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थार रेगिस्तान से ज्यादा तप रहा बांदा, तापमान सुनकर ही जलन महसूस होगी

World Hottest City UP Banda: बांदा के तापमान का पूरा-पूरा 'दोष' मौसम को नहीं दिया जा सकता. यहां इंसानी गतिविधियों ने भी किरदार निभाया है, जिस वजह से ये जिला 'हीट आइलैंड' में बदल रहा है.

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बुंदेलखंड का बांदा काफी गर्म जिला रहा है. (फोटो-इंडिया टुडे)

बुंदेलखंड का बांदा जिला थार रेगिस्तान से भी ज्यादा तप रहा है. 20 मई को यहां पारा 48 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया. 19 मई को भी यहां का टेंप्रेचर 48.2 डिग्री सेल्सियस था.

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अप्रैल में ही बांदा 47.6 डिग्री सेल्सियस के साथ दुनिया के गर्मी वाले चार्ट में पहले स्थान पर आया था. इस जिले ने तीन बार एशिया का सबसे ज्यादा तापमान भी दर्ज किया है.

बांदा का अब तक का सबसे अधिक तापमान 49.2 डिग्री सेल्सियस 10 जून 2019 को दर्ज किया गया था. जिले का तापमान बार-बार 47 और 48 डिग्री सेल्सियस के बीच उछल-कूद कर रहा है.

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बांदा का अब तक का सबसे गर्म दिन 10 जून 2019 को दर्ज किया गया था. (फोटो-इंडिया टुडे) 

मौसम विभाग (IMD) के अधिकारियों के अनुसार, पूरे उत्तर प्रदेश में तापमान बढ़ने का कारण थार रेगिस्तान से आने वाली सूखी और तेज पश्चिमी हवाएं हैं. साफ आसमान और लगातार पड़ रही सूरज की रोशनी की वजह से इसका असर दक्षिणी जिलों, खासकर बुंदेलखंड क्षेत्र में ज्यादा गंभीर रहा है. यहां की पथरीली जमीन दिन के समय तेजी से गर्म हो जाती है और लंबे समय तक गर्मी को अपने अंदर बनाए रखती है.

'हीट आइलैंड' में बदला बांदा?

बांदा के तापमान का पूरा-पूरा 'दोष' मौसम को नहीं दिया जा सकता. यहां इंसानी गतिविधियों ने भी किरदार निभाया है, जिस वजह से ये जिला 'हीट आइलैंड' में बदल रहा है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, बांदा के तपने की अहम वजहें बहुत कम हरियाली, नदियों में घटते जलस्तर, बड़े पैमाने पर रेत का खनन और कंक्रीट से बनी सतहों के लगातार बढ़ते दायरे हैं.

जियोलॉजिस्ट की मानें तो, बांदा ‘गर्मी के एक दुष्चक्र’ में फंसा हुआ है, क्योंकि यहां न तो हरियाली है और न ही नमी. बांदा के 105 वर्ग किलोमीटर के इलाके में सिर्फ 3% ही हरियाली है. TOI से बात करते हुए झांसी में बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रोफेसर अमित पाल ने बताया,

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"बांदा जैसे शहरों में सबसे बड़ी समस्या जमीन का अत्यधिक दोहन और नदी के तल से रेत की खुदाई है. हरियाली को हटाया जा रहा है. और उसकी जगह नई हरियाली नहीं लगाई जा रही है. यहां तक कि जिन इलाकों में पेड़ लगाए जा रहे हैं, वे भी राष्ट्रीय हरित अधिकरण की तरफ से तय किए गए नियमों के अनुसार नहीं हैं."

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के जियोलॉजिस्ट का सुझाव है कि बागवानी, वन, सिंचाई, केंद्रीय जल आयोग और लोक निर्माण विभाग जैसे विभागों को बांदा को अत्यधिक गर्मी और सूखे से बचाने के लिए एक योजना तैयार कर और उसे लागू करना चाहिए. पानी बचाने और पर्यावरण को बेहतर बनाने के लिए लोगों को भी सामने आना चाहिए. 

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