ज किया गया, जिसमें लिखा था- ‘mark VIP elector related changes’. यानी ‘VIP मतदाताओं से जुड़े बदलावों को चिह्नित करना.’
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रिपोर्ट प्रकाशित करने वाले हिंदुस्तान टाइम्स ने चुनाव आयोग के अधिकारियों से पूछा कि ऐप में यह फीचर क्यों जोड़ा गया और इसे जोड़ने का अधिकार किसके पास था? लेकिन आयोग की ओर से अब तक कोई जवाब नहीं मिला है. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि बीएलओ के ऐप में ये नया फीचर बंगाल में SIR के दौरान नहीं था, लेकिन दिल्ली और हरियाणा में चल रही प्रक्रिया के दौरान बीएलओ के ऐप में ‘मार्क VIP’ वाला ये फीचर मौजूद है.

HT की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयोग वोटर्स में किसे ‘VIP’ मानता है ये तो नहीं पता, लेकिन आयोग के मार्च 2023 के ‘Manual on Electoral Rolls’ में ‘Marked Electors’ यानी ‘चुनिंदा मतदाताओं’ का जिक्र है. इसके तहत सांसद (MP), विधायक (MLA), विधान परिषद सदस्य (MLC), घोषित पदों पर बैठे लोग और कला-संस्कृति, पत्रकारिता और खेल जैसे क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों को चिह्नित किया जा सकता है. इसके अलावा न्यायपालिका और सरकारी सेवाओं से जुड़े लोगों को भी इस कैटेगरी में रखा जा सकता है.
चुनाव आयोग ने हाल ही में साफ भी किया कि उसकी प्रायोरिटी दिव्यांग वोटर्स, 80 साल से अधिक उम्र के बुजुर्ग, दिग्गज कलाकार, खिलाड़ी, सार्वजनिक क्षेत्र के अधिकारी यानी पब्लिक सर्वेंट, वरिष्ठ पत्रकार आदि आते हैं. बिहार में जब एसआईआर की शुरुआत हुई थी, उसी समय जारी नियमावली (SOP) में इसका साफ-साफ जिक्र किया गया था.
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