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जॉब के नाम पर भारत लाए, बंधक बनाया, 453 नेपाली नागरिकों को यूपी पुलिस ने बचा लिया

गलत तरीके से भारत ले जाए लोगों के पीछे पूरा रैकेट काम करता है. इस नेक्सस में सबका काम बंटा हुआ है. इसमें कुछ लोग नए लोगों को ट्रेनिंग देने का काम करते थे, जबकि दूसरे लोग मेंबरशिप फीस इकट्ठा करने और अपने नेटवर्क को बढ़ाने पर ध्यान देते थे.

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सभी लोगों के सोनौली बॉर्डर के जरिए भारत के कुशीनगर लाया गया था (PHOTO-Mikhail Esteves/Flickr)

जॉब दिलाने के नाम पर भारत लाए गए  453 नेपाली नागरिकों को उत्तर प्रदेश के कुशीनगर से रेस्क्यू किया गया है. इन सभी लोगों को स्किल ट्रेनिंग और अच्छी जॉब का झूठा वादा करके भारत लाया गया था. ये सभी लोग बीते तीन महीनों से एक किराए के मकान में रह रहे थे. सभी नेपाली नागरिकों को वादा किया गया था कि उन्हें ट्रेनिंग के लिए भी कुछ पैसे दिए जाएंगे. कई पीड़ितों का आरोप है कि न सिर्फ उनके साथ फ्रॉड हुआ, बल्कि जब उन्होंने नौकरी या नेपाल वापस जाने की मांग की तो उन्हें गैरकानूनी तरीके से बंधक बना लिया गया.

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कैसे पकड़ा गया रैकेट?

ये कथित रैकेट तब पकड़ा गया जब कुछ पीड़ितों ने नेपाल में अपने परिवार को इसकी जानकारी दी. कुछ ने तो सोशल मीडिया पर भी अपना दर्द बयां किया. इस बात की जानकारी नई दिल्ली स्थित नेपाल के दूतावास को भी हुई. इसके बाद नेपाली दूतावास ने भारतीय अधिकारियों को इसकी जानकारी दी. इसके बाद एक ऑपरेशन चलाकर पीड़ितों को यूपी के कुशीनगर में ट्रेस किया गया.

पुलिस की टीम ने उन्हें कुशीनगर के कसया नगर इलाके में ढूंढना शुरू किया. ट्रेस करते-करते पुलिस उस किराए के मकान तक पहुंची, जहां लोगों को रखा गया था. इसके बाद 30 मई को बिल्कुल भोर में पुलिस ने मकान पर छापा मारकर सभी नेपाली नागरिकों को रेस्क्यू किया. रेस्क्यू करने के बाद नेपाली नागरिकों को 8 बसों से वापस नेपाल भेजा गया. नेपाली दूतावास की मदद से उन्हें सोनौली बॉर्डर पार करवाया गया.

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नेपाल के बुटवल के एरिया पुलिस ऑफिस में डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस निशांत श्रीवास्तव ने काठमांडू पोस्ट को बताया,

उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ लगातार चार दिनों तक तालमेल बिठाने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ऑफिस से मिले सहयोग के बाद हम पीड़ितों को बचाने में कामयाब रहे.

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डीएसपी श्रीवास्तव ने बताया कि गलत तरीके से भारत ले जाए गए लोगों के पीछे पूरा रैकेट काम करता है. इस नेक्सस में सबका काम बंटा हुआ है. इसमें कुछ लोग नए लोगों को ट्रेनिंग देने का काम करते थे, जबकि दूसरे लोग मेंबरशिप फीस इकट्ठा करने और अपने नेटवर्क को बढ़ाने पर ध्यान देते थे. बचाए गए सभी लोगों भैरहवा के डिस्ट्रिक्ट पुलिस ऑफिस में रखा गया है. पहचान कन्फर्म होने के बाद सभी लोगों को उनके परिवारों को सौंप दिया जाएगा.

वीडियो: मानसरोवर यात्रा पर नेपाल ने जताया विरोध, भारत ने क्या जवाब दिया?

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