दिवाली की रोशनी हो या छठ का घाट, त्योहारों की असली खुशी तो अपनों के साथ ही होती है. लेकिन घर पहुंचने के लिए अगर ट्रेन में पैर रखने की जगह न मिले, दरवाजे पर लटककर सफर करना पड़े और रात गुजारने के लिए डिब्बे में कपड़े का झूला बनाना पड़े, तो इस खुशी का क्या मतलब? सरकार और रेलवे हर साल त्योहारों पर खास इंतजाम करने के दावे करते हैं. स्पेशल ट्रेनें भी चलती हैं. लेकिन तस्वीरें बता रही हैं कि यात्रियों की भीड़ के सामने ये इंतजाम कितने कम पड़ रहे हैं.
गठरी जैसे दबकर दिवाली मनाने घर जा रहे लोग, ट्रेनों में पैर टिकाने की जगह मिलना मुश्किल
दिवाली और छठ पर घर लौटने वाले यात्रियों को ट्रेनों में भारी भीड़ का सामना करना पड़ रहा है. जनरल डिब्बों में जगह नहीं है. लोग दरवाजों पर लटककर और खड़े होकर सफर कर रहे हैं. स्पेशल ट्रेनें चलने के बावजूद यात्री रेलवे से अतिरिक्त डिब्बे और बेहतर इंतजाम की मांग कर रहे हैं.

दिल्ली, मुंबई और गुजरात जैसे शहरों में काम करने वाले लोग दिवाली और छठ मनाने के लिए उत्तर प्रदेश और बिहार लौट रहे हैं. लेकिन घर पहुंचने का सफर उनके लिए किसी मुश्किल परीक्षा से कम नहीं है. नियमित ट्रेनों के जनरल डिब्बों में इतनी भीड़ है कि कई लोग खड़े होकर और कुछ दरवाजों पर लटककर सफर कर रहे हैं.
पुरुषोत्तम एक्सप्रेस में पैर रखने की जगह नहींआजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस भीड़ की तस्वीरें पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पर भी देखने को मिलीं. ये दिल्ली-हावड़ा रेल मार्ग का एक बड़ा स्टेशन है. यहां पहुंचने वाली पुरुषोत्तम एक्सप्रेस में यात्रियों की भारी भीड़ थी. ये ट्रेन आनंद विहार से चलकर कानपुर, प्रयागराज, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन और गया होते हुए पुरी जाती है. इसके जनरल डिब्बों में चढ़ना तक मुश्किल हो रहा था.
आजतक से बात करते हुए भुसावल से गया जा रहे पिंटू कुमार ने बताया कि वो खड़े-खड़े यहां तक पहुंचे हैं. अलीपुर से गया जा रहे विजय कुमार ने भी भीड़ की वजह से परेशानी बताई. जयपुर से गया जा रहे संदीप कुमार ने कहा कि वो किसी तरह दरवाजे पर लटककर यहां तक पहुंचे हैं. वहीं दिल्ली से गया जा रहे गुरु प्रसाद बताते हैं कि वो दिल्ली से ही खड़े होकर सफर कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि दरवाजे पर लटकना खतरनाक है, लेकिन उनके पास दूसरा रास्ता नहीं है. उनके मुताबिक, स्पेशल ट्रेनें चलने के बावजूद यात्रियों की भीड़ के मुकाबले इंतजाम कम हैं.

विवेक कुमार बताते हैं कि डिब्बे में इतनी भीड़ है कि बाथरूम तक पहुंचना मुश्किल है. पानी की कमी है और गंदगी भी है. राहुल कुमार ने भी टॉयलेट में पानी नहीं होने की शिकायत की. यात्री शंभू यादव ने सरकार से मांग की कि त्योहारों के वक्त ट्रेन में जनरल डिब्बों की संख्या बढ़ाई जाए.

ऐसा ही हाल लोकमान्य तिलक टर्मिनस से भागलपुर होते हुए गोड्डा जाने वाली ट्रेन का भी था. आज तक की रिपोर्ट के मुताबिक, जब ये ट्रेन पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन पहुंची, तो जनरल डिब्बों में भारी भीड़ थी. कुछ यात्रियों ने डिब्बे की गैलरी में कपड़े का झूला बना लिया था, ताकि रात में उस पर लेट सकें. कई लोग दरवाजे पर लटककर सफर कर रहे थे.
यह भी पढ़ें : ‘UPI को फ्री रखने का वादा... ' सरकार ने MDR पर अपना इरादा साफ कर दिया
रेलवे ने दिवाली और छठ को देखते हुए कई स्पेशल ट्रेनें चलाई हैं. स्टेशनों पर भीड़ संभालने के लिए जीआरपी, आरपीएफ और कमर्शियल विभाग के कर्मचारियों को तैनात किया गया है. लेकिन नियमित ट्रेनों में भीड़ अब भी कम नहीं हुई है. सफर करने वालों की मांग है कि, रेलवे जनरल डिब्बों की संख्या बढ़ाए और ज्यादा स्पेशल ट्रेनें चलाए, ताकि लोगों को त्योहार मनाने घर पहुंचने के लिए अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े.
वीडियो: पत्नी की शिकायत पर SP भानु प्रताप सिंह की कुर्सी गई, मामला क्या है?












