अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना और एसआईटी जांच के बीच एक चिट्ठी सामने आई है. 9 पन्नों की इस चिट्ठी ने ट्रस्ट की 3 सितंबर को होने वाली बैठक से पहले हलचल मचा दी है. इस बैठक में दान चोरी विवाद के बाद ट्रस्ट के पहले चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) को चुने जाने की संभावना है. तमाम लोगों का कहना है कि चिट्ठी चंपत राय की है, जिन्हें दान चोरी विवाद के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी के पद से इस्तीफा देना पड़ा था.
कटघरे में राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा, 9 पन्नों की ये चिट्ठी चंपत राय ने लिखी?
अयोध्या के राम मंदिर ट्रस्ट की 3 सितंबर को होने वाली बैठक से पहले नौ पन्नों की एक चिट्ठी चर्चा में है. चंपत राय के करीबी लोगों का दावा है कि इसे उन्होंने लिखा है, हालांकि राय ने इसकी पुष्टि या खंडन नहीं किया है. इसी बीच ट्रस्ट में पहले CEO की नियुक्ति की तैयारी चल रही है.

हालांकि, मामले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने जो स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई थी, उसने चंपत राय को आरोपी भी नहीं माना है. ऐसे में अटकलें हैं कि चंपत राय मंदिर ट्रस्ट में अपनी वापसी की कोशिश कर रहे हैं. इन अटकलों को और मजबूती इसलिए मिली क्योंकि 3 सितंबर की बैठक से पहले चंपत राय अयोध्या में डेरा डाले हुए हैं. वो लगातार साधु-संतों से भी मिल रहे हैं.
चिट्ठी में क्या है?18 अगस्त की डेट वाले इस लेटर को सार्वजनिक नहीं किया गया है. इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, चंपत राय के करीबी लोगों का दावा है कि यह लेटर उन्होंने ही लिखा है. चंपत राय ने भी अब तक न तो इसकी पुष्टि की है और न इससे इनकार ही किया है. हालांकि, मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्र के बारे में 33-पॉइंट वाले लेटर के एक हिस्से पर लोगों का ध्यान गया है. लेटर में मिश्र को वह ‘व्यक्ति’ बताया गया है जिसने निर्माण समिति और 70 एकड़ के मंदिर परिसर के मैनेजमेंट से जुड़े अहम फैसले लिए.
इसमें कहा गया है कि मंदिर निर्माण से जुड़ा कोई भी फैसला मिश्र की अगुवाई वाली समिति की मंजूरी के बिना नहीं लिया गया. मंदिर निर्माण के मामले में वही आखिरी अथॉरिटी थे. यह लेटर कोविड के दौरान और उसके बाद प्रोजेक्ट को पूरा करने में अहम फैसले लेने और देखरेख करने का श्रेय उन्हें देता है लेकिन यह आरोप भी लगाता है कि मिश्र ने निर्माण समिति में अपनी पसंद के कुछ लोगों को शामिल किया. लेटर का दावा है कि उनमें से एक व्यक्ति छह साल में सिर्फ एक या दो बार अयोध्या गया. जबकि दूसरे से सुरक्षा से जुड़े मामलों पर सलाह ली गई थी.
लेटर के अनुसार, मंदिर के निर्माण के लिए मिश्र के सुझाव पर ही लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को चुना गया था जबकि बाकी इमारतों के डिजाइन और निर्माण के लिए नोएडा के डिजाइन एसोसिएट को चुना गया था.
क्या बोले नृपेंद्र मिश्र?इधर, नृपेंद्र मिश्र का कहना है कि उन्हें न तो ऐसा कोई लेटर मिला है और न ही उन्हें इसके बारे में कोई जानकारी है. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा कोई दस्तावेज होता भी तो भी वह किसी पर आरोप नहीं लगाते. उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के भीतर मतभेद होने की बात फैलाने की कोशिश की जा रही है. मिश्र ने कहा,
3 सितंबर को होगी बैठकमैंने ऐसा कोई लेटर नहीं देखा है. जब तक मैं कोई लेटर नहीं देख लेता, तब तक मैं यही कहूंगा कि यह आपकी कल्पना है. भले ही वह नौ पन्नों का हो, फिर भी उन्होंने (राय ने) कोई आलोचना नहीं की होगी. आप बस विवाद खड़ा करना चाहते हैं. इसीलिए आप ऐसी बातें कर रहे हैं.
3 सितंबर की बैठक में CEO की नियुक्ति पर चर्चा होने की उम्मीद है. यह कदम मंदिर के लिए एक अधिक औपचारिक प्रशासनिक ढांचा बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा. खासकर दान की चोरी के मामले के बाद, जिसमें यूपी पुलिस ने अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया है.
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ट्रस्ट के सूत्रों ने बताया कि अंतिम चयन के लिए तीन उम्मीदवारों के नामों पर फैसला होगा. ये फैसला एक विशेष समिति द्वारा किया जा रहा है जिसे नाम सुझाने के लिए बनाया गया था. सूत्रों ने कहा कि ट्रस्ट के काम की प्रकृति को देखते हुए किसी रिटायर्ड नौकरशाह को प्राथमिकता दी जा रही है.
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