दिल्ली के जंतर-मंतर चल रहे प्रोटेस्ट में सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की गई है. दिल्ली पुलिस के अलावा यहां पर केंद्रीय बल ‘रैपिड एक्शन फोर्स’ (RAF) की भी तैनाती की गई है. नीले रंग की कैमोफ्लाज वाली वर्दी से पहचानी जाने वाली ये फोर्स कोई अलग बल नहीं है. ये सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स यानी CRPF का ही एक हिस्सा है. RAF के जवान, प्रोटेक्टिव गियर्स, हेल्मेट और टियर गैस जैसे हथियारों से लैस होते हैं. प्रोटेस्ट कर रहे स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज में भी सबसे आगे RAF को ही लगाया गया था. शहरी इलाकों में भीड़ को कंट्रोल करने के लिए ये प्रशासन की First Line Of Defence होते हैं.
CJP Protest में मोर्चे पर RAF, वॉटर कैनन से शॉक बैटन तक... जानें इस फोर्स की ताकत?
जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए रैपिड एक्शन फोर्स ने भी मोर्चा संभाला है. RAF यानी Rapid Action Force, केंद्रीय सुरक्षाबल CRPF की एक इकाई है. इसका मुख्य काम दंगे रोकना, भीड़ को संभालना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है.


RAF, भारत के सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) की एक खास विंग है. इसका मुख्य काम दंगे रोकना, भीड़ को संभालना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है. इसका हेडक्वार्टर देश की राजधानी नई दिल्ली में है. RAF की वेबसाइट के मुताबिक इस फोर्स की खास नीली कैमो यूनिफॉर्म शांति और पब्लिक में इसके प्रति भरोसे को दिखाती है. इस फोर्स की स्थापना 1992 में हुई थी. तब से लेकर आज तक, जहां भी प्रशासन को भीड़ कंट्रोल करना हो, वहां RAF को डिप्लॉय किया जाता है. इस फोर्स की कुछ बातों को देखें तो-
- RAF को 'जीरो रिस्पॉन्स फोर्स' कहा जाता है. जैसा कि इसके नाम से जाहिर है, ये रैपिड एक्शन यानी बहुत तेजी से कार्रवाई करने के लिए जानी जाती है.
- आमतौर पर RAF के जवान बंदूक जैसे जानलेवा हथियार इस्तेमाल नहीं करते. इसके इतर RAF भीड़ को कंट्रोल करने के लिए टियर गैस (आंसू गैस), वाटर कैनन, रबर की गोलियों (पैलेट गन), शॉक बैटन (झटका देने वाला डंडानुमा हथियार) और लाठियों का इस्तेमाल करती है.
- RAF की कुल 15 बटालियंस हैं. सभी को पूरे भारत में इस तरह से तैनात किया गया है कि जरूरत पड़ने पर ये जल्द से जल्द पहुंच सकें. हर बटालियन में एक दंगा नियंत्रण टीम, टियर गैस यूनिट और फायरिंग टीम होती है. हर बटालियन को इंस्पेक्टर जनरल यानी IG रैंक के एक अधिकारी लीड करते हैं.
- RAF की हर कंपनी में महिला और पुरुष, दोनों जवान होते हैं. इससे RAF उन सिचुएशंस में भी तैनात की जा सकती है जहां महिलाएं इनवॉल्व हैं.
- इस फोर्स को यूनाईटेड नेशंस के मिशनों में भी तैनात किया जा चुका है. अब तक RAF श्रीलंका, हैती,कोसोवो और लाइबेरिया में UN Peacekeeping मिशन के तहत भेजा जा चुका है.

RAF को तुरंत कहीं भेजना हो, तो इन्हें एयरलिफ्ट भी किया जा सकता है. इनके पास खुद की स्पेशल मोडिफाइड गाड़ियां भी होती हैं. इन गाड़ियों में भी वाटर कैनन, टियर गैस लॉन्चर, अनाउंसमेंट करने के लिए माइक, सर्विलांस/निगरानी के इक्विपमेंट्स और मेडिकल किट्स भी होती हैं.
दिल्ली के जंतर-मंतर हुए प्रोटेस्ट में सबसे आगे RAF के जवान ही थे. 20 जुलाई को संसद चलो मार्च के दौरान कम से कम 80 प्रोटेस्टर्स घायल हुए हैं. द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में भर्ती एक घायल प्रोटेस्टर को पैलेट गन यानी रबर की गोलियां लगी हैं. फिलहाल उनका इलाज चल रहा है. 25 साल के प्रदर्शनकारी शेख इरशाद मंसूरी के एक दोस्त ने द हिंदू को बताया कि कनॉट प्लेस के पालिका बाजार के पास वर्दी पहने RAF के एक जवान ने इरशाद को पैलेट गन से मारा है.
गुरुग्राम के रहने वाले इरशाद की आंख के नीचे धंसे छर्रों को निकालने के लिए सरकारी अस्पताल में सर्जरी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक अधिकतर छर्रे उनके शरीर के ऊपरी हिस्से में धंसे हुए थे. हालांकि, दिल्ली पुलिस का दावा है कि CJP प्रोटेस्ट के दौरान पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं किया गया.

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आरोप ये भी हैं कि RAF ने एक और हथियार जिसे शॉक बैटन कहा जाता है, उसका इस्तेमाल भी किया है. सोशल मीडिया पर मौजूद एक वीडियो में दिख रहा है कि एक महिला प्रदर्शनकारी पर इस हथियार का इस्तेमाल किया जा रहा है.शॉक बैटन एक डंडे जैसा इक्विपमेंट होता है, जो छूने पर बिजली का झटका देता है. ये बैटन भी RAF के गियर्स का हिस्सा है. इसका इस्तेमाल भीड़ को हटाने और खराब सिचुएशन में आत्मरक्षा के लिए भी किया जाता है.
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