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नालों की सफाई में निकले गद्दे, सोफे, बेड, फ्रिज, ऑटोरिक्शा! BMC वालों ने माथा पीट लिया

BMC's pre-monsoon desilting drive: इस साल मानसून के मुंबई में आने की उम्मीद 5 जून तक बताई गई है. ऐसे में बृह्नमुंबई नगर निगम (BMC) के कर्मचारी पहले ही क्रेन से नाले-नालियों की सफाई में लग गए हैं. उन चीजों को हटाना शुरू कर दिया है, जो पानी के बहाव में रुकावट बनती हैं, फिर सड़कों तक पहुंच जाती है.

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मुंबई में नालों की सफाई के दौरान ऑटो, सोफा निकले हैं. (फोटो-सोशल मीडिया)

भारत में मानसून पानी और ठंडक के अलावा मुसीबतें भी लाता है. खासकर दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों के लिए जहां निकासी की व्यवस्था रद्दड़ है. बारिश के बाद रुकी हुई नालियां, तालाब बनी सड़कें चलना मुश्किल कर देती हैं. नालों की डीसिल्टिंग (गाद निकालने) में लापरवाही के लिए नगर निगम की आलोचना भी होती है.

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अब इस साल ये परेशानी फिर से ना हो, इसलिए मुंबई में नगर निगम ने बरसात का मौसम आने से पहले मुंबई के नाले-नालियों की सफाई शुरू कर दी है. लेकिन इस क्लीन अप ड्राइव के दौरान ड्रैन से सिर्फ गाद, कीचड़ ही नहीं, बल्कि ऑटो, गद्दे, बेड और भी कई चीजें निकली हैं.

इस साल मानसून के मुंबई में आने की उम्मीद 5 जून तक बताई गई है. ऐसे में बृह्नमुंबई नगर निगम (BMC) के कर्मचारी पहले ही क्रेन से नाले-नालियों की सफाई में लग गए हैं. उन चीजों को हटाना शुरू कर दिया है, जो पानी के बहाव में रुकावट बनती हैं, फिर सड़कों तक पहुंच जाती है.

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नाले की सफाई में निकला ऑटोरिक्शा

BMC के अनुसार, मंगलवार तक शहर की नालियों की गाद निकालने का लगभग 77 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है. लेकिन गाद निकालते-निकालते कर्मचारियों ने नाले से सड़ा-गला ऑटो, पुराने सोफे, गद्दे, बेड, फ्रिज, भारी इलेक्ट्रॉनिक सामान और कबाड़ का सामान निकाला है. 

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, BMC ने चेतावनी दी है कि नालियों में कचरा फेंकने वालों के खिलाफ वह अपनी कार्रवाई और तेज करेगी. फेंकी गई चीज के साइज के आधार पर 200 रुपये से लेकर 5 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. हालांकि, ये नियम लागू है, लेकिन अधिकारियों ने माना कि झुग्गी-बस्तियों वाले इलाकों में इसका पालन करवाना अभी भी चुनौती है.

MMRDA का साइट-स्पेसिफिक मानसून तैयारी प्लान

मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (MMRDA) ने शहर में चल रहे सभी मेट्रो और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में मानसून की तैयारी और इमरजेंसी-रिस्पांस के लिए एक बड़ा और कई लेवल वाला फ्रेमवर्क तैयार किया है.

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NDTV की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फ्रेमवर्क के तहत MMRDA ने मेट्रो और इंजीनियरिंग का काम कर रहे सभी कॉन्ट्रैक्टरों को निर्देश दिया है कि वे तय समय-सीमा के अंदर जरूरी 'साइट-स्पेसिफिक मानसून तैयारी प्लान' (SMPP) जमा करें.

SMPP में पानी निकालने के सिस्टम, ढलान की सुरक्षा, वॉटरप्रूफिंग, मजदूरों की सुरक्षा, इमरजेंसी में काम आने वाले सामान की लिस्ट, बाढ़ के खतरे को कम करने के उपाय और इमरजेंसी-रिस्पांस प्रोटोकॉल के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए. ये प्रोटोकॉल सीधे MMRDA के इमरजेंसी कंट्रोल रूम से जुड़े होंगे.

कॉन्ट्रैक्टर्स को ये भी निर्देश दिया गया है कि वे मलबा हटाए, खराब नालियों और फुटपाथों की मरम्मत करें, तेज हवाओं से बचाने के लिए मजबूती देने वाले ढांचों को सुरक्षित करें. और ये भी देखें कि मानसून से जुड़े खतरों को रोकने के लिए सभी बिजली के सिस्टम की जांच कर ली गई हो. 

ये भी कहा गया कि IMD और नगर निगम जब 'रेड अलर्ट' जारी करें, तो वे ऊंचे खतरे वाले कंस्ट्रक्शन के काम ना करें. शिकायतों के लिए 25 मई से 15 अक्टूबर तक एक 24x7 (दिन-रात) चलने वाला आपदा कंट्रोल रूम चालू रहेगा.

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