अमेरिका में कई भारतीय नागरिक काम करते हैं, लेकिन आगे कितने कर पाएंगे इसपर संदेह है. हाल ही में सिलिकॉन वैली (Silicon Valley) में बड़ी टेक कंपनियों ने जॉब कट के ज़रिए हज़ारों लोगों को नौकरी से निकाल दिया है. इसकी वजह से उनके जीवन में अस्तित्व बचाने की चुनौती (existential crisis) आ गया है. साथ ही एक डर कि अगले 60 दिनों में उनका फ्यूचर क्या होगा? 60 दिन ही क्यों? इसकी बात आगे करेंगे. पहले हाल में हुए जॉब कट्स से कितने लोग प्रभावित हुए हैं, उसकी बात कर लेते हैं.
साल भर में 1 लाख लेऑफ, Silicon Valley में काम कर रहे भारतीयों की होगी घर वापसी?
Silicon Valley mass layoff: पिछले एक साल में सिलिकॉन वैली की कई कंपनियों ने मिलकर 1 लाख से ज्यादा लोगों को नौकरी से निकाला है. इनमें बहुत से भारतीय भी हैं. भारतीय नागरिक अमेरिकी H-1B वीजा के सबसे बड़े उपभोक्ता हैं.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में सिलिकॉन वैली की टेक कंपनियां जॉब कटिंग मोड (job cutting mode) में आ गई हैं. 20 मई की सुबह इंस्टाग्राम और फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा ने 8000 कर्मचारियों को जॉब से निकाल दिया. मेटा ने सुबह-सुबह कर्मचारियों को एक मेल भेजा, जिसमें उनका टर्मिनेशन लेटर था. बताया गया कि पहले उन्हें वर्क फ्रॉम होम के लिए भेजा गया उसके बाद उन्हें ये मेल आया. इसी कड़ी में अमेज़न ने भी कई राउंड्स में लोगों को नौकरी से निकाला है.
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बता दें, सिलिकॉन वैली अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में स्थित एक इनोवेशन हब है, जहां Apple, Google और Meta जैसी बड़ी कंपनियों के हेड ऑफिस हैं. यहां हाई टेक इनोवेशन (High-tech innovation) और स्टार्टअप (Startup) हर तरह की कंपनियां फलती-फूलती हैं, जो लाखों लोगों के जीवन का आधार है. रिपोर्ट बताती है कि जैसे ही अमेरिका में भारतीय नागरिकों की जॉब छूटती है वैसे ही उनके सिर पर तलवार लटकने लगती है. अमेरिका में उनके रहने के हक़ पर सवाल खड़े हो जाते हैं.
Silicon Valley में बड़ा लेऑफLayoffs.fyi के मुताबिक, पिछले एक साल में सिलिकॉन वैली की कई कंपनियों ने मिलकर कुल 1 लाख से ज्यादा लोगों को नौकरी से निकाला है. इनमें बहुत से विदेशी नागरिक हैं, उनमें भी भारतीय मूल के नागरिक ज्यादा है. भारतीय नागरिक अमेरिकी H-1B वीजा के सबसे बड़े उपभोक्ता हैं. अमेरिका के सरकारी डेटा के मुताबिक, फाइनैंशियल ईयर 2024-2025 में भारतीय नागरिकों ने H-1B वीजा के लिए भर-भरकर अप्लाई किया था. बताया गया कि मेटा इस साल AI (artificial intelligence) पर 100 बिलियन डॉलर इन्वेस्ट करने वाली है, इसलिए छंटनी की गई है.
H-1B वीजा रूल क्या है?रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीयों के लिए जॉब कट के बाद कई चुनौतियां सामने आ जाती है. अमेरिका में रहने के लिए उन्हें संघर्ष करना पड़ता है. US citizenship and immigration services (USCIS) के मुताबिक, जब H-1B वीजा के लाभार्थियों की नौकरी चली जाती है तब उन्हें केवल 60 दिन का समय दिया जाता है. इन दो महीनों में उनके पास तीन ऑप्शन होते हैं. एक, कोई दूसरी नौकरी ढूंढें जो उनके वीजा को स्पॉनसर कर पाए. दूसरा, किसी दूसरे वीजा कैटेगरी के लिए अप्लाई करें या फिर तीसरा, देश ही छोड़ कर चले जाएं. सबसे ज़रूरी बात ये है कि ये 60 दिन का समय उस दिन से गिना जाता है जब एम्प्लॉई का ऑफिस में लास्ट वर्किंग डे होता है, न कि उस दिन से जब ऑफिस से उनका अकाउंट सेटल होता है.
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अब यहां सबसे बड़ी दिक्कत आती है नई नौकरी ढूंढने में. बेरोज़गार लोगों के लिए B-1 और B-2 विजिटर वीजा का विकल्प है, लेकिन अब अमेरिकी अधिकारियों ने इसपर कड़ाई कर दी है. यानी हर फॉर्म बारीकी से चेक किया जाता है और दो महीने का समय पलक झपकते ही फुर्र हो जाता है. अब सवाल वही है कि AI की वजह से और कितने लोगों को अपनी नौकरी से हाथ धोना होगा?
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